यूनुस · 63/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ ۝٦٣
Allazeena aamanoo wa kaanoo yattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़ुदा से) डरते थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर पूर्ण विश्वास किया।
  • يَتَّقُونَ: अल्लाह का डर रखते हुए उसके आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से बचना।

व्याख्या:

यह आयत अल्लाह के निकटवर्ती बंदों (औलिया) की पहचान बताती है। वे वे लोग हैं जो अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर सच्चा ईमान रखते हैं, और उनका ईमान केवल ज़ुबानी नहीं होता बल्कि दिल से होता है। साथ ही, वे तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाते हैं—यानी अल्लाह के हुक्मों को पूरा करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं। उनका जीवन अल्लाह की रज़ा की तलाश में गुज़रता है, और वे हर काम में अल्लाह की नाराज़गी से बचने की कोशिश करते हैं। यही वे लोग हैं जिन पर अल्लाह की विशेष रहमत और मुहब्बत होती है, और जिनके लिए आगे की आयत में खुशखबरी दी गई है कि उनके लिए न कोई डर है और न ही कोई ग़म।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की नज़दीकी पाने का सबसे बड़ा ज़रिया ईमान और तक़वा है—यही वास्तविक कामयाबी है।
  2. सच्चा ईमान सिर्फ़ दिल का विश्वास नहीं, बल्कि अमल में भी ज़ाहिर होना चाहिए, और तक़वा ही उसका सबूत है।
  3. यह आयत मुसलमानों को हौसला देती है कि अगर वे ईमान और तक़वा पर क़ायम रहें, तो अल्लाह उन्हें अपने दोस्तों में शामिल कर लेता है, और फिर दुनिया और आख़िरत में उन्हें कोई डर या ग़म नहीं होता।
  4. यह बताती है कि अल्लाह की मुहब्बत और उसकी याद में जीने वाले लोग ही असली सुकून और इत्मिनान पाते हैं, चाहे दुनिया में उनकी हालत कैसी भी हो।
🎧 सुनें

📜 आयत 61-65 — यूनुस

61وَمَا تَكُونُ فِي شَأْنٍ وَمَا تَتْلُو مِنْهُ مِن قُرْآنٍ وَلَا تَعْمَلُونَ مِنْ عَمَلٍ إِلَّا كُنَّا عَلَيْكُمْ شُهُودًا إِذْ تُفِيضُونَ فِيهِ ۚ وَمَا يَعْزُبُ عَن رَّبِّكَ مِن مِّثْقَالِ ذَرَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَلَا أَصْغَرَ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْبَرَ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मशग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौशन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है
62أَلَا إِنَّ أَوْلِيَاءَ اللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजुर्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे
63الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़ुदा से) डरते थे
64لَهُمُ الْبُشْرَىٰ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۚ لَا تَبْدِيلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की ज़िन्दगी में भी और आख़िरत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है
65وَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا ۚ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और (ऐ रसूल) उन (कुफ्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक़ नहीं कि सारी इज्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है
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अनुवाद — यूनुस 63

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Tuesday, August 18, 2026

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