अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَحَسْرَةٌ – अत्यधिक पछतावा, दुःख और निराशा। यह ऐसा पछतावा है जिसका कोई इलाज नहीं होता।
- عَلَى الْكَافِرِينَ – उन लोगों पर जो क़ुरआन को झुठलाते हैं और उस पर ईमान नहीं लाते।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी और दुखद समाचार है जो क़ुरआन को झुठलाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन — जो सत्य है और जिसमें कोई संदेह नहीं — क़यामत के दिन काफ़िरों के लिए अत्यधिक पछतावे और हसरत का कारण बनेगा।
जब क़यामत का दिन आएगा और काफ़िर देखेंगे कि जिन लोगों ने क़ुरआन पर ईमान लाया था, वे जन्नत की नेमतों में होंगे, और वे स्वयं जहन्नम की यातना में होंगे — उस समय उन्हें अपने कुफ्र और इनकार पर बहुत पछतावा होगा। वे कहेंगे: "काश! हमने भी ईमान लाया होता, काश! हमने भी क़ुरआन को माना होता।" लेकिन वह पछतावा उनके किसी काम न आएगा।
यह हसरत और पछतावा इसलिए होगा क्योंकि उन्होंने उस चीज़ को ठुकरा दिया जो उनकी भलाई और सफलता का ज़रिया थी। क़ुरआन तो रहमत और हिदायत है, लेकिन उन्होंने इसे अपने लिए शर्मिंदगी और अज़ाब का सबब बना लिया।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क़ुरआन एक ऐसी नेमत है जिसे अल्लाह ने हमें दिया है। यह हमारे लिए रोशनी, रहमत और सफलता का ज़रिया है। जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। और जो इसे ठुकराएगा, वह क़यामत के दिन पछताएगा — लेकिन तब पछताने का कोई फायदा नहीं होगा।
आओ हम इस नेमत की क़द्र करें, क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही हमारी सच्ची कामयाबी है। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 48-52 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 50
सूरा अल-हाक़्का आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसमें शक़ नहीं कि ये काफ़िरों की हसरत का…सूरा आयत 50/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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