अल-इन्फितार · 15/19
अनुवाद उच्चारण — अल-इन्फितार
يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ الدِّينِ ۝١٥
Yaslawnahaa Yawmad Deen
📖 हिंदी अर्थ
उसी में झोंके जाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَصْلَوْنَهَا: वे उस (आग) में प्रवेश करेंगे और उसकी गर्मी को अपने शरीर से महसूस करेंगे।
  • يَوْمِ الدِّينِ: बदला और हिसाब का दिन, यानी क़ियामत का दिन।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन फ़ाजिरों (दुष्कर्मियों) के अंजाम को बयान कर रही है जिन्होंने अल्लाह के हुक़ूक़ (अधिकारों) और बंदों के हुक़ूक़ में कमी की। ऐसे लोग जहन्नम की आग में डाले जाएँगे और उसकी लपटें उन्हें हर तरफ से घेर लेंगी। वे उस दिन उस आग में प्रवेश करेंगे और उसकी तपिश को अपनी जान से महसूस करेंगे — यह कोई साधारण गर्मी नहीं, बल्कि अल्लाह के अज़ाब की वह आग है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

यह "यौमुद्दीन" (बदले का दिन) है — वह दिन जब हर अच्छाई और बुराई का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा। उस दिन न तो कोई सिफ़ारिश काम आएगी, न कोई रिश्ता, और न ही कोई फ़िदया (मुआवज़ा) क़बूल होगा। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जो लोग दुनिया में उसके हुक्मों से ग़ाफ़िल रहे और अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अपनी ख्वाहिशों की पैरवी की, वे आख़िरत में अपने किए की सज़ा पाएँगे।

लेकिन इस आयत में एक बड़ी रहमत का पैग़ाम भी छिपा है — अल्लाह ने हमें आगाह कर दिया है कि इस रास्ते का अंजाम क्या है, ताकि हम आज ही अपने आपको सुधार लें। यह चेतावनी उस मेहरबान ख़ुदा की तरफ़ से है जो हमारी भलाई चाहता है और नहीं चाहता कि हम जहन्नम की आग में जलें। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह के हुक़ूक़ (नमाज़, रोज़ा, ज़कात, तौहीद) और बंदों के हुक़ूक़ (ईमानदारी, रहम, इंसाफ़) को पूरा करें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हर इंसान को उसके अमल का बदला मिलेगा। यह दिन हमारे लिए डर का नहीं, बल्कि उम्मीद का दिन बन सकता है अगर हम आज अल्लाह की राह पर चलें — क्योंकि जो लोग ईमान और नेक अमल के साथ आएँगे, उनके लिए उसी दिन जन्नत की खुशख़बरी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — अल-इन्फितार

13إِنَّ الْأَبْرَارَ لَفِي نَعِيمٍ
बेशक नेको कार (बेहिश्त की) नेअमतों में होंगे
14وَإِنَّ الْفُجَّارَ لَفِي جَحِيمٍ
और बदकार लोग यक़ीनन जहन्नुम में जज़ा के दिन
15يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ الدِّينِ
उसी में झोंके जाएँगे
16وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَائِبِينَ
और वह लोग उससे छुप न सकेंगे
17وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ
और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है
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अनुवाद — अल-इन्फितार 15

सूरा अल-इन्फितार आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी में झोंके जाएँगे

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Tuesday, August 18, 2026

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