अल-क़ियामा · 3/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُ ۝٣
Ayahsabul insaanu al lan najm`a `izaamah
📖 हिंदी अर्थ
क्या इन्सान ये ख्याल करता है (कि हम उसकी हड्डियों को बोसीदा होने के बाद) जमा न करेंगे हाँ (ज़रूर करेंगें)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अयहसबु: क्या वह समझता है?
  • अल्लन नज्मअ: कि हम कभी एकत्र नहीं करेंगे
  • अज़ामाहु: उसकी हड्डियाँ

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में उस इंसान की बात का खंडन किया है जो पुनरुत्थान (आख़िरत) को झुठलाता है और यह सोचता है कि मरने के बाद दोबारा जीवित होना असंभव है। अल्लाह फ़रमाता है: क्या यह इंसान यह समझता है कि हम उसकी हड्डियों को कभी एकत्र नहीं कर सकेंगे? यानी क्या उसे यक़ीन है कि मौत के बाद उसका शरीर मिट्टी में मिल जाने के बाद हम उसे दोबारा नहीं उठा सकते?

यह एक ऐसा सवाल है जो उस इंसान की नादानी और अक़्ल की कमी को ज़ाहिर करता है। जिस अल्लाह ने उसे पहली बार पैदा किया, क्या वह उसे दोबारा पैदा नहीं कर सकता? जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया, क्या वह इंसान की हड्डियों को जमा करने पर क़ादिर नहीं?

अल्लाह तआला ने इसका जवाब आगे की आयतों में दिया है कि हम उसकी हड्डियों को जमा करने पर पूरी तरह क़ादिर हैं, बल्कि हम उसकी उँगलियों के सिरों (पोरों) तक को दुरुस्त कर सकते हैं। यानी हम उसे पहले जैसा बना देंगे, बल्कि उससे भी बेहतर।

इस आयत में इंसान को यह सोचने की दावत दी गई है कि जिस अल्लाह ने उसे पहली बार पैदा किया, उसके लिए दोबारा पैदा करना क्यों मुश्किल होगा? क्या वह इंसान अपनी पैदाइश को भूल गया? क्या वह नहीं जानता कि वह एक बूँद (नुत्फ़ा) से बना था?

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि मौत के बाद का जीवन सच है, और हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा। जो लोग इस पर शक करते हैं, वह सिर्फ़ अपनी नादानी की वजह से ऐसा करते हैं। अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अपने रब की क़ुदरत पर भरोसा रखें और यक़ीन रखें कि एक दिन हम सब उसके सामने हाज़िर होंगे। यह यक़ीन हमें अच्छे काम करने और बुरे कामों से बचने की ताक़त देता है। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अल-क़ियामा

1لَا أُقْسِمُ بِيَوْمِ الْقِيَامَةِ
मैं रोजे क़यामत की क़सम खाता हूँ
2وَلَا أُقْسِمُ بِالنَّفْسِ اللَّوَّامَةِ
(और बुराई से) मलामत करने वाले जी की क़सम खाता हूँ (कि तुम सब दोबारा) ज़रूर ज़िन्दा किए जाओगे
3أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُ
क्या इन्सान ये ख्याल करता है (कि हम उसकी हड्डियों को बोसीदा होने के बाद) जमा न करेंगे हाँ (ज़रूर करेंगें)
4بَلَىٰ قَادِرِينَ عَلَىٰ أَن نُّسَوِّيَ بَنَانَهُ
हम इस पर क़ादिर हैं कि हम उसकी पोर पोर दुरूस्त करें
5بَلْ يُرِيدُ الْإِنسَانُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُ
मगर इन्सान तो ये जानता है कि अपने आगे भी (हमेशा) बुराई करता जाए
अल-क़ियामाकुरान सूची
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अनुवाद — अल-क़ियामा 3

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Tuesday, August 18, 2026

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