अल-मुतफ्फिफीन · 4/36
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुतफ्फिफीन
أَلَا يَظُنُّ أُولَٰئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ ۝٤
Alaa yazunnu ulaaa`ika annahum mab`oosoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या ये लोग इतना भी ख्याल नहीं करते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَلَا يَظُنُّ: क्या उन्हें विश्वास नहीं है / क्या वे यक़ीन नहीं करते
  • أُولَٰئِكَ: ये लोग (जो नाप-तौल में कमी करते हैं)
  • مَّبْعُوثُونَ: दोबारा उठाए जाने वाले (क़ियामत के दिन जीवित किए जाने वाले)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो नाप-तौल में कमी करते हैं, यानी जब वे दूसरों से कोई चीज़ खरीदते हैं तो पूरा नाप-तौल लेते हैं, लेकिन जब वे दूसरों को बेचते हैं तो नाप-तौल में कमी करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: क्या इन लोगों को यह यक़ीन नहीं है कि उन्हें दोबारा जीवित किया जाएगा?

यह एक बहुत ही गहरा सवाल है जो अल्लाह तआला अपने बंदों से पूछ रहा है। जब कोई इंसान नाप-तौल में कमी करता है, तो वह या तो यह सोचता है कि उसे कोई देख नहीं रहा, या फिर वह यह भूल जाता है कि उसे एक दिन हिसाब देना है। अगर उसे सच में यक़ीन होता कि उसे मरने के बाद दोबारा उठाया जाएगा और उसके हर छोटे-बड़े काम का हिसाब लिया जाएगा, तो वह कभी भी इस तरह का धोखा नहीं करता।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि क़ियामत का दिन सच है, और हर इंसान को उस दिन अल्लाह के सामने खड़ा होना है। उस दिन हर इंसान से उसके अमल का हिसाब लिया जाएगा — चाहे वह एक रत्ती भर ही क्यों न हो। यह विश्वास ही इंसान को नेक कामों पर मज़बूत करता है और गुनाहों से रोकता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने हर काम में अल्लाह से डरना चाहिए। चाहे हम व्यापार करें, नौकरी करें, या किसी और काम में लगे हों — हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि अल्लाह हमें देख रहा है और एक दिन हमें अपने हर काम का हिसाब देना होगा। ईमान का तक़ाज़ा है कि हम अपने अमल में सच्चाई और ईमानदारी अपनाएँ, क्योंकि यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया में भी इज़्ज़त देती है और आख़िरत में भी कामयाबी दिलाती है।

याद रखिए, जिस इंसान को यक़ीन है कि उसे दोबारा उठाया जाना है और उसका हिसाब होना है, वह कभी धोखा नहीं कर सकता, कभी झूठ नहीं बोल सकता, और कभी किसी का हक़ नहीं मार सकता। यह यक़ीन ही इंसान को सच्चा मुसलमान बनाता है। अल्लाह तआला हम सबको यह यक़ीन अता फ़रमाए और हमें सच्चाई और ईमानदारी पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-मुतफ्फिफीन

2الَّذِينَ إِذَا اكْتَالُوا عَلَى النَّاسِ يَسْتَوْفُونَ
जो औरें से नाप कर लें तो पूरा पूरा लें
3وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ
और जब उनकी नाप या तौल कर दें तो कम कर दें
4أَلَا يَظُنُّ أُولَٰئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ
क्या ये लोग इतना भी ख्याल नहीं करते
5لِيَوْمٍ عَظِيمٍ
कि एक बड़े (सख्त) दिन (क़यामत) में उठाए जाएँगे
6يَوْمَ يَقُومُ النَّاسُ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ
जिस दिन तमाम लोग सारे जहाँन के परवरदिगार के सामने खड़े होंगे
अल-मुतफ्फिफीनकुरान सूची
36आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-मुतफ्फिफीन 4

सूरा अल-मुतफ्फिफीन आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ये लोग इतना भी ख्याल नहीं करते

सूरा आयत 4/36 — सूरा अल-मुतफ्फिफीन المطففين (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुतफ्फिफीन सुनें, सूरा अल-मुतफ्फिफीन अनुवाद, सूरा अल-मुतफ्फिफीन mp3, सूरा अल-मुतफ्फिफीन pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.





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Tuesday, September 29, 2026

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