अल-हाक़्का · 50/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
وَإِنَّهُ لَحَسْرَةٌ عَلَى الْكَافِرِينَ ۝٥٠
Wa innahu lahasratun `alal kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक़ नहीं कि ये काफ़िरों की हसरत का बाएस है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَحَسْرَةٌ – अत्यधिक पछतावा, दुःख और निराशा। यह ऐसा पछतावा है जिसका कोई इलाज नहीं होता।
  • عَلَى الْكَافِرِينَ – उन लोगों पर जो क़ुरआन को झुठलाते हैं और उस पर ईमान नहीं लाते।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी और दुखद समाचार है जो क़ुरआन को झुठलाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन — जो सत्य है और जिसमें कोई संदेह नहीं — क़यामत के दिन काफ़िरों के लिए अत्यधिक पछतावे और हसरत का कारण बनेगा।

जब क़यामत का दिन आएगा और काफ़िर देखेंगे कि जिन लोगों ने क़ुरआन पर ईमान लाया था, वे जन्नत की नेमतों में होंगे, और वे स्वयं जहन्नम की यातना में होंगे — उस समय उन्हें अपने कुफ्र और इनकार पर बहुत पछतावा होगा। वे कहेंगे: "काश! हमने भी ईमान लाया होता, काश! हमने भी क़ुरआन को माना होता।" लेकिन वह पछतावा उनके किसी काम न आएगा।

यह हसरत और पछतावा इसलिए होगा क्योंकि उन्होंने उस चीज़ को ठुकरा दिया जो उनकी भलाई और सफलता का ज़रिया थी। क़ुरआन तो रहमत और हिदायत है, लेकिन उन्होंने इसे अपने लिए शर्मिंदगी और अज़ाब का सबब बना लिया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क़ुरआन एक ऐसी नेमत है जिसे अल्लाह ने हमें दिया है। यह हमारे लिए रोशनी, रहमत और सफलता का ज़रिया है। जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। और जो इसे ठुकराएगा, वह क़यामत के दिन पछताएगा — लेकिन तब पछताने का कोई फायदा नहीं होगा।

आओ हम इस नेमत की क़द्र करें, क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही हमारी सच्ची कामयाबी है। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 48-52 — सूरा अल-हाक़्का

48وَإِنَّهُ لَتَذْكِرَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ
ये तो परहेज़गारों के लिए नसीहत है
49وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ
और हम ख़ूब जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग (इसके) झुठलाने वाले हैं
50وَإِنَّهُ لَحَسْرَةٌ عَلَى الْكَافِرِينَ
और इसमें शक़ नहीं कि ये काफ़िरों की हसरत का बाएस है
51وَإِنَّهُ لَحَقُّ الْيَقِينِ
और इसमें शक़ नहीं कि ये यक़ीनन बरहक़ है
52فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ
तो तुम अपने परवरदिगार की तसबीह करो
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अनुवाद — अल-हाक़्का 50

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Thursday, October 1, 2026

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