अल-अनआम · 15/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ ۝١٥
Qul inneee akhaafu in `asaitu Rabbee `azaaba Yawmin `Azeem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि अगर मैं नाफरमानी करुँ तो बेशक एक बड़े (सख्त) दिल के अज़ाब से डरता हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَخَافُ: मैं डरता हूँ।
  • عَصَيْتُ: मैंने नाफ़रमानी की / अवज्ञा की।
  • عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ: उस महान दिन (क़ियामत) की यातना।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए जो आपको धमकाते हैं और आपके दीन से रोकना चाहते हैं: "मैं अपने रब की नाफ़रमानी से डरता हूँ। अगर मैंने उसकी अवज्ञा की, उसके हुक्म की ख़िलाफ़वरज़ी की, या उसके साथ किसी और की इबादत की (शिर्क किया), या उसके किसी भी आदेश का उल्लंघन किया और उसकी मनाही की हुई किसी चीज़ को किया, तो मुझे उस महान दिन — यानी क़ियामत के दिन — की भयानक यातना का डर है। यह वह दिन है जिसकी सख़्ती और अज़ाब से कोई भी बच नहीं सकता, सिवाय उसके जिस पर अल्लाह रहम करे।"

मैं इसलिए अल्लाह की इबादत में किसी को साझी नहीं बनाता, और न ही उसके हुक्म से सरताबी करता हूँ, क्योंकि मैं उस दिन के अज़ाब से डरता हूँ जिस दिन हर इंसान अपने किए का बदला पाएगा। यह डर ही मुझे सच्चे दीन पर क़ायम रखता है और बातिल से दूर रखता है।

फ़ायदे (सबक़ और नसीहत):

  1. अल्लाह का डर — एक मोमिन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह अल्लाह की नाफ़रमानी से डरता है। यह डर उसे गुनाहों से रोकता है और नेकी पर मज़बूत करता है।
  2. नबी की तालीम — अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने खुद को भी अल्लाह के अज़ाब से डरने वाला बताया, ताकि हमें सिखाएँ कि अल्लाह का डर किसी के लिए शर्म की बात नहीं, बल्कि ईमान की निशानी है।
  3. क़ियामत पर ईमान — यह आयत हमें क़ियामत के दिन की याद दिलाती है, जो हर इंसान के लिए आएगा। इस याद से इंसान की ज़िंदगी में सुधार आता है और वह आख़िरत की तैयारी करता है।
  4. शिर्क से बचाव — यह आयत शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी बनाने) की सख़्त मुख़ालफ़त सिखाती है, क्योंकि शिर्क सबसे बड़ा गुनाह है जिसकी माफ़ी नहीं है।
  5. अमल की अहमियत — यह बताती है कि सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान काफ़ी नहीं, बल्कि अल्लाह के हुक्मों पर अमल करना और उसकी मनाही से बचना भी ज़रूरी है।


📜 आयत 13-17 — अल-अनआम

13۞ وَلَهُ مَا سَكَنَ فِي اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
हालॉकि (ये नहीं समझते कि) जो कुछ रात को और दिन को (रुए ज़मीन पर) रहता (सहता) है (सब) ख़ास उसी का है और वही (सब की) सुनता (और सब कुछ) जानता है
14قُلْ أَغَيْرَ اللَّهِ أَتَّخِذُ وَلِيًّا فَاطِرِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَهُوَ يُطْعِمُ وَلَا يُطْعَمُ ۗ قُلْ إِنِّي أُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ أَوَّلَ مَنْ أَسْلَمَ ۖ وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा को जो सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला है छोड़ कर दूसरे को (अपना) सरपरस्त बनाओ और वही (सब को) रोज़ी देता है और उसको कोई रोज़ी नहीं देता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझे हुक्म दिया गया है कि सब से पहले इस्लाम लाने वाला मैं हूँ और (ये भी कि ख़बरदार) मुशरेकीन से न होना
15قُلْ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि अगर मैं नाफरमानी करुँ तो बेशक एक बड़े (सख्त) दिल के अज़ाब से डरता हूँ
16مَّن يُصْرَفْ عَنْهُ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمَهُ ۚ وَذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْمُبِينُ
उस दिन जिस (के सर) से अज़ाब टल गया तो (समझो कि) ख़ुदा ने उस पर (बड़ा) रहम किया और यही तो सरीही कामयाबी है
17وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يَمْسَسْكَ بِخَيْرٍ فَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए तो उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं है और अगर तुम्हें कुछ फायदा) पहुंचाए तो भी (कोई रोक नहीं सकता क्योंकि) वह हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — अल-अनआम 15

सूरा अल-अनआम आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कहो कि अगर मैं नाफरमानी करुँ तो…

सूरा आयत 15/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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