अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَقُولُ – कहेगा
- الْإِنسَانُ – इंसान (यहाँ काफ़िर इंसान मुराद है)
- يَوْمَئِذٍ – उस दिन (यानी क़ियामत के दिन)
- أَيْنَ الْمَفَرُّ – कहाँ है भागने की जगह? (कहाँ है पनाह?)
तफ़सीर:
जब क़ियामत का दिन आएगा और उसके भयानक मंज़र सामने आएँगे, तो इंसान की आँखें हैरानी और खौफ़ से चकरा जाएँगी। चाँद की रोशनी जाती रहेगी, सूरज और चाँद दोनों की रोशनी एक साथ खत्म हो जाएगी, और हर तरफ़ अंधेरा छा जाएगा। उस वक़्त इंसान, ख़ासकर वह जो दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करता रहा, घबराकर चीख़ उठेगा: "कहाँ है भागने की जगह? कहाँ है पनाह?"
लेकिन उस दिन भागने की कोई जगह नहीं होगी। न कोई पहाड़ की ओट, न कोई छिपने की जगह, न कोई मददगार। अल्लाह तआला की पकड़ से बचने का कोई रास्ता नहीं होगा। यह वह दिन होगा जब हर इंसान अपने किए पर पछताएगा, लेकिन पछताने का वक़्त गुज़र चुका होगा।
यह आयत हमें चेतावनी देती है कि आज जो लोग अल्लाह के अज़ाब से बेख़बर हैं और गुनाहों में मगन हैं, वे उस दिन समझ जाएँगे कि उनकी सारी ताक़त और दौलत किसी काम नहीं आएगी। इसलिए ऐ इंसान! अभी से अपने रब की तरफ़ रुजू कर, उसकी रहमत का सहारा ले, और उसके अज़ाब से डरकर नेक अमल कर। क्योंकि आज तो भागने की जगह नहीं, लेकिन आज तौबा का दरवाज़ा खुला है — अल्लाह की रहमत से पहले ही वापस आ जा, क्योंकि कल (क़ियामत के दिन) कोई पनाह नहीं मिलेगी। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान है, वह चाहता है कि बंदा उसकी तरफ़ लौट आए और उसकी रहमत की पनाह में आ जाए।
📜 आयत 8-12 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 10
सूरा अल-क़ियामा आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो इन्सान कहेगा आज कहाँ भाग कर जाऊँसूरा आयत 10/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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