Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَالُوا سَمِعْنَا: उन्होंने कहा कि हमने सुन लिया।
- وَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ: जबकि वे वास्तव में सुनते नहीं हैं (अर्थात् उनका सुनना दिल से नहीं, बल्कि सिर्फ़ ज़ुबान से है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में ईमानवालों को नसीहत करते हुए कहते हैं कि ऐ ईमानवालों! तुम उन लोगों की तरह मत बनो, जिन्होंने (मुनाफ़िक़ीन और मुशरिकीन) जब अल्लाह की आयतें पढ़ी जातीं थीं, तो मुँह से कहते थे कि "हमने सुन लिया", लेकिन उनके दिल उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते थे, न ही वे उससे सबक़ हासिल करते थे। उनका सुनना सिर्फ़ कानों तक सीमित था, दिल तक नहीं पहुँचता था। वे न तो उस पर अमल करते थे और न ही उसे सच मानते थे। उनकी यह हालत इस बात की दलील है कि वे सुनने के बावजूद अंधे और बहरे थे, क्योंकि उन्होंने सुनकर भी उससे फ़ायदा नहीं उठाया। यह आयत मुनाफ़िक़ों के बारे में नाज़िल हुई, जो ज़ुबान से कहते थे कि हमने सुन लिया, लेकिन दिल से उसे झुठलाते थे।
फ़ायदे (उपदेश):
- सुनना सिर्फ़ कानों का काम नहीं है, बल्कि असली सुनना वह है जो दिल की गहराई तक पहुँचे और इंसान को अल्लाह की इताअत पर उभारे।
- मुनाफ़िक़ों की पहचान यह है कि वे ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं, लेकिन उनके दिलों में उसकी कोई हक़ीक़त नहीं होती।
- ईमानवाले को चाहिए कि जब वह अल्लाह की आयतें सुने, तो उन पर ग़ौर करे, उन्हें समझे और उन पर अमल करे, ताकि उसका सुनना उसके लिए नेकी का ज़रिया बने।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का कलाम सुनने का मक़सद सिर्फ़ सुनना नहीं, बल्कि उससे हिदायत हासिल करना और उसके मुताबिक़ अपनी ज़िंदगी बनाना है।
📜 आयत 19-23 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 21
सूरा अल-अनफाल आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन लोगों के ऐसे न हो जाओं जो (मुँह…सूरा आयत 21/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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