Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جَعَلُوا أَصَابِعَهُمْ فِي آذَانِهِمْ: उन्होंने अपनी उंगलियाँ अपने कानों में डाल लीं।
- وَاسْتَغْشَوْا ثِيَابَهُمْ: उन्होंने अपने कपड़ों से अपने चेहरे ढक लिए।
- وَأَصَرُّوا: वे अपने कुफ़्र और अवज्ञा पर अड़े रहे।
- وَاسْتَكْبَرُوا اسْتِكْبَارًا: उन्होंने ईमान लाने से बड़ा घमंड और अहंकार किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम की हालत अल्लाह तआला के सामने बयान कर रहे हैं कि ऐ मेरे रब! मैंने अपनी क़ौम को दिन-रात तेरी इबादत और तेरी तरफ़ बुलाया, लेकिन मेरी दावत ने उनके भागने और सच्चाई से दूर होने में ही इज़ाफ़ा किया। और ये भी कि जब भी मैंने उन्हें तेरी ओर बुलाया—ताकि तू उनके गुनाह माफ़ कर दे—तो उन्होंने अपनी उंगलियाँ अपने कानों में डाल लीं ताकि सच्चाई की आवाज़ उनके कानों तक न पहुँचे, और अपने कपड़ों से अपने चेहरे ढक लिए ताकि मुझे देखना भी पसंद न करें। वे अपने शिर्क और नाफ़रमानी पर अड़े रहे, और ईमान लाने से इस कदर घमंड किया जैसे वे सच्चाई से बड़े हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है। नबी की दावत कितनी ही सच्ची और ख़ालिस क्यों न हो, लेकिन जिन लोगों के दिलों पर मुहर लग चुकी हो और जिन्होंने अहंकार को अपना ढाल बना लिया हो, वे सच्चाई को सुनने से भी इनकार कर देते हैं। वे अपने कान बंद कर लेते हैं, अपनी आँखें मूँद लेते हैं, और अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं। यह उन लोगों का हाल है जो हक़ से मुँह मोड़ते हैं।
लेकिन इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी सीख है: हमें चाहिए कि हम अपने कान सच्चाई के लिए खुले रखें, अपने दिल को नम्र बनाएँ, और अल्लाह की तरफ़ से आने वाली हर नसीहत को गौर से सुनें। अल्लाह तआला अपने बंदों के लिए बड़ा माफ़ करने वाला है—जो कोई उसकी तरफ़ लौटे, उसके गुनाह माफ़ कर देता है। हमें अहंकार और ज़िद से बचना चाहिए, क्योंकि यही वो चीज़ें हैं जो इंसान को हिदायत से महरूम कर देती हैं। अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें सुनने वाला कान, देखने वाली आँख और नर्म दिल अता करे, और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी दावत पर लब्बैक कहते हैं।
📜 आयत 5-9 — सूरा नूह
अनुवाद — नूह 7
सूरा नूह आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मैने जब उनको बुलाया कि (ये तौबा करें और)…सूरा आयत 7/28 — सूरा नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा नूह सुनें, सूरा नूह अनुवाद, सूरा नूह mp3, सूरा नूह pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा नूह
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


