यूसुफ · 60/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
فَإِن لَّمْ تَأْتُونِي بِهِ فَلَا كَيْلَ لَكُمْ عِندِي وَلَا تَقْرَبُونِ ۝٦٠
Fa il lam taatoonee bihee falaa kaila lakum `indee wa laa taqraboon
📖 हिंदी अर्थ
पस अगर तुम उसको मेरे पास न लाओगे तो तुम्हारे लिए न मेरे पास कुछ न कुछ (ग़ल्ला वग़ैरह) होगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कील: नापकर अनाज देना, यहाँ अर्थ है अनाज का वह हिस्सा जो मापकर दिया जाता था।
  • तक़रबून: मेरे पास आना, मेरी बस्ती या देश में प्रवेश करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों से कहा कि यदि तुम मेरे पास अपने उस छोटे भाई (बिन्यामीन) को लेकर नहीं आओगे, जिसका ज़िक्र तुमने किया है, तो मेरे पास तुम्हारे लिए कोई अनाज नहीं है जो मैं तुम्हें मापकर दूँ। और न ही तुम मेरे पास आ सकोगे, अर्थात् तुम्हें मेरे देश में आने की इजाज़त नहीं होगी। यह एक कड़ी चेतावनी और परीक्षा थी, ताकि वे अपने भाई को लाने पर मजबूर हों। इसका उद्देश्य यह भी था कि उनके दिलों में सच्चाई और वादे की पाबंदी का जज़्बा पैदा हो, और वे अपने पिता से बिन्यामीन को लेकर आने की इजाज़त लें।

फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि वादे और शर्तों को पूरा करना बहुत ज़रूरी है। हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपनी शर्त साफ़ तौर पर बयान कर दी, और यह भी बता दिया कि शर्त पूरी न होने पर नतीजा क्या होगा।
  2. यहाँ से यह भी पता चलता है कि इंसान को अपने काम में दृढ़ता और हिकमत (समझदारी) से काम लेना चाहिए, और दूसरों को सही रास्ते पर लाने के लिए कभी-कभी सख्ती भी ज़रूरी होती है।
  3. इस आयत में झूठ और धोखे की मज़म्मत (निंदा) भी है, क्योंकि हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि अगर तुम सच्चे नहीं हो, तो तुम्हारा झूठ खुल जाएगा और तुम्हें सज़ा मिलेगी।
  4. यह भी सीख मिलती है कि मुसीबत और ज़रूरत के वक़्त इंसान को अपने रिश्तेदारों और भाई-बहनों का ख़याल रखना चाहिए और उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, जैसा कि भाइयों को बिन्यामीन को लाने की ज़रूरत पड़ी।
  5. आख़िर में, यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला हर मुश्किल में राह निकालता है, और सब्र और भरोसे के साथ काम करने वालों के लिए बेहतरीन अंजाम होता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 58-62 — यूसुफ

58وَجَاءَ إِخْوَةُ يُوسُفَ فَدَخَلُوا عَلَيْهِ فَعَرَفَهُمْ وَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ
(और चूंकि कनआन में भी कहत (सूखा) था इस वजह से) यूसुफ के (सौतेले भाई ग़ल्ला ख़रीदने को मिस्र में) आए और यूसुफ के पास गए तो उनको फौरन ही पहचान लिया और वह लोग उनको न पहचान सके
59وَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمْ قَالَ ائْتُونِي بِأَخٍ لَّكُم مِّنْ أَبِيكُمْ ۚ أَلَا تَرَوْنَ أَنِّي أُوفِي الْكَيْلَ وَأَنَا خَيْرُ الْمُنزِلِينَ
और जब यूसुफ ने उनके (ग़ल्ले का) सामान दुरूस्त कर दिया और वह जाने लगे तो यूसुफ़ ने (उनसे कहा) कि (अबकी आना तो) अपने सौतेले भाई को (जिसे घर छोड़ आए हो) मेरे पास लेते आना क्या तुम नहीं देखते कि मै यक़ीनन नाप भी पूरी देता हूं और बहुत अच्छा मेहमान नवाज़ भी हूँ
60فَإِن لَّمْ تَأْتُونِي بِهِ فَلَا كَيْلَ لَكُمْ عِندِي وَلَا تَقْرَبُونِ
पस अगर तुम उसको मेरे पास न लाओगे तो तुम्हारे लिए न मेरे पास कुछ न कुछ (ग़ल्ला वग़ैरह) होगा
61قَالُوا سَنُرَاوِدُ عَنْهُ أَبَاهُ وَإِنَّا لَفَاعِلُونَ
न तुम लोग मेरे क़रीब ही चढ़ने पाओगे वह लोग कहने लगे हम उसके वालिद से उसके बारे में जाते ही दरख्वास्त करेंगे
62وَقَالَ لِفِتْيَانِهِ اجْعَلُوا بِضَاعَتَهُمْ فِي رِحَالِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَعْرِفُونَهَا إِذَا انقَلَبُوا إِلَىٰ أَهْلِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम ज़रुर इस काम को पूरा करेंगें और यूसुफ ने अपने मुलाज़िमों (नौकरों) को हुक्म दिया कि उनकी (जमा) पूंजी उनके बोरो में (चूपके से) रख दो ताकि जब ये लोग अपने एहलो (अयाल) के पास लौट कर जाएं तो अपनी पूंजी को पहचान ले
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अनुवाद — यूसुफ 60

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Tuesday, August 18, 2026

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