अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِتَلْفِتَنَا: हमें मोड़ने के लिए, हमें बहकाने के लिए, हमें हटाने के लिए।
- عَمَّا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا: उस चीज़ से जिस पर हमने अपने बाप-दादाओं को पाया (यानी उनके धर्म और रीति-रिवाज़)।
- الْكِبْرِيَاءُ: बड़ाई, सत्ता, राज्य, बादशाहत।
- بِمُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले, मानने वाले, सच मानने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सामने अल्लाह का पैग़ाम पेश किया और उन्हें एक अल्लाह की इबादत की दावत दी, तो फ़िरऔन और उसके सरदारों ने घमंड और अकड़ के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "ऐ मूसा! क्या तू इसलिए आया है कि हमें उस रास्ते से हटा दे जिस पर हमने अपने बाप-दादाओं को पाया है? हमारे बुज़ुर्ग जिस तरह से जीते थे, जिस धर्म और रस्मों को मानते थे, क्या तू हमें उससे दूर करना चाहता है? और क्या तू चाहता है कि इस ज़मीन (मिस्र) में तुझे और तेरे भाई (हारून) को बड़ाई और हुकूमत मिल जाए? हम तो तुम दोनों की बात कभी नहीं मानेंगे, और न ही हम तुम्हें अल्लाह का भेजा हुआ पैग़म्बर मानेंगे!"
यह जवाब उस अंधी परंपरा और जिद्दो-मुहालत को दर्शाता है जो हक़ की दावत को क़बूल करने से रोकती है। उन्होंने सच्चाई को समझने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपने बाप-दादाओं के रास्ते को ही सच्चा और आख़िरी मान लिया। उन्हें डर था कि अगर उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) की बात मान ली, तो उनकी सत्ता और रुतबा ख़त्म हो जाएगा। उनका यह रवैया आज भी उन लोगों जैसा है जो हक़ को क़बूल करने के बजाय अपनी रस्मों और रिवाजों को पकड़े रहते हैं, भले ही वे ग़लत हों।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ की दावत को क़बूल करने में सबसे बड़ी रुकावट अक्सर अंधी परंपरा, बड़ों की नक़ल और सत्ता का लालच होता है। लेकिन एक सच्चा मुसलमान वही है जो सच्चाई को देखते ही उसे क़बूल कर ले, चाहे वह उसके बाप-दादाओं के रास्ते से अलग ही क्यों न हो। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है ताकि हम सोचें और सही रास्ता चुनें। जो लोग सिर्फ़ इसलिए हक़ नहीं मानते क्योंकि उनके बुज़ुर्ग उस पर नहीं थे, वही लोग नुक़सान में रहते हैं। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में अपनी ज़िंदगी को ढालें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है। अल्लाह हमें सच्चाई को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 76-80 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 78
सूरा यूनुस आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) क्यों तुम हमारे…सूरा आयत 78/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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