नूह · 6/28
अनुवाद उच्चारण — नूह
فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَائِي إِلَّا فِرَارًا ۝٦
Falam yazid hum du`aaa `eee illaa firaaraa
📖 हिंदी अर्थ
लेकिन वह मेरे बुलाने से और ज्यादा गुरेज़ ही करते रहे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِرَارًا: भागना, दूर हो जाना, ईमान से मुँह मोड़ लेना।

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को रात-दिन, छुपाकर और खुल्लम-खुल्ला, हर तरीक़े से ईमान की दावत देते रहे। उन्होंने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन जब उन्होंने अपनी इस लंबी और थकान भरी दावत का नतीजा देखा, तो उन्होंने अपने रब के सामने यह दर्द भरी शिकायत पेश की कि "मेरी दावत ने उन्हें और अधिक भागने पर मजबूर कर दिया।"

यानी जितना मैंने उन्हें सच्चाई की तरफ बुलाया, वे उतना ही उससे दूर भागते गए। मेरी दावत का उन पर कोई असर नहीं हुआ, बल्कि उल्टा उनका नफ़रत और विरोध और बढ़ता गया। वे सुनने से कान बंद कर लेते थे, अपने कपड़ों से अपने चेहरे ढक लेते थे, और अपने कुफ्र और अकड़ पर अड़े रहते थे। वे ईमान लाने के बजाय हक़ से दूर भागना पसंद करते थे।

यह एक बहुत बड़ा सबक़ है कि जब इंसान का दिल सच्चाई से मुँह मोड़ लेता है, तो उसे कोई भी दलील, कोई भी नसीहत फायदा नहीं पहुँचाती। हिदायत तो सिर्फ अल्लाह के हाथ में है, और वही जिसे चाहता है, अपनी रहमत से हिदायत देता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यहाँ से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि हम अपने अल्लाह की तरफ पलटें, उससे माफ़ी माँगें और उसकी इबादत में जुट जाएँ। अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला है, वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और उन पर रहमतों के दरवाज़े खोल देता है। हमें उन लोगों की तरह नहीं बनना है जो हक़ से भागते हैं, बल्कि हमें उन लोगों में से बनना है जो हक़ को कबूल करते हैं और उस पर अमल करते हैं। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — नूह

4يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ اللَّهِ إِذَا جَاءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते
5قَالَ رَبِّ إِنِّي دَعَوْتُ قَوْمِي لَيْلًا وَنَهَارًا
(जब लोगों ने न माना तो) अर्ज़ की परवरदिगार मैं अपनी क़ौम को (ईमान की तरफ) बुलाता रहा
6فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَائِي إِلَّا فِرَارًا
लेकिन वह मेरे बुलाने से और ज्यादा गुरेज़ ही करते रहे
7وَإِنِّي كُلَّمَا دَعَوْتُهُمْ لِتَغْفِرَ لَهُمْ جَعَلُوا أَصَابِعَهُمْ فِي آذَانِهِمْ وَاسْتَغْشَوْا ثِيَابَهُمْ وَأَصَرُّوا وَاسْتَكْبَرُوا اسْتِكْبَارًا
और मैने जब उनको बुलाया कि (ये तौबा करें और) तू उन्हें माफ कर दे तो उन्होने अपने कानों में उंगलियां दे लीं और मुझसे छिपने को कपड़े ओढ़ लिए और अड़ गए और बहुत शिद्दत से अकड़ बैठे
8ثُمَّ إِنِّي دَعَوْتُهُمْ جِهَارًا
फिर मैंने उनको बिल एलान बुलाया फिर उनको ज़ाहिर ब ज़ाहिर समझाया
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अनुवाद — नूह 6

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Tuesday, August 18, 2026

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