अल-अनआम · 24/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
انظُرْ كَيْفَ كَذَبُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ ۚ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ ۝٢٤
Unzur kaifa kazaboo `alaaa anfusihim, wa dalla `anhum maa kaanoo yaftaroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल भला) देखो तो ये लोग अपने ही ऊपर आप किस तरह झूठ बोलने लगे और ये लोग (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़ी (झूठी बातें) करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَبُوا عَلَى أَنْفُسِهِمْ: उन्होंने अपने ऊपर झूठ बोला।
  • ضَلَّ عَنْهُمْ: उनसे खो गया, गायब हो गया।
  • يَفْتَرُونَ: वे झूठ घड़ते थे, मनघड़ंत बातें बनाते थे (अल्लाह के साथ साझीदार ठहराना)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! देखो कि ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) क़ियामत के दिन किस तरह अपने ऊपर झूठ बोलेंगे। जब उनसे पूछा जाएगा: "तुम्हारे वे माबूद कहाँ हैं जिन्हें तुम अल्लाह का साझीदार बनाते थे?" तो वे सख़्त इनकार करेंगे और कहेंगे: "अल्लाह की क़सम! हम मुशरिक नहीं थे।" यह उनका झूठ उन्हीं पर वापस आएगा, क्योंकि अल्लाह तआला उनके दिलों की बात और उनके अमल को खूब जानता है। वे अपने उन झूठे माबूदों से बिल्कुल मायूस हो जाएँगे जिनकी वे दुनिया में पूजा करते थे और जिनसे वे शिफ़ाअत (सिफ़ारिश) की उम्मीद लगाए बैठे थे। वे सारे माबूद उनसे ग़ायब हो जाएँगे, कोई उनकी मदद को नहीं आएगा, और वे समझ जाएँगे कि उनका सारा भरोसा और उम्मीदें बेकार और झूठी थीं।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाना, चाहे वह बुत हो, पीर-मुर्शिद हों, या कोई और चीज़, सबसे बड़ा झूठ और सबसे बड़ा नुक़सान है। जिस दिन सच सामने आएगा, उस दिन ये सारे झूठे सहारे छूमंतर हो जाएँगे। इसलिए ऐ इंसान! अपनी ज़िंदगी को सिर्फ़ अल्लाह की इबादत के लिए बनाओ, उसी पर भरोसा रखो, और उसी से मदद माँगो। यही सच्ची कामयाबी है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है और चाहता है कि वे उसकी तरफ़ रुजू करें, ताकि वे दुनिया और आख़िरत दोनों में सुख-चैन पाएँ। जो लोग सिर्फ़ अल्लाह को अपना मालिक और मददगार मानते हैं, उन्हें कभी निराशा और पछतावे का सामना नहीं करना पड़ता।



📜 आयत 22-26 — अल-अनआम

22وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا أَيْنَ شُرَكَاؤُكُمُ الَّذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम उन सबको जमा करेंगे फिर जिन लोगों ने शिर्क किया उनसे पूछेगें कि जिनको तुम (ख़ुदा का) शरीक ख्याल करते थे कहाँ हैं
23ثُمَّ لَمْ تَكُن فِتْنَتُهُمْ إِلَّا أَن قَالُوا وَاللَّهِ رَبِّنَا مَا كُنَّا مُشْرِكِينَ
फिर उनकी कोई शरारत (बाक़ी) न रहेगी बल्कि वह तो ये कहेगें क़सम है उस ख़ुदा की जो हमारा पालने वाला है हम किसी को उसका शरीक नहीं बनाते थे
24انظُرْ كَيْفَ كَذَبُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ ۚ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
(ऐ रसूल भला) देखो तो ये लोग अपने ही ऊपर आप किस तरह झूठ बोलने लगे और ये लोग (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़ी (झूठी बातें) करते थे
25وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُ إِلَيْكَ ۖ وَجَعَلْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ أَكِنَّةً أَن يَفْقَهُوهُ وَفِي آذَانِهِمْ وَقْرًا ۚ وَإِن يَرَوْا كُلَّ آيَةٍ لَّا يُؤْمِنُوا بِهَا ۚ حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوكَ يُجَادِلُونَكَ يَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
वह सब ग़ायब हो गयी और बाज़ उनमें के ऐसे भी हैं जो तुम्हारी (बातों की) तरफ कान लगाए रहते हैं और (उनकी हठ धर्मी इस हद को पहुँची है कि गोया हमने ख़ुद उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं और उनके कानों में बहरापन पैदा कर दिया है कि उसे समझ न सकें और अगर वह सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े भी देखे लें तब भी ईमान न लाएंगें यहाँ तक (हठ धर्मी पहुची) कि जब तुम्हारे पास तुम से उलझे हुए आ निकलते हैं तो कुफ्फ़ार (क़ुरान लेकर) कहा बैठे है (कि भला इसमें रखा ही क्या है) ये तो अगलों की कहानियों के सिवा कुछ भी नहीं
26وَهُمْ يَنْهَوْنَ عَنْهُ وَيَنْأَوْنَ عَنْهُ ۖ وَإِن يُهْلِكُونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
और ये लोग (दूसरों को भी) उस के (सुनने से) से रोकते हैं और ख़ुद तो अलग थलग रहते ही हैं और (इन बातों से) बस आप ही अपने को हलाक करते हैं और (अफसोस) समझते नहीं
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
24आयत

अनुवाद — अल-अनआम 24

सूरा अल-अनआम आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल भला) देखो तो ये लोग अपने ही ऊपर…

सूरा आयत 24/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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