Allazeena kazzaboo Shu`aiban ka al alm yaghnaw feehaa; allazeena kazzaboo Shu`aiban kaanoo humul khaasireen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया था वह (ऐसे मर मिटे कि) गोया उन बस्तियों में कभी आबाद ही न थे जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया वही लोग घाटे में रहे
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
(یہ لوگ) جنہوں نے شعیب کی تکذیب کی تھی ایسے برباد ہوئے تھے کہ گویا وہ ان میں کبھی آباد ہی نہیں ہوئے تھے (غرض) جنہوں نے شعیب کو جھٹلایا وہ خسارے میں پڑگئے
كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا: गोया वे उसमें (अपने घरों में) कभी बसे ही नहीं थे। "مَغْنَى" का अर्थ है निवास स्थान या घर।
الْخَاسِرِينَ: घाटे में रहने वाले, नुक़सान उठाने वाले।
तफ़सीर:
जिन लोगों ने शुऐब (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया था, उनका अंजाम यह हुआ कि वे इस तरह तबाह और बर्बाद कर दिए गए कि गोया वे उन घरों और बस्तियों में कभी बसे ही नहीं थे। उनकी सारी आबादी, ताक़त और सुख-समृद्धि मिट गई, और उनका कोई निशान बाक़ी न रहा। यही वे लोग थे जिन्होंने शुऐब (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और वास्तव में वही सबसे बड़े घाटे में रहे — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। उन्होंने अपने आपको और अपनी सारी कमाई को खो दिया। यह ध्यान देने वाली बात है कि काफ़िरों ने यह दावा किया था कि अगर शुऐब सच्चे नबी होते तो वे और उनके अनुयायी घाटे में होते, लेकिन असलियत यह है कि घाटे में वही काफ़िर और झुठलाने वाले रहे, न कि शुऐब (अलैहिस्सलाम) के मानने वाले मोमिनीन।
फ़ायदे:
अल्लाह की सज़ा जब आती है तो वह इस कदर तबाही लाती है कि इंसान की सारी ताक़त और शानो-शौकत बेकार हो जाती है — यह सबक है कि इंसान को अल्लाह के हुक्म से बेख़बर होकर अपनी दौलत और ताक़त पर नाज़ नहीं करना चाहिए।
सच्चाई को झुठलाने वाले चाहे दुनिया में कितने भी सुखी और ताक़तवर दिखें, अंजाम में वही नुक़सान उठाते हैं। असली कामयाबी अल्लाह के नबियों पर ईमान लाने में है।
यह आयत मोमिनीन को तसल्ली देती है कि काफ़िरों के तानों और दावों की परवाह न करें; अल्लाह सच्चे बंदों की मदद करता है और झुठलाने वालों को रुसवा करता है।
इंसान को चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारे, क्योंकि दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है और आख़िरत की कामयाबी ही असली कामयाबी है।
तब शुएब उन लोगों के सर से टल गए और (उनसे मुख़ातिब हो के) कहा ऐ मेरी क़ौम मैं ने तो अपने परवरदिगार के पैग़ाम तुम तक पहुँचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख्वाही की थी, फिर अब मैं काफिरों पर क्यों कर अफसोस करूँ
और हमने किसी बस्ती में कोई नबी नही भेजा मगर वहाँ के रहने वालों को (कहना न मानने पर) सख्ती और मुसीबत में मुब्तिला किया ताकि वह लोग (हमारी बारगाह में) गिड़गिड़ाए
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