अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَمَّا – जहाँ तक, जो कोई
- مَنِ اسْتَغْنَى – जो अपने आप को बेनियाज़ समझे, जो (अल्लाह और ईमान से) बेपरवाह हो
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी मुहम्मद ﷺ को नर्म अंदाज़ में समझा रहे हैं कि आप उस व्यक्ति की ओर ध्यान देते हैं जो अपनी दौलत और ऐशो-आराम के कारण अपने आपको बेनियाज़ समझता है, यानी उसे आपकी तालीम और हिदायत की कोई ज़रूरत ही महसूस नहीं होती। वह अल्लाह और ईमान से मुँह मोड़े हुए है, क्योंकि उसे लगता है कि उसके पास सब कुछ है। वह दुनिया की चमक-दमक में इतना खोया हुआ है कि उसे आख़िरत की कोई फ़िक्र नहीं।
यहाँ अल्लाह तआला अपने रसूल ﷺ को एक बहुत ही प्यारी और नाज़ुक नसीहत कर रहे हैं — कि आप उस शख्स की परवाह करते हैं जो हिदायत से बेज़ार है, और उसे छोड़ देते हैं जो सच्चे दिल से हिदायत चाहता है। यह कोई सख्त मलामत नहीं, बल्कि एक शफ़्क़त भरी तरबियत है, ताकि दावत का काम उसी तरह हो जैसा अल्लाह को पसंद है — हक़ की प्यासी रूहों को तरजीह दी जाए।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दौलत और दुनिया का माल किसी को अल्लाह की राह से ग़ाफ़िल न कर दे। जो इंसान अपनी दौलत पर इतराता है और समझता है कि उसे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं, वह असल में सबसे बड़ा घाटे में है, क्योंकि उसने अपनी आख़िरत खो दी। अल्लाह तआला हमें इस ग़ुरूर से बचाए।
और जो लोग अल्लाह की तरफ रुजू करते हैं, चाहे वे ग़रीब हों या कमज़ोर, अल्लाह के नज़दीक वही सबसे ज़्यादा इज़्ज़त वाले हैं। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में उन लोगों की क़द्र करें जो दीन की तालीम चाहते हैं, और उन लोगों से किनारा करें जो हिदायत से मुँह मोड़ते हैं। यही अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की पसंद है।
📜 आयत 3-7 — अबस
अनुवाद — अबस 5
सूरा अबस आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जो कुछ परवाह नहीं करतासूरा आयत 5/42 — अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अबस सुनें, अबस अनुवाद, अबस mp3, अबस pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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