أَوْلِيَاءَ اللهِ: अल्लाह के मित्र, जो अल्लाह की आज्ञा का पालन करते हैं और उसकी इबादत में लगे रहते हैं।
لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ: उन्हें किसी बात का भय नहीं होगा।
وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ: और न ही वे किसी बात पर शोक करेंगे।
तफ़सीर:
सुनो! अल्लाह के जो मित्र (औलिया) हैं, उनके लिए न तो कोई भय है और न ही कोई ग़म। यह घोषणा अल्लाह की ओर से उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी निष्ठा, आज्ञाकारिता और इबादत के माध्यम से अल्लाह से प्रेम का रिश्ता जोड़ा है। उन्हें आने वाले क़ियामत के भयानक दृश्यों, हिसाब की सख़्ती और अज़ाब का कोई डर नहीं होगा, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें अपनी सुरक्षा में ले लिया है। साथ ही, वे दुनिया में जो कुछ भी खो चुके हैं—धन, पद, सुख-सुविधाएँ या कोई प्रिय वस्तु—उस पर वे शोक नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें यह यक़ीन है कि अल्लाह के पास जो कुछ है वही सबसे उत्तम और स्थायी है। उनका दिल अल्लाह की रज़ा पर संतुष्ट और उसकी मेहरबानी की ओर देखता है, इसलिए उनके लिए न तो भूतकाल का अफ़सोस है और न भविष्य का भय।
फ़ायदे:
अल्लाह के निकट होने का सबसे बड़ा इनाम यह है कि इंसान को भय और ग़म से मुक्ति मिलती है—यह दुनिया और आख़िरत दोनों की सबसे बड़ी नेमत है।
यह आयत मोमिनों को हौसला देती है कि वे दुनिया की चिंताओं और परेशानियों में घबराएँ नहीं, क्योंकि उनका असली सहारा अल्लाह है।
अल्लाह की मुहब्बत और उसकी इबादत ही वह रास्ता है जो इंसान को हर तरह के डर और उदासी से बचाता है।
यह आयत यह भी सिखाती है कि सच्चे बंदे वे हैं जो अल्लाह से वफ़ादारी निभाते हैं, और अल्लाह भी उन्हें अपनी ख़ास रहमत और हिफ़ाज़त से नवाज़ता है।
इससे मुसलमानों को यह पैग़ाम मिलता है कि वे अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की रज़ा को पहली तरजीह दें, तो अल्लाह उन्हें ऐसा सुकून देगा जो किसी दौलत से नहीं मिल सकता।
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधा करते हैं रोजे क़यामत का क्या ख्याल करते हैं उसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं
(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मशग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौशन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।