अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَخِلَ (बख़िला): कंजूसी करना, अल्लाह के मार्ग में ख़र्च न करना, जो फ़र्ज़ (अनिवार्य) और वाजिब (आवश्यक) है उसे अदा न करना।
- وَاسْتَغْنَى (वस्तग़ना): अपने आपको बेनियाज़ समझना, अल्लाह से बेपरवाह हो जाना, दुनिया की ख़्वाहिशों में मगन होकर आख़िरत को भूल जाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो अपने माल में कंजूसी करते हैं और अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते। वे सिर्फ़ अपनी दौलत को जमा करने में लगे रहते हैं और समझते हैं कि यही उनकी सफलता है। वे अल्लाह से बेनियाज़ हो जाते हैं, यानी उन्हें अल्लाह की ज़रूरत ही महसूस नहीं होती। वे दुनिया की चमक-दमक और लज़्ज़तों में इस कदर डूब जाते हैं कि आख़िरत के सुखों को भूल जाते हैं। वे सिर्फ़ अपने लिए जीते हैं, दूसरों के लिए नहीं, और अल्लाह के हुक्मों से मुँह मोड़ लेते हैं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने तकलीफ़ और मुश्किलों के रास्ते आसान कर दिए हैं, और उनका माल उनके किसी काम नहीं आएगा जब वे जहन्नुम की आग में झोंके जाएँगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बड़ा सबक़ सिखाती है कि माल और दौलत अल्लाह की दी हुई अमानत है। जो इसे अल्लाह की राह में ख़र्च करता है, वह अपने लिए आख़िरत का ख़ज़ाना जमा करता है। और जो कंजूसी करता है और अल्लाह से बेपरवाह हो जाता है, वह खुद अपने लिए तबाही का सामान करता है। अल्लाह किसी की ज़रूरत नहीं रखता, बल्कि हमें उसकी ज़रूरत है। जब हम अल्लाह की राह में ख़र्च करते हैं, तो हम अपनी ही भलाई करते हैं। इसलिए हमें कंजूसी से बचना चाहिए और अल्लाह की राह में ख़ुशी-ख़ुशी ख़र्च करना चाहिए, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 6-10 — अल-लैल
अनुवाद — अल-लैल 8
सूरा अल-लैल आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिसने बुख्ल किया, और बेपरवाई कीसूरा आयत 8/21 — अल-लैल الليل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-लैल सुनें, अल-लैल अनुवाद, अल-लैल mp3, अल-लैल pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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