ग़रज़ उन लोगों को ज़लज़ले ने ले डाला बस तो वह अपने घरों में औन्धे पड़े रह गए
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
الرَّجْفَةُ: भयानक भूकंप या ज़लज़ला, जो ज़मीन को हिला देता है।
جَاثِمِينَ: घुटनों के बल गिरे हुए, बेजान होकर ज़मीन पर पड़े हुए, मृत और बेहोश।
तफ़सीर:
जब हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने हक़ को ठुकराने और ज़ुल्म व कमी-तोल पर अड़े रहने पर हठ किया, और अल्लाह के अज़ाब को मज़ाक़ समझा, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पहुँचा। उन्हें एक सख़्त भूकंप (ज़लज़ले) ने आ लिया, जिससे उनकी ज़मीन काँप उठी, उनके घर उन्हीं पर गिर पड़े और वे सुबह तक अपने घरों में घुटनों के बल गिरे हुए, बेजान और मृत होकर पड़े रहे। यह उनकी सज़ा थी कि उन्होंने नबी की नसीहत को झुठलाया और अपनी सरकशी पर क़ायम रहे। यह मंज़र उनके लिए ज़िल्लत और हलाकत का था, और आने वाली क़ौमों के लिए इबरत का सबक़ बना।
फ़ायदे:
अल्लाह का अज़ाब जब आता है, तो किसी को मोहलत नहीं मिलती; इसलिए इंसान को चाहिए कि वह नबियों की शिक्षाओं को गंभीरता से ले।
ज़ुल्म, धोखाधड़ी और नाप-तोल में कमी करने वालों का अंजाम बुरा होता है, चाहे वे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।
अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके हुक्म से हैं; जो उसकी इताअत करे, उसके लिए रहमत है, और जो नाफ़रमानी करे, उसके लिए अज़ाब।
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि हम अपने समाज में इंसाफ़ और ईमानदारी को अपनाएँ, ताकि हम अल्लाह की पकड़ से महफ़ूज़ रहें।
हम अगरचे तुम्हारे मज़हब से नफरत ही रखते हों (तब भी लौट जाएं माज़अल्लाह) जब तुम्हारे बातिल दीन से ख़ुदा ने मुझे नजात दी उसके बाद भी अब अगर हम तुम्हारे मज़हब मे लौट जाएं तब हमने ख़ुदा पर बड़ा झूठा बोहतान बॉधा (ना) और हमारे वास्ते तो किसी तरह जायज़ नहीं कि हम तुम्हारे मज़हब की तरफ लौट जाएँ मगर हाँ जब मेरा परवरदिगार अल्लाह चाहे तो हमारा परवरदिगार तो (अपने) इल्म से तमाम (आलम की) चीज़ों को घेरे हुए है हमने तो ख़ुदा ही पर भरोसा कर लिया ऐ हमारे परवरदिगार तू ही हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फैसला कर दे और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है
तब शुएब उन लोगों के सर से टल गए और (उनसे मुख़ातिब हो के) कहा ऐ मेरी क़ौम मैं ने तो अपने परवरदिगार के पैग़ाम तुम तक पहुँचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख्वाही की थी, फिर अब मैं काफिरों पर क्यों कर अफसोस करूँ
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