अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَحُضُّ: उकसाना, प्रोत्साहित करना, तरगीब देना।
- طَعَامِ الْمِسْكِينِ: मिस्कीन (ज़रूरतमंद) को खाना खिलाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में उस इंसान की मज़म्मत (निंदा) की गई है जो दीन को झुठलाता है और यतीम पर सख्ती करता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसा शख्स न तो खुद मिस्कीन को खाना खिलाता है और न ही दूसरों को इस पर उकसाता है। यानी उसका दिल इतना सख्त और संकीर्ण है कि उसमें न तो खुद ग़रीबों की मदद करने का जज़्बा है और न ही वह दूसरों को इस नेक काम की तरगीब देता है। यह उसके दीन के झुठलाने का नतीजा है, क्योंकि जो शख्स अल्लाह के दीन और आख़िरत पर ईमान नहीं रखता, उसके अंदर इंसानियत के जज़्बात भी मर जाते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान का तक़ाज़ा है कि इंसान न सिर्फ खुद दूसरों की मदद करे, बल्कि दूसरों को भी नेकी की तरफ बुलाए। इस्लाम में सिर्फ अपनी नजात (निजात) काफी नहीं, बल्कि दूसरों को भी भलाई की राह दिखाना हमारा फर्ज है। जो शख्स दूसरों को खैर की तरफ नहीं बुलाता, वह अपने ईमान के तक़ाज़े को पूरा नहीं करता।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि क्या हम सिर्फ अपनी ज़ात (व्यक्तिगत) की इबादत में मशगूल रहकर दूसरों के हक़ को भूल गए हैं? क्या हम अपने पड़ोसी, रिश्तेदार या किसी ज़रूरतमंद की मदद करते हैं? क्या हम अपने बच्चों और घरवालों को ग़रीबों की मदद करने की तालीम देते हैं? याद रखिए! अल्लाह तआला उस शख्स से मुहब्बत करता है जो दूसरों के काम आता है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: "जो शख्स किसी मुसलमान की दुनियावी मुश्किल दूर करेगा, अल्लाह उसकी आख़िरत की मुश्किल दूर करेगा।"
आओ हम अपने अंदर यह जज़्बा पैदा करें कि हम खुद भी मिस्कीनों की मदद करें और दूसरों को भी इस नेक काम की तरगीब दें। यही सच्चे ईमान की निशानी है और यही रास्ता हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुंचाएगा।
📜 आयत 1-5 — अल-माऊन
अनुवाद — अल-माऊन 3
सूरा अल-माऊन आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मोहताजों को खिलाने के लिए (लोगों को) आमादा नहीं…सूरा आयत 3/7 — अल-माऊन الماعون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माऊन सुनें, अल-माऊन अनुवाद, अल-माऊन mp3, अल-माऊन pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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