अल-आराफ · 17/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
ثُمَّ لَآتِيَنَّهُم مِّن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ وَعَنْ أَيْمَانِهِمْ وَعَن شَمَائِلِهِمْ ۖ وَلَا تَجِدُ أَكْثَرَهُمْ شَاكِرِينَ ۝١٧
Summa la aatiyannahum mim baine aideehim wa min khalfihim wa `an aimaanihim wa `an shamaaa`ilihim wa laa tajidu aksarahum shaakireen
📖 हिंदी अर्थ
फिर उन लोगों से और उनके पीछे से और उनके दाहिने से और उनके बाएं से (गरज़ हर तरफ से) उन पर आ पडूंगा और (उनको बहकाउंगा) और तू उन में से बहुतरों की शुक्रग़ुज़ार नहीं पायेगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ: उनके सामने की ओर से (आख़िरत की ओर से)
  • وَمِنْ خَلْفِهِمْ: उनके पीछे की ओर से (दुनिया की ओर से)
  • عَنْ أَيْمَانِهِمْ: उनकी दाहिनी ओर से (नेकियों के रास्तों की ओर से)
  • عَن شَمَائِلِهِمْ: उनकी बायीं ओर से (बुराइयों के रास्तों की ओर से)
  • شَاكِرِينَ: शुक्रगुज़ार, कृतज्ञ (अर्थात ईमानवाले)

तफ़सीर:

इबलीस ने यह भी कहा कि "फिर मैं उनके सामने से और उनके पीछे से, उनकी दाहिनी ओर से और उनकी बायीं ओर से आऊँगा।" यानी मैं हर दिशा और हर तरफ़ से उन्हें गुमराह करने की कोशिश करूँगा। मैं उन्हें आख़िरत के बारे में शक में डालूँगा, दुनिया की मोहब्बत उनके दिलों में डालूँगा, नेक कामों से रोकूँगा और बुरे कामों को उनके लिए ख़ूबसूरत बनाकर पेश करूँगा। मैं उनके सामने शुबहात (संदेह) पैदा करूँगा और उनकी इच्छाओं और ख्वाहिशों को भड़काऊँगा। इबलीस ने यह भी कहा कि "ऐ मेरे रब! तू उनमें से अधिकतर लोगों को शुक्रगुज़ार (कृतज्ञ) नहीं पाएगा," यानी उनमें से ज़्यादातर लोग तेरा शुक्र अदा नहीं करेंगे और तेरे ईमान और इबादत पर क़ायम नहीं रहेंगे। यह बात इबलीस ने अपने अंदाज़े और गुमान से कही थी, और उसका यह अंदाज़ा सही साबित हुआ, जैसा कि क़ुरआन में कहा गया: "इबलीस ने उनके बारे में अपना गुमान सच कर दिखाया" (सूरा सबा: 20)।

फ़ायदे:

  1. शैतान इंसान का खुला दुश्मन है और वह हर तरफ़ से उसे गुमराह करने की कोशिश करता है, इसलिए हमें हमेशा उसके वसवसों से बचने की दुआ माँगनी चाहिए और अल्लाह की पनाह लेनी चाहिए।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि शैतान नेकियों के रास्तों से भी इंसान को रोकने की कोशिश करता है, इसलिए नेक काम करते समय भी हमें अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए।
  3. अल्लाह का शुक्र अदा करना और उसकी नेअमतों को पहचानना ही असली ईमान की निशानी है, और शैतान की कोशिश यही है कि इंसान अल्लाह का शुक्र न करे।
  4. यह आयत हमें आगाह करती है कि दुनिया की मोहब्बत और आख़िरत के बारे में शक शैतान के सबसे बड़े हथियार हैं, इसलिए हमें इनसे बचकर रहना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-आराफ

15قَالَ إِنَّكَ مِنَ الْمُنظَرِينَ
जिस दिन सारी ख़ुदाई के लोग दुबारा जिलाकर उठा खड़े किये जाएगें
16قَالَ فَبِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأَقْعُدَنَّ لَهُمْ صِرَاطَكَ الْمُسْتَقِيمَ
फ़रमाया (अच्छा मंजूर) तुझे ज़रूर मोहलत दी गयी कहने लगा चूँकि तूने मेरी राह मारी तो मैं भी तेरी सीधी राह पर बनी आदम को (गुमराह करने के लिए) ताक में बैठूं तो सही
17ثُمَّ لَآتِيَنَّهُم مِّن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ وَعَنْ أَيْمَانِهِمْ وَعَن شَمَائِلِهِمْ ۖ وَلَا تَجِدُ أَكْثَرَهُمْ شَاكِرِينَ
फिर उन लोगों से और उनके पीछे से और उनके दाहिने से और उनके बाएं से (गरज़ हर तरफ से) उन पर आ पडूंगा और (उनको बहकाउंगा) और तू उन में से बहुतरों की शुक्रग़ुज़ार नहीं पायेगा
18قَالَ اخْرُجْ مِنْهَا مَذْءُومًا مَّدْحُورًا ۖ لَّمَن تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُمْ أَجْمَعِينَ
ख़ुदा ने फरमाया यहाँ से बुरे हाल में (राइन्दा होकर निकल) (दूर) जा उन लोगों से जो तेरा कहा मानेगा तो मैं यक़ीनन तुम (और उन) सबको जहन्नुम में भर दूंगा
19وَيَا آدَمُ اسْكُنْ أَنتَ وَزَوْجُكَ الْجَنَّةَ فَكُلَا مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ الظَّالِمِينَ
और (आदम से कहा) ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीबी (दोनों) बेहश्त में रहा सहा करो और जहाँ से चाहो खाओ (पियो) मगर (ख़बरदार) उस दरख्त के करीब न जाना वरना तुम अपना आप नुक़सान करोगे
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अनुवाद — अल-आराफ 17

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Tuesday, August 18, 2026

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