अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- कील: नापकर अनाज देना, यहाँ अर्थ है अनाज का वह हिस्सा जो मापकर दिया जाता था।
- तक़रबून: मेरे पास आना, मेरी बस्ती या देश में प्रवेश करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों से कहा कि यदि तुम मेरे पास अपने उस छोटे भाई (बिन्यामीन) को लेकर नहीं आओगे, जिसका ज़िक्र तुमने किया है, तो मेरे पास तुम्हारे लिए कोई अनाज नहीं है जो मैं तुम्हें मापकर दूँ। और न ही तुम मेरे पास आ सकोगे, अर्थात् तुम्हें मेरे देश में आने की इजाज़त नहीं होगी। यह एक कड़ी चेतावनी और परीक्षा थी, ताकि वे अपने भाई को लाने पर मजबूर हों। इसका उद्देश्य यह भी था कि उनके दिलों में सच्चाई और वादे की पाबंदी का जज़्बा पैदा हो, और वे अपने पिता से बिन्यामीन को लेकर आने की इजाज़त लें।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि वादे और शर्तों को पूरा करना बहुत ज़रूरी है। हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपनी शर्त साफ़ तौर पर बयान कर दी, और यह भी बता दिया कि शर्त पूरी न होने पर नतीजा क्या होगा।
- यहाँ से यह भी पता चलता है कि इंसान को अपने काम में दृढ़ता और हिकमत (समझदारी) से काम लेना चाहिए, और दूसरों को सही रास्ते पर लाने के लिए कभी-कभी सख्ती भी ज़रूरी होती है।
- इस आयत में झूठ और धोखे की मज़म्मत (निंदा) भी है, क्योंकि हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि अगर तुम सच्चे नहीं हो, तो तुम्हारा झूठ खुल जाएगा और तुम्हें सज़ा मिलेगी।
- यह भी सीख मिलती है कि मुसीबत और ज़रूरत के वक़्त इंसान को अपने रिश्तेदारों और भाई-बहनों का ख़याल रखना चाहिए और उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, जैसा कि भाइयों को बिन्यामीन को लाने की ज़रूरत पड़ी।
- आख़िर में, यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला हर मुश्किल में राह निकालता है, और सब्र और भरोसे के साथ काम करने वालों के लिए बेहतरीन अंजाम होता है।
📜 आयत 58-62 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 60
सूरा यूसुफ आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस अगर तुम उसको मेरे पास न लाओगे तो तुम्हारे…सूरा आयत 60/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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