अल-क़मर · 47/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ ۝٤٧
Innal mujrimeena fee dalaalinw wa su`ur
📖 हिंदी अर्थ
बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुजरिमीन (المجرمين) — अपराधी, अर्थात वे लोग जिन्होंने कुफ्र और गुनाहों को अपनाया।
  • ज़लाल (ضلال) — गुमराही, सत्य से भटकाव, पथभ्रष्टता।
  • सु'उर (سُعُر) — भड़कती हुई आग, दहकती ज्वाला, अर्थात नरक की आग।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में साफ़ और स्पष्ट शब्दों में बताते हैं कि जो लोग अपराध और गुनाह में डूबे हुए हैं — चाहे वह शिर्क हो, कुफ्र हो, या दूसरे बड़े पाप — वे दो चीज़ों में मुब्तिला हैं:

पहली: वे ज़लाल (गुमराही) में हैं। यानी दुनिया में वे सच्चाई से भटके हुए हैं, उनकी समझ और उनका रास्ता ग़लत है। वे सोचते हैं कि वे सही हैं, लेकिन हक़ीक़त में वे अंधेरे में भटक रहे हैं। उनका दिल, उनकी आँखें और उनका दिमाग़ सत्य को देखने से महरूम हैं। यह गुमराही उनकी अपनी कमाई है, क्योंकि उन्होंने हक़ को ठुकराया और बातिल को अपनाया।

दूसरी: वे सु'उर (भड़कती हुई आग) में हैं। यानी आख़िरत में उनका अंजाम दहकती हुई नरक की आग है। जिस तरह दुनिया में उनका दिल गुनाहों से जलता रहा और उन्होंने हक़ से मुँह मोड़ा, उसी तरह आख़िरत में उनका जिस्म उस आग में जलेगा जो उनके गुनाहों के बराबर होगी। उन्हें उस दिन उनके चेहरों के बल नरक की तरफ़ घसीटा जाएगा, और कहा जाएगा: "चखो जहन्नम की सख़्त सज़ा का मज़ा!"

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हमें आगाह किया है कि गुनाह और कुफ्र का रास्ता इंसान को दुनिया में भी सुकून नहीं देता, और आख़िरत में भी उसे सिर्फ़ अज़ाब ही मिलता है। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है — उसने तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। जो कोई भी अपनी गुमराही से बाज़ आए, अपने गुनाहों से तौबा करे, और अल्लाह की रहमत की तरफ़ लौटे, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसे जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की राह दिखाता है।

तो आओ, हम इस आयत से सीख लें — कि सच्ची कामयाबी अल्लाह की इताअत में है, और बर्बादी उसकी नाफ़रमानी में। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलाए और हमें जहन्नम की आग से बचाए। आमीन।



📜 आयत 45-49 — सूरा अल-क़मर

45سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे
46بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है
47إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ
बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं
48يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ
उस रोज़ ये लोग अपने अपने मुँह के बल (जहन्नुम की) आग में घसीटे जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा) अब जहन्नुम की आग का मज़ा चखो
49إِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ
बेशक हमने हर चीज़ एक मुक़र्रर अन्दाज़ से पैदा की है
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
47आयत

अनुवाद — अल-क़मर 47

सूरा अल-क़मर आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं

सूरा आयत 47/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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