Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْمَلَأُ: क़ौम के बड़े-बड़े सरदार, रईस और प्रतिष्ठित लोग।
- لَخَاسِرُونَ: अवश्य घाटे में रहने वाले, नुक़सान उठाने वाले, हलाक होने वाले।
व्याख्या:
जब पैग़म्बर शुएब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर बुलाया और उन्हें नाप-तौल में कमी करने, लूट-खसोट करने और रास्तों में बैठकर लोगों को डराने-धमकाने से रोका, तो उनकी क़ौम के जो बड़े-बड़े सरदार और नेता थे, जिन्होंने कुफ़्र और इनकार पर क़ायम रहकर सच्चाई को ठुकरा दिया था, उन्होंने अपनी अकड़ और ज़िद में आकर आम लोगों को डराने और रोकने के लिए कहा: "अगर तुम शुएब का अनुसरण करोगे और उनके दीन को क़ुबूल करोगे, तो समझ लो कि तुम बिल्कुल घाटे में रहोगे, बर्बाद और हलाक हो जाओगे।"
उनका यह कहना महज़ झूठा डर और धमकी थी, क्योंकि असल घाटे वाले वे स्वयं थे। उन्होंने अपने पैग़म्बर को झुठलाकर और हक़ को ठुकराकर दुनिया और आख़िरत दोनों का नुक़सान उठाया। उनकी यह बात उनके अहंकार, हठधर्मिता और सत्य के प्रति अंध विरोध को दर्शाती है। वे नहीं चाहते थे कि लोग सीधे रास्ते पर आएँ, क्योंकि इससे उनकी सरदारी और दुनियावी मरतबा ख़त्म हो जाता।
फ़ायदे (उपदेश):
- यह आयत बताती है कि हर ज़माने में बड़े-बड़े लोग, जिन्हें दुनिया में इज़्ज़त और ओहदा मिला होता है, वे अक्सर हक़ और सच्चाई के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि सच्चाई क़ुबूल करने से उनकी बड़ाई ख़त्म हो जाएगी।
- इससे हमें सबक़ मिलता है कि किसी की धमकी या डर से हक़ को छोड़ना नहीं चाहिए। शुएब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के सरदारों ने डराया कि "तुम घाटे में रहोगे", लेकिन असल घाटा उन्हीं का था जिन्होंने हक़ को ठुकराया।
- यह आयत मोमिनों को तसल्ली देती है कि अगर दुनिया के बड़े लोग तुम्हें बुरा कहें या तुम्हें नुक़सान की धमकी दें, तो घबराओ मत। अल्लाह की राह में उठाया गया हर क़दम असल में नफ़ा है, चाहे दुनिया की नज़र में वह नुक़सान ही क्यों न लगे।
- यह भी सीख मिलती है कि नेता और सरदारों की बातों से धोखा नहीं खाना चाहिए। उनकी बातें अक्सर अपनी मरज़ी और फ़ायदे के लिए होती हैं, जबकि हक़ वही है जो अल्लाह और उसके रसूल ने बताया।
📜 आयत 88-92 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 90
सूरा अल-आराफ आयत 90 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे (लोगों…सूरा आयत 90/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 88–92. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


