अल-फज्र · 21/30
अनुवाद उच्चारण — अल-फज्र
كَلَّا إِذَا دُكَّتِ الْأَرْضُ دَكًّا دَكًّا ۝٢١
Kallaaa izaaa dukkatil ardu dakkan dakka
📖 हिंदी अर्थ
सुन रखो कि जब ज़मीन कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा कर दी जाएगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • دُكَّتِ: ज़मीन को ज़ोर से हिलाया जाए, कुचला जाए, चूर-चूर कर दिया जाए।
  • دَكًّا دَكًّا: बार-बार, लगातार, एक के बाद एक, इस कदर कि वह बिल्कुल समतल और चूर-चूर हो जाए।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं! जब ज़मीन को बार-बार दुक़-दुक़ करके (ज़ोर-ज़ोर से हिलाकर) चूर-चूर कर दिया जाएगा।"

यहाँ अल्लाह तआला उन लोगों को संबोधित कर रहे हैं जो दुनिया की चीज़ों से मोहब्बत करते हैं, माल-दौलत को ही सब कुछ समझते हैं, और आख़िरत को भूल गए हैं। वे सोचते हैं कि यही दुनिया है, बस यहीं सब कुछ ख़त्म हो जाएगा। अल्लाह फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" यानी तुम्हारा यह ख़याल बिल्कुल ग़लत है। तुम्हारा यह रवैया हरगिज़ सही नहीं है। यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी, और न ही तुम्हारा माल-दौलत तुम्हारे किसी काम आएगा।

फिर अल्लाह तआला उस भयानक दिन की तस्वीर पेश करते हैं जब यह विशाल और मज़बूत ज़मीन, जिस पर हम चलते-बसते हैं, जिसे हम अपना ठिकाना समझते हैं, उसे ज़ोर-ज़ोर से हिलाया जाएगा। पहाड़ रुई की तरह उड़ेंगे, इमारतें मिट्टी में मिल जाएँगी, और ज़मीन इस कदर चूर-चूर और समतल कर दी जाएगी कि उस पर कोई ऊँच-नीच नहीं रहेगी। यह क़यामत का दिन होगा, जब अल्लाह तआला अपने बंदों के बीच इंसाफ़ के साथ फ़ैसला करने के लिए आएँगे।

यह वह दिन होगा जब हर इंसान अपने किए पर पछताएगा। जिसने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी की, उसका पछतावा उस दिन किसी काम नहीं आएगा। इसलिए ऐ इंसान! इस दुनिया में रहते हुए उस दिन की तैयारी कर ले। अल्लाह की राह में ख़र्च कर, नेक काम कर, और उस दिन के लिए पुंजी जमा कर जो कभी ख़त्म नहीं होने वाली — यानी अल्लाह की रज़ा और जन्नत।

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की चीज़ों पर भरोसा करके बेख़बर न हो जाएँ। यह ज़मीन जो आज हमारे क़दमों तले है, क़यामत के दिन हमारे ही ख़िलाफ़ गवाही देगी। अल्लाह तआला हमें तौफ़ीक़ दे कि हम उस दिन की तैयारी करें, और उसकी राह में अपना माल ख़र्च करें। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अल-फज्र

19وَتَأْكُلُونَ التُّرَاثَ أَكْلًا لَّمًّا
और मीरारा के माल (हलाल व हराम) को समेट कर चख जाते हो
20وَتُحِبُّونَ الْمَالَ حُبًّا جَمًّا
और माल को बहुत ही अज़ीज़ रखते हो
21كَلَّا إِذَا دُكَّتِ الْأَرْضُ دَكًّا دَكًّا
सुन रखो कि जब ज़मीन कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा कर दी जाएगी
22وَجَاءَ رَبُّكَ وَالْمَلَكُ صَفًّا صَفًّا
और तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म और फ़रिश्ते कतार के कतार आ जाएँगे
23وَجِيءَ يَوْمَئِذٍ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍ يَتَذَكَّرُ الْإِنسَانُ وَأَنَّىٰ لَهُ الذِّكْرَىٰ
और उस दिन जहन्नुम सामने कर दी जाएगी उस दिन इन्सान चौंकेगा मगर अब चौंकना कहाँ (फ़ायदा देगा)
अल-फज्रकुरान सूची
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अनुवाद — अल-फज्र 21

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Tuesday, August 18, 2026

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