अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَلَنَسْأَلَنَّ: हम अवश्य प्रश्न करेंगे (यहाँ यह प्रश्न पूछना ताड़ना और जवाबदेही के लिए होगा)।
- الَّذِينَ أُرْسِلَ إِلَيْهِمْ: वे लोग (उम्मतें) जिनकी ओर रसूल भेजे गए थे।
- الْمُرْسَلِينَ: भेजे गए रसूल (पैगंबर)।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में क़यामत के दिन के एक महत्वपूर्ण दृश्य का वर्णन कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि हम अवश्य उन उम्मतों (समुदायों) से सवाल करेंगे जिनकी ओर रसूल भेजे गए थे, कि उन्होंने अपने रसूलों के संदेश का क्या जवाब दिया? क्या उन्होंने उन्हें माना या झुठलाया? और क्या उन्होंने उनके द्वारा लाए गए आदेशों पर अमल किया या उनकी अवहेलना की? यह प्रश्न ताड़ना और जवाबदेही के रूप में होगा, ताकि हर समुदाय को उसके कर्मों का सामना करना पड़े।
इसी प्रकार, हम रसूलों से भी अवश्य पूछेंगे कि उन्होंने अपने रब का संदेश अपनी उम्मतों तक पहुँचाया या नहीं? और उनकी उम्मतों ने उन्हें क्या उत्तर दिया? यह रसूलों से पूछताछ उनके संदेश को सत्यापित करने और उनकी निष्ठा को प्रमाणित करने के लिए होगी, न कि इसलिए कि उनमें कोई कमी थी। बल्कि यह उनकी उम्मतों के खिलाफ गवाही के रूप में होगी, ताकि सच्चाई स्पष्ट हो जाए और कोई बहाना न बचे।
यह आयत उस दिन की गंभीरता को दर्शाती है जब हर व्यक्ति, हर समुदाय और हर रसूल से उनके कर्तव्यों के बारे में पूछा जाएगा। यह सिर्फ़ आम लोगों से पूछताछ नहीं होगी, बल्कि रसूलों से भी पूछा जाएगा, ताकि न्याय पूर्ण रूप से स्थापित हो और कोई बात छिपी न रहे।
फ़ायदे (सीख):
- यह आयत हमें याद दिलाती है कि क़यामत का दिन वास्तविक है और उस दिन हर व्यक्ति से उसके कर्मों का हिसाब लिया जाएगा। यह हमें अपने जीवन को सुधारने और अल्लाह के आदेशों का पालन करने की प्रेरणा देती है।
- यह आयत रसूलों की महानता और उनकी ज़िम्मेदारी को उजागर करती है। वे अल्लाह के संदेश को पहुँचाने में पूरी तरह सच्चे और निष्ठावान थे, और उनकी गवाही उनकी उम्मतों के खिलाफ़ होगी।
- यह हमें सिखाती है कि अल्लाह के संदेश को सुनने और उस पर अमल करने की ज़िम्मेदारी हमारी है। जिन लोगों तक रसूलों का संदेश पहुँचा, उनसे उसका जवाब माँगा जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को समझें और उस पर अमल करें।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का न्याय पूर्ण है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा, बल्कि हर पक्ष से पूछताछ करके सच्चाई को स्पष्ट करेगा, ताकि हर इंसान को उसके कर्मों का उचित फल मिले।
- यह हमें इस्लाम की सुंदरता से परिचित कराती है कि इस्लाम में जवाबदेही का सिद्धांत है, जो इंसान को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और बुरे कर्मों से रोकता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को सही रास्ते पर चलने में मदद करती है।
📜 आयत 4-8 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 6
सूरा अल-आराफ आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने तो ज़रूर उन लोगों से जिनकी तरफ पैग़म्बर…सूरा आयत 6/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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