अल-क़ियामा · 33/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ियामा
ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰ أَهْلِهِ يَتَمَطَّىٰ ۝٣٣
Summa zahaba ilaaa ahlihee yatamatta
📖 हिंदी अर्थ
अपने घर की तरफ इतराता हुआ चला

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَتَمَطَّى: अर्थात अकड़कर, इतराते हुए, घमंड से चलना। इसका मूल शब्द "تَمَطَّطَ" है, जिसका अर्थ है तनकर चलना या अकड़ दिखाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में उस काफ़िर (इनकार करने वाले) व्यक्ति का हाल बयान किया गया है जो सत्य को ठुकरा चुका है। वह न तो अल्लाह के रसूल (ﷺ) पर ईमान लाया, न ही उसने अल्लाह की फ़र्ज़ (अनिवार्य) नमाज़ें अदा कीं। उसने क़ुरआन को झुठलाया और ईमान से मुँह मोड़ लिया। फिर वह अपने घरवालों के पास इस हाल में गया कि वह अकड़कर, इतराते हुए, घमंड और गर्व के साथ चल रहा था। उसकी चाल-ढाल से उसका अहंकार और अभिमान झलक रहा था, जैसे वह अपने आपको किसी बड़ी चीज़ पर क़ाबिल समझता हो।

यह आयत उस व्यक्ति के चरित्र का एक और पहलू उजागर करती है जो हक़ (सत्य) से मुँह मोड़ लेता है। ऐसा व्यक्ति न केवल अल्लाह की इबादत से दूर होता है, बल्कि उसका अहंकार उसे और अधिक गुमराही में डाल देता है। वह अपने घरवालों के सामने भी घमंड से चलता है, जिससे पता चलता है कि उसका दिल सच्चाई से कितना खाली है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि घमंड और अकड़ इंसान को अल्लाह की राह से भटका देते हैं। एक मुसलमान को चाहिए कि वह हमेशा नम्रता और विनम्रता अपनाए, क्योंकि अल्लाह उन्हीं को पसंद करता है जो अपने आपको छोटा समझें और उसके आगे सर झुकाएँ। जो व्यक्ति घमंड करता है, वह दरअसल अपने आपको अल्लाह से बड़ा समझने लगता है, और यही उसकी बर्बादी का कारण बनता है। आइए हम अपने चाल-चलन और अंदाज़ को अल्लाह के रसूल (ﷺ) की सुन्नत के अनुसार बनाएँ, जो हमेशा नम्रता और सादगी पसंद करते थे। याद रखें, अल्लाह के पास सबसे प्यारा वह बंदा है जो अपने आपको छोटा समझे और अपने रब के सामने झुका रहे।



📜 आयत 31-35 — सूरा अल-क़ियामा

31فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ
तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी
32وَلَٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
मगर झुठलाया और (ईमान से) मुँह फेरा
33ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰ أَهْلِهِ يَتَمَطَّىٰ
अपने घर की तरफ इतराता हुआ चला
34أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ
अफसोस है तुझ पर फिर अफसोस है फिर तुफ़ है
35ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ
तुझ पर फिर तुफ़ है
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33आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 33

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Monday, September 28, 2026

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