अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَتَنَادَوْا: उन्होंने एक-दूसरे को पुकारा।
- مُصْبِحِينَ: सुबह होते ही, सुबह के समय।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब उन बाग़ वालों ने रात में यह क़सम खाई कि सुबह होते ही वे फल तोड़ लेंगे और किसी ग़रीब या ज़रूरतमंद को उसमें हिस्सेदार नहीं बनाएँगे, तो अल्लाह ने उनकी इस बुरी योजना पर उन्हें सज़ा देने का फ़ैसला किया। जब सुबह हुई, तो उन्होंने एक-दूसरे को आवाज़ दी और कहा: "अगर तुम्हें फल तोड़ने हैं, तो अपने खेत की ओर सुबह-सुबह चलो।" वे इसलिए जल्दी जा रहे थे ताकि कोई ग़रीब या मिस्कीन उन्हें देख न सके और वे अपनी कंजूसी और लालच को पूरा कर सकें।
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान की बुरी नीयत और लालच उसे अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है। ये लोग अपने बाग़ को अपनी मेहनत की कमाई समझते थे, लेकिन भूल गए कि असली मालिक तो अल्लाह है। जब इंसान अल्लाह के दिए हुए रिज़्क़ में दूसरों का हक़ नहीं देता, तो अल्लाह उसकी नेमत को ख़त्म कर सकता है।
इस क़िस्से से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और अपने माल में ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का हक़ निकालना चाहिए। जो लोग अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, अल्लाह उनकी बरकत में इज़ाफ़ा करता है, और जो लोग बुख़्ल (कंजूसी) करते हैं, वे अक्सर अपनी ही नेमतों से हाथ धो बैठते हैं। याद रखिए, अल्लाह की रहमत उन्हीं पर होती है जो दूसरों के काम आते हैं और अपने माल में अल्लाह का हक़ अदा करते हैं।
📜 आयत 19-23 — अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 21
सूरा अल-क़लम आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर ये लोग नूर के तड़के लगे बाहम गुल मचानेसूरा आयत 21/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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