अल-क़मर · 50/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
وَمَا أَمْرُنَا إِلَّا وَاحِدَةٌ كَلَمْحٍ بِالْبَصَرِ ۝٥٠
Wa maaa amrunaaa illaa waahidatun kalamhim bilbasar
📖 हिंदी अर्थ
और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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📜 आयत 48-52 — सूरा अल-क़मर

48يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ
उस रोज़ ये लोग अपने अपने मुँह के बल (जहन्नुम की) आग में घसीटे जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा) अब जहन्नुम की आग का मज़ा चखो
49إِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ
बेशक हमने हर चीज़ एक मुक़र्रर अन्दाज़ से पैदा की है
50وَمَا أَمْرُنَا إِلَّا وَاحِدَةٌ كَلَمْحٍ بِالْبَصَرِ
और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है
51وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا أَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हम तुम्हारे हम मशरबो को हलाक कर चुके हैं तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
52وَكُلُّ شَيْءٍ فَعَلُوهُ فِي الزُّبُرِ
और अगर चे ये लोग जो कुछ कर चुके हैं (इनके) आमाल नामों में (दर्ज) है
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
50आयत

अनुवाद — अल-क़मर 50

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Friday, October 2, 2026

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