अल-हाक़्का · 28/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
مَا أَغْنَىٰ عَنِّي مَالِيَهْ ۜ ۝٢٨
Maaa aghnaa `annee maaliyah
📖 हिंदी अर्थ
(अफ़सोस) मेरा माल मेरे कुछ भी काम न आया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا أَغْنَى – कुछ भी काम न आया, कोई लाभ नहीं पहुँचाया
  • عَنِّي – मुझसे, मेरे काम न आया
  • مَالِيَهْ – मेरा धन, मेरी दौलत (यहाँ "ه" सुकून के लिए है, ठहराव की स्थिति में)

विस्तृत तफसीर:

यह आयत उस भयानक दृश्य का चित्रण करती है जब अमीर और शक्तिशाली लोग, जिन्होंने दुनिया में धन-दौलत जमा की थी, उसे अपनी ताकत और प्रतिष्ठा का साधन बनाया था, आज उसी धन को अपने सामने बेबस और नाकारा पाते हैं। वे पछतावे और अफसोस की आग में जलते हुए कहते हैं: "मेरा धन मेरे किसी काम न आया!" यानी जिस दौलत पर मुझे इतना नाज़ था, जिसके बल पर मैं दूसरों को नीचा समझता था, जिसे मैंने हर हालत में इकट्ठा करने की कोशिश की, आज वही दौलत मुझसे अल्लाह के अज़ाब को नहीं रोक सकती, न मेरी मुश्किलें कम कर सकती है, और न मेरी मदद के लिए आगे आ सकती है।

यह वह क्षण है जब इंसान को अपनी सारी भूलों का एहसास होता है, लेकिन पछतावे का वह समय बिल्कुल बेकार है। दुनिया में जिसने सोचा था कि पैसा ही सब कुछ है, वह आज देख रहा है कि पैसा तो बस एक बेजान चीज़ थी जो आज उससे दूर हो गई। न वह उसके साथ खड़ी है, न उसकी सिफारिश कर सकती है, न उसके बदले में कोई सज़ा ले सकती है। यही वह मौका है जब इंसान को समझ आता है कि असली चीज़ तो ईमान और अच्छे आमाल थे, जिन्हें उसने दुनिया की चमक-दमक में खो दिया।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस चीज़ को सबसे ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। क्या हम वही गलती कर रहे हैं जो उस शख्स ने की? क्या हम अपनी दौलत, अपनी नौकरी, अपनी ज़मीन-जायदाद को अपना सहारा बना रहे हैं और अल्लाह को भूल रहे हैं? याद रखिए, यह दुनिया की दौलत एक दिन हमसे छूट जाएगी, और उस दिन सिर्फ हमारे अच्छे काम और हमारा ईमान ही हमारे काम आएंगे। अल्लाह हमें समझ दे कि हम दुनिया की चीज़ों को अपना मकसद न बनाएं, बल्कि उन्हें अपने आख़िरत की तैयारी का ज़रिया बनाएं। जो शख्स अपने धन को अल्लाह की राह में खर्च करता है, वही असल में अपने धन को अपने लिए बचा लेता है, और जो उसे सिर्फ दुनिया के लिए जमा करता है, वह उस धन के साथ घाटे में रहता है।



📜 आयत 26-30 — अल-हाक़्का

26وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
और मुझे न मालूल होता कि मेरा हिसाब क्या है
27يَا لَيْتَهَا كَانَتِ الْقَاضِيَةَ
ऐ काश मौत ने (हमेशा के लिए मेरा) काम तमाम कर दिया होता
28مَا أَغْنَىٰ عَنِّي مَالِيَهْ ۜ
(अफ़सोस) मेरा माल मेरे कुछ भी काम न आया
29هَلَكَ عَنِّي سُلْطَانِيَهْ
(हाए) मेरी सल्तनत ख़ाक में मिल गयी (फिर हुक्म होगा)
30خُذُوهُ فَغُلُّوهُ
इसे गिरफ्तार करके तौक़ पहना दो
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अनुवाद — अल-हाक़्का 28

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Tuesday, August 18, 2026

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