यूनुस · 78/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَلْفِتَنَا عَمَّا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا وَتَكُونَ لَكُمَا الْكِبْرِيَاءُ فِي الْأَرْضِ وَمَا نَحْنُ لَكُمَا بِمُؤْمِنِينَ ۝٧٨
Qaaloo aji`tanaa litalfitanaa `ammaa wajadnaa `alaihi aabaaa`anaa wa takoona lakumal kibriyaaa`u fil ardi wa maa nahnu lakumaa bimu` mineen
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) क्यों तुम हमारे पास उस वास्ते आए हो कि जिस दीन पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया उससे तुम हमे बहका दो और सारी ज़मीन में ही दोनों की बढ़ाई हो और ये लोग तुम दोनों पर ईमान लाने वाले नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِتَلْفِتَنَا: हमें मोड़ने के लिए, हमें बहकाने के लिए, हमें हटाने के लिए।
  • عَمَّا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا: उस चीज़ से जिस पर हमने अपने बाप-दादाओं को पाया (यानी उनके धर्म और रीति-रिवाज़)।
  • الْكِبْرِيَاءُ: बड़ाई, सत्ता, राज्य, बादशाहत।
  • بِمُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले, मानने वाले, सच मानने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सामने अल्लाह का पैग़ाम पेश किया और उन्हें एक अल्लाह की इबादत की दावत दी, तो फ़िरऔन और उसके सरदारों ने घमंड और अकड़ के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "ऐ मूसा! क्या तू इसलिए आया है कि हमें उस रास्ते से हटा दे जिस पर हमने अपने बाप-दादाओं को पाया है? हमारे बुज़ुर्ग जिस तरह से जीते थे, जिस धर्म और रस्मों को मानते थे, क्या तू हमें उससे दूर करना चाहता है? और क्या तू चाहता है कि इस ज़मीन (मिस्र) में तुझे और तेरे भाई (हारून) को बड़ाई और हुकूमत मिल जाए? हम तो तुम दोनों की बात कभी नहीं मानेंगे, और न ही हम तुम्हें अल्लाह का भेजा हुआ पैग़म्बर मानेंगे!"

यह जवाब उस अंधी परंपरा और जिद्दो-मुहालत को दर्शाता है जो हक़ की दावत को क़बूल करने से रोकती है। उन्होंने सच्चाई को समझने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपने बाप-दादाओं के रास्ते को ही सच्चा और आख़िरी मान लिया। उन्हें डर था कि अगर उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) की बात मान ली, तो उनकी सत्ता और रुतबा ख़त्म हो जाएगा। उनका यह रवैया आज भी उन लोगों जैसा है जो हक़ को क़बूल करने के बजाय अपनी रस्मों और रिवाजों को पकड़े रहते हैं, भले ही वे ग़लत हों।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ की दावत को क़बूल करने में सबसे बड़ी रुकावट अक्सर अंधी परंपरा, बड़ों की नक़ल और सत्ता का लालच होता है। लेकिन एक सच्चा मुसलमान वही है जो सच्चाई को देखते ही उसे क़बूल कर ले, चाहे वह उसके बाप-दादाओं के रास्ते से अलग ही क्यों न हो। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है ताकि हम सोचें और सही रास्ता चुनें। जो लोग सिर्फ़ इसलिए हक़ नहीं मानते क्योंकि उनके बुज़ुर्ग उस पर नहीं थे, वही लोग नुक़सान में रहते हैं। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में अपनी ज़िंदगी को ढालें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है। अल्लाह हमें सच्चाई को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 76-80 — यूनुस

76فَلَمَّا جَاءَهُمُ الْحَقُّ مِنْ عِندِنَا قَالُوا إِنَّ هَٰذَا لَسِحْرٌ مُّبِينٌ
फिर जब उनके पास हमारी तरफ से हक़ बात (मौजिज़े) पहुँच गए तो कहने लगे कि ये तो यक़ीनी खुल्लम खुल्ला जादू है
77قَالَ مُوسَىٰ أَتَقُولُونَ لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَكُمْ ۖ أَسِحْرٌ هَٰذَا وَلَا يُفْلِحُ السَّاحِرُونَ
मूसा ने कहा क्या जब (दीन) तुम्हारे पास आया तो उसके बारे में कहते हो कि क्या ये जादू है और जादूगर लोग कभी कामयाब न होगें
78قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَلْفِتَنَا عَمَّا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا وَتَكُونَ لَكُمَا الْكِبْرِيَاءُ فِي الْأَرْضِ وَمَا نَحْنُ لَكُمَا بِمُؤْمِنِينَ
वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) क्यों तुम हमारे पास उस वास्ते आए हो कि जिस दीन पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया उससे तुम हमे बहका दो और सारी ज़मीन में ही दोनों की बढ़ाई हो और ये लोग तुम दोनों पर ईमान लाने वाले नहीं
79وَقَالَ فِرْعَوْنُ ائْتُونِي بِكُلِّ سَاحِرٍ عَلِيمٍ
और फिरऔन ने हुक्म दिया कि हमारे हुज़ूर में तमाम खिलाड़ी (वाक़िफकार) जादूगर को तो ले आओ
80فَلَمَّا جَاءَ السَّحَرَةُ قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ أَلْقُوا مَا أَنتُم مُّلْقُونَ
फिर जब जादूगर लोग (मैदान में) आ मौजूद हुए तो मूसा ने उनसे कहा कि तुमको जो कुछ फेंकना हो फेंको
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अनुवाद — यूनुस 78

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Tuesday, August 18, 2026

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