अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَا لَيْتَهَا: काश! (यहाँ 'हा' का संदर्भ मृत्यु से है)
- الْقَاضِيَةَ: अंतिम निर्णायक, जीवन को पूर्ण रूप से समाप्त कर देने वाली, जिसके बाद कोई पुनर्जीवन न हो।
व्याख्या:
जब अभागे व्यक्ति को उसका आमालनामा बाएँ हाथ में दिया जाएगा, तो वह घोर पछतावे और हसरत के साथ कहेगा: "काश! वह मृत्यु जो मुझे दुनिया में आई थी, वही अंतिम और निर्णायक होती! काश मुझे दोबारा जीवित न किया जाता, और मैं इस हिसाब-किताब और अज़ाब का सामना न करता।" यह उसकी उस हालत की तस्वीर है जब वह अपने सामने अपने बुरे कर्मों की फेहरिस्त देखेगा और समझ जाएगा कि अब कोई मौका नहीं बचा, न कोई बहाना काम आएगा, न कोई सिफारिश उसे बचा सकेगी। वह चाहेगा कि काश उसकी मौत ही आखिरी मंज़िल होती और वह इस भयानक दिन को न देखता।
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है, और मौत अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। जो लोग आज अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों से ग़ाफ़िल हैं, वे उस दिन ऐसी हसरतें करेंगे जो किसी काम न आएँगी। अल्लाह ने हमें मौका दिया है, रहमत का दरवाज़ा खुला है, तौबा की राह आसान है। आज ही अपने रब की तरफ लौट आएँ, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अपने आमालनामे को रोशन करें, ताकि कल क़ियामत के दिन हमारा नाम सईदों (खुशकिस्मतों) की फेहरिस्त में लिखा जाए, और हम जन्नत की नेमतों से हमेशा के लिए नवाज़े जाएँ। याद रखिए, यह दुनिया का जीवन बहुत छोटा है, लेकिन इसकी कमाई आख़िरत में हमेशा हमारे साथ रहेगी।
📜 आयत 25-29 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 27
सूरा अल-हाक़्का आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ काश मौत ने (हमेशा के लिए मेरा) काम तमाम…सूरा आयत 27/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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