अबस · 4/42
अनुवाद उच्चारण — अबस
أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ الذِّكْرَىٰ ۝٤
Au yaz zak karu fatanfa `ahuz zikraa
📖 हिंदी अर्थ
या वह नसीहत सुनता तो नसीहत उसके काम आती

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْ يَذَّكَّرُ – या वह नसीहत हासिल करे, सीख ले।
  • فَتَنفَعَهُ الذِّكْرَى – तो उसे वह नसीहत (सीख) लाभ पहुँचाए।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस अंधे व्यक्ति के संदर्भ में है जो रसूलुल्लाह ﷺ के पास सवाल पूछने और सीखने की गरज से आया था, लेकिन आप ﷺ उस समय कुछ क़ुरैश के बड़े लोगों को दीन की दावत दे रहे थे और उनकी ओर ध्यान देने में मशगूल थे। अल्लाह तआला ने इस आयत में फ़रमाया कि तुम्हें क्या ख़बर है, शायद वह अंधा व्यक्ति तुम्हारे पास इसलिए आया हो कि वह तुम्हारी बात सुनकर नसीहत हासिल करे, उसका दिल साफ़ हो जाए, उसका जीवन सुधर जाए और उसे वह नसीहत जो तुम उसे दोगे, पूरा लाभ पहुँचाए।

यानी वह व्यक्ति जो सीखने और सुधरने की नीयत से आया है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसकी आत्मा को पाक करने और उसे सीधे रास्ते पर लाने की बड़ी उम्मीद है। यह आयत हमें सिखाती है कि दावत और तबलीग़ में उन लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो सीखने और सुधरने की तलब रखते हैं, और किसी भी इंसान को हल्का नहीं समझना चाहिए, क्योंकि अल्लाह के हिदायत देने से किसी को कोई रोक नहीं सकता।

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी शिक्षा है कि हमें हर उस इंसान की क़द्र करनी चाहिए जो दीन सीखने और अमल करने की चाहत रखता है, चाहे वह समाज में कितना ही छोटा या कमज़ोर क्यों न हो। अल्लाह तआला के यहाँ इंसान की अज़्मत उसके तक़वा और दीन की समझ पर है, न कि उसकी दुनियावी हैसियत पर। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और मग़फिरत तक पहुँचाता है, और यही वह नसीहत है जो दिल को ज़िंदा करती है और रूह को तरावत देती है।



📜 आयत 2-6 — अबस

2أَن جَاءَهُ الْأَعْمَىٰ
और मुँह फेर बैठा कि उसके पास नाबीना आ गया
3وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُ يَزَّكَّىٰ
और तुमको क्या मालूम यायद वह (तालीम से) पाकीज़गी हासिल करता
4أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ الذِّكْرَىٰ
या वह नसीहत सुनता तो नसीहत उसके काम आती
5أَمَّا مَنِ اسْتَغْنَىٰ
तो जो कुछ परवाह नहीं करता
6فَأَنتَ لَهُ تَصَدَّىٰ
उसके तो तुम दरपै हो जाते हो हालॉकि अगर वह न सुधरे
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अनुवाद — अबस 4

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Tuesday, August 18, 2026

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