अल-आराफ · 91/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
فَأَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دَارِهِمْ جَاثِمِينَ ۝٩١
Fa akhazat humur rajfatu fa asbahoo fee daarihim jaasimeen
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ उन लोगों को ज़लज़ले ने ले डाला बस तो वह अपने घरों में औन्धे पड़े रह गए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الرَّجْفَةُ: भयानक भूकंप या ज़लज़ला, जो ज़मीन को हिला देता है।
  • جَاثِمِينَ: घुटनों के बल गिरे हुए, बेजान होकर ज़मीन पर पड़े हुए, मृत और बेहोश।

तफ़सीर:

जब हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने हक़ को ठुकराने और ज़ुल्म व कमी-तोल पर अड़े रहने पर हठ किया, और अल्लाह के अज़ाब को मज़ाक़ समझा, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पहुँचा। उन्हें एक सख़्त भूकंप (ज़लज़ले) ने आ लिया, जिससे उनकी ज़मीन काँप उठी, उनके घर उन्हीं पर गिर पड़े और वे सुबह तक अपने घरों में घुटनों के बल गिरे हुए, बेजान और मृत होकर पड़े रहे। यह उनकी सज़ा थी कि उन्होंने नबी की नसीहत को झुठलाया और अपनी सरकशी पर क़ायम रहे। यह मंज़र उनके लिए ज़िल्लत और हलाकत का था, और आने वाली क़ौमों के लिए इबरत का सबक़ बना।

फ़ायदे:

  • अल्लाह का अज़ाब जब आता है, तो किसी को मोहलत नहीं मिलती; इसलिए इंसान को चाहिए कि वह नबियों की शिक्षाओं को गंभीरता से ले।
  • ज़ुल्म, धोखाधड़ी और नाप-तोल में कमी करने वालों का अंजाम बुरा होता है, चाहे वे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।
  • अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके हुक्म से हैं; जो उसकी इताअत करे, उसके लिए रहमत है, और जो नाफ़रमानी करे, उसके लिए अज़ाब।
  • यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि हम अपने समाज में इंसाफ़ और ईमानदारी को अपनाएँ, ताकि हम अल्लाह की पकड़ से महफ़ूज़ रहें।


📜 आयत 89-93 — सूरा अल-आराफ

89قَدِ افْتَرَيْنَا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا إِنْ عُدْنَا فِي مِلَّتِكُم بَعْدَ إِذْ نَجَّانَا اللَّهُ مِنْهَا ۚ وَمَا يَكُونُ لَنَا أَن نَّعُودَ فِيهَا إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ رَبُّنَا ۚ وَسِعَ رَبُّنَا كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا ۚ عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْنَا ۚ رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَيْرُ الْفَاتِحِينَ
हम अगरचे तुम्हारे मज़हब से नफरत ही रखते हों (तब भी लौट जाएं माज़अल्लाह) जब तुम्हारे बातिल दीन से ख़ुदा ने मुझे नजात दी उसके बाद भी अब अगर हम तुम्हारे मज़हब मे लौट जाएं तब हमने ख़ुदा पर बड़ा झूठा बोहतान बॉधा (ना) और हमारे वास्ते तो किसी तरह जायज़ नहीं कि हम तुम्हारे मज़हब की तरफ लौट जाएँ मगर हाँ जब मेरा परवरदिगार अल्लाह चाहे तो हमारा परवरदिगार तो (अपने) इल्म से तमाम (आलम की) चीज़ों को घेरे हुए है हमने तो ख़ुदा ही पर भरोसा कर लिया ऐ हमारे परवरदिगार तू ही हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फैसला कर दे और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है
90وَقَالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِن قَوْمِهِ لَئِنِ اتَّبَعْتُمْ شُعَيْبًا إِنَّكُمْ إِذًا لَّخَاسِرُونَ
और उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे (लोगों से) कहने लगे कि अगर तुम लोगों ने शुएब की पैरवी की तो उसमें शक़ ही नहीं कि तुम सख्त घाटे में रहोगे
91فَأَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دَارِهِمْ جَاثِمِينَ
ग़रज़ उन लोगों को ज़लज़ले ने ले डाला बस तो वह अपने घरों में औन्धे पड़े रह गए
92الَّذِينَ كَذَّبُوا شُعَيْبًا كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۚ الَّذِينَ كَذَّبُوا شُعَيْبًا كَانُوا هُمُ الْخَاسِرِينَ
जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया था वह (ऐसे मर मिटे कि) गोया उन बस्तियों में कभी आबाद ही न थे जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया वही लोग घाटे में रहे
93فَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَا قَوْمِ لَقَدْ أَبْلَغْتُكُمْ رِسَالَاتِ رَبِّي وَنَصَحْتُ لَكُمْ ۖ فَكَيْفَ آسَىٰ عَلَىٰ قَوْمٍ كَافِرِينَ
तब शुएब उन लोगों के सर से टल गए और (उनसे मुख़ातिब हो के) कहा ऐ मेरी क़ौम मैं ने तो अपने परवरदिगार के पैग़ाम तुम तक पहुँचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख्वाही की थी, फिर अब मैं काफिरों पर क्यों कर अफसोस करूँ
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
91आयत

अनुवाद — अल-आराफ 91

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Monday, September 28, 2026

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