अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَجَعَلَ: फिर बनाया।
- الزَّوْجَيْنِ: दो प्रकार, दो क़िस्में।
- الذَّكَرَ وَالْأُنثَى: नर और मादा।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने उसी नुत्फ़े (वीर्य) से इंसान की दो क़िस्में बनाईं — नर (पुरुष) और मादा (स्त्री)। यानी जिस तरह अल्लाह ने उस कमज़ोर बूँद से इंसान को पैदा किया, उसी तरह उसी मूल से उसने दो जिन्स (प्रकार) बनाए, ताकि इंसान की नस्ल चले और ज़िंदगी का सिलसिला क़ायम रहे। यह अल्लाह की क़ुदरत की एक अज़ीम निशानी है कि एक ही माद्दे (पदार्थ) से दो अलग-अलग क़िस्में बनती हैं, जिनमें से हर एक की अपनी अलग ख़ुसूसियतें और किरदार हैं।
यह आयत उन लोगों को सबक़ सिखाती है जो आख़िरत और दोबारा जी उठने का इन्कार करते हैं। जब अल्लाह ने एक बूँद से इंसान को पैदा करके उसे अच्छी सूरत दी और उससे दो क़िस्में बनाईं, तो क्या वह उसी इंसान को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है। यह भी ग़ौरतलब है कि अल्लाह ने नर और मादा दोनों को एक ही जड़ से बनाया, ताकि इंसान समझे कि सब इंसान एक ही मूल से हैं और किसी को किसी पर फ़ख़्र (घमंड) नहीं करना चाहिए। यह अल्लाह की रहमत और हिकमत का नमूना है कि उसने इंसान को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसका जोड़ा बनाया, ताकि उसे सुकून मिले और वह अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारे।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपनी पैदाइश पर ग़ौर करें और अल्लाह की क़ुदरत को पहचानें। जिस अल्लाह ने हमें इस तरह बनाया, वह हमें दोबारा ज़िंदा करके हमारे आमाल का हिसाब लेने पर ज़रूर क़ादिर है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करनी चाहिए और उसकी रहमत के तलबगार रहना चाहिए। यह ईमान की बुनियाद है कि हम अल्लाह की क़ुदरत पर यक़ीन रखें और आख़िरत के दिन को अपने सामने रखकर नेक अमल करें। अल्लाह हमें समझने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 37-40 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 39
सूरा अल-क़ियामा आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर उसे दुरूस्त किया फिर उसकी दो किस्में बनायीं (एक)…सूरा आयत 39/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 37–40. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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