यूनुस · 62/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
أَلَا إِنَّ أَوْلِيَاءَ اللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ ۝٦٢
Alaa innaa awliyaaa`al laahi laa khawfun `alaihim wa laa hum yahzanoon
📖 हिंदी अर्थ
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजुर्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَوْلِيَاءَ اللهِ: अल्लाह के मित्र, जो अल्लाह की आज्ञा का पालन करते हैं और उसकी इबादत में लगे रहते हैं।
  • لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ: उन्हें किसी बात का भय नहीं होगा।
  • وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ: और न ही वे किसी बात पर शोक करेंगे।

तफ़सीर:

सुनो! अल्लाह के जो मित्र (औलिया) हैं, उनके लिए न तो कोई भय है और न ही कोई ग़म। यह घोषणा अल्लाह की ओर से उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी निष्ठा, आज्ञाकारिता और इबादत के माध्यम से अल्लाह से प्रेम का रिश्ता जोड़ा है। उन्हें आने वाले क़ियामत के भयानक दृश्यों, हिसाब की सख़्ती और अज़ाब का कोई डर नहीं होगा, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें अपनी सुरक्षा में ले लिया है। साथ ही, वे दुनिया में जो कुछ भी खो चुके हैं—धन, पद, सुख-सुविधाएँ या कोई प्रिय वस्तु—उस पर वे शोक नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें यह यक़ीन है कि अल्लाह के पास जो कुछ है वही सबसे उत्तम और स्थायी है। उनका दिल अल्लाह की रज़ा पर संतुष्ट और उसकी मेहरबानी की ओर देखता है, इसलिए उनके लिए न तो भूतकाल का अफ़सोस है और न भविष्य का भय।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह के निकट होने का सबसे बड़ा इनाम यह है कि इंसान को भय और ग़म से मुक्ति मिलती है—यह दुनिया और आख़िरत दोनों की सबसे बड़ी नेमत है।
  2. यह आयत मोमिनों को हौसला देती है कि वे दुनिया की चिंताओं और परेशानियों में घबराएँ नहीं, क्योंकि उनका असली सहारा अल्लाह है।
  3. अल्लाह की मुहब्बत और उसकी इबादत ही वह रास्ता है जो इंसान को हर तरह के डर और उदासी से बचाता है।
  4. यह आयत यह भी सिखाती है कि सच्चे बंदे वे हैं जो अल्लाह से वफ़ादारी निभाते हैं, और अल्लाह भी उन्हें अपनी ख़ास रहमत और हिफ़ाज़त से नवाज़ता है।
  5. इससे मुसलमानों को यह पैग़ाम मिलता है कि वे अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की रज़ा को पहली तरजीह दें, तो अल्लाह उन्हें ऐसा सुकून देगा जो किसी दौलत से नहीं मिल सकता।


📜 आयत 60-64 — यूनुस

60وَمَا ظَنُّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَشْكُرُونَ
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधा करते हैं रोजे क़यामत का क्या ख्याल करते हैं उसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं
61وَمَا تَكُونُ فِي شَأْنٍ وَمَا تَتْلُو مِنْهُ مِن قُرْآنٍ وَلَا تَعْمَلُونَ مِنْ عَمَلٍ إِلَّا كُنَّا عَلَيْكُمْ شُهُودًا إِذْ تُفِيضُونَ فِيهِ ۚ وَمَا يَعْزُبُ عَن رَّبِّكَ مِن مِّثْقَالِ ذَرَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَلَا أَصْغَرَ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْبَرَ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मशग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौशन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है
62أَلَا إِنَّ أَوْلِيَاءَ اللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजुर्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे
63الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़ुदा से) डरते थे
64لَهُمُ الْبُشْرَىٰ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۚ لَا تَبْدِيلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की ज़िन्दगी में भी और आख़िरत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है
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अनुवाद — यूनुस 62

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Tuesday, August 18, 2026

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