अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَانطَلَقُوا – वे चल पड़े, निकल पड़े
- يَتَخَافَتُونَ – वे आपस में धीमी आवाज़ में बातें कर रहे थे, चुपके-चुपके सरगोशी कर रहे थे
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत उन बाग़ वालों के क़िस्से का हिस्सा है, जिन्होंने अपने बाग़ के फल तोड़ने का इरादा किया था, लेकिन वे चाहते थे कि यह काम इतनी चुपचाप और छिपकर किया जाए कि किसी मिस्कीन और ज़रूरतमंद को उनके बाग़ में आने का मौक़ा ही न मिले।
जब वे सुबह-सुबह अपने बाग़ की तरफ़ निकले, तो वे आपस में धीमी आवाज़ में सरगोशी कर रहे थे। वे एक-दूसरे से कह रहे थे कि आज किसी ग़रीब को अपने बाग़ में दाख़िल न होने देना, न किसी को कुछ देना। उनकी ये चुपकी और धीमी बातें इसलिए थीं ताकि कोई सुन न सके और उनकी योजना पर पर्दा पड़ा रहे। वे सोच रहे थे कि इस तरह छिपकर वे अपने माल की हिफ़ाज़त कर लेंगे, लेकिन वे भूल गए कि अल्लाह तआला सब कुछ सुनता और देखता है, और उसकी पकड़ से कोई चीज़ छिपी नहीं है।
ये क़िस्सा हमारे लिए एक बड़ी सीख है। इंसान चाहे कितनी ही चुपचाप और छिपकर अपनी योजनाएँ बनाए, अल्लाह तआला उसके दिल की हर बात और उसकी हर हरकत से पूरी तरह वाक़िफ़ है। जो लोग अपने माल और दौलत को अल्लाह की राह में ख़र्च करने से कंजूसी करते हैं और ग़रीबों की मदद से मुँह मोड़ते हैं, वे दरअसल अपने ही नुक़्सान का सामान करते हैं। अल्लाह तआला उनके माल में बरकत नहीं देता और उनकी योजनाओं को नाकाम कर देता है।
इस आयत से हमें ये सबक़ मिलता है कि हमें अपने रिज़्क़ और माल में अल्लाह का हक़ याद रखना चाहिए। ग़रीबों और मिस्कीनों की मदद करना न सिर्फ़ हमारा फ़र्ज़ है, बल्कि ये हमारे माल की बरकत और हमारी कामयाबी का ज़रिया भी है। अल्लाह तआला उन लोगों से मुहब्बत करता है जो दूसरों के काम आते हैं और उनकी मदद करते हैं। हमें चाहिए कि हम अपने अंदर इस सिफ़त को पैदा करें कि हम दूसरों की मदद करें, ख़ासकर उन लोगों की जो हमसे कमतर हैं। याद रखिए, अल्लाह तआला की रहमत और बरकत उन्हीं लोगों के नसीब होती है जो अपने भाईयों के काम आते हैं।
📜 आयत 21-25 — अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 23
सूरा अल-क़लम आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ वह लोग चले और आपस में चुपके चुपके कहते…सूरा आयत 23/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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