Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَنُرَاوِدُ: हम प्रयास करेंगे, कोशिश करेंगे, माँगेंगे।
- عَنْهُ: उसके बारे में (बिन्यामीन के बारे में)।
- أَبَاهُ: उसके पिता (हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम) से।
- وَإِنَّا لَفَاعِلُونَ: और हम निश्चित रूप से करने वाले हैं (अपना वादा पूरा करेंगे)।
तफ़सीर:
जब हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने अपने भाइयों से कहा कि अगली बार जब तुम आओ तो अपने सौतेले भाई (बिन्यामीन) को भी साथ लेकर आना, और यदि ऐसा नहीं करोगे तो तुम्हारे लिए मेरे पास कोई अनाज नहीं होगा, तो भाइयों ने जवाब में यह वादा किया। उन्होंने कहा: "हम अपने पिता से उसे (बिन्यामीन को) माँगने का पूरा प्रयास करेंगे। हम उन्हें मनाने की हर संभव कोशिश करेंगे, चाहे जिस तरह से भी हो। हम इस मामले में किसी भी कमी को नहीं छोड़ेंगे और जो आपने हमें आदेश दिया है, उसे हम पूरा करेंगे।"
यह उनका उत्तर था, जिसमें उन्होंने अपनी सामर्थ्य और इरादे का भरोसा दिलाया। हालाँकि, वे जानते थे कि उनके पिता बिन्यामीन को उनके साथ भेजने में बहुत सावधानी बरतेंगे, क्योंकि पहले यूसुफ़ के बारे में उन्होंने जो कुछ खोया था, उसका दर्द अभी भी उनके दिल में था। फिर भी, उन्होंने यूसुफ़ को आश्वस्त किया कि वे इस काम में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि वादे को पूरा करने का इरादा और उसके लिए प्रयास करना बहुत बड़ी नेकी है। भाइयों ने भले ही बाद में अपने वादे में कमी की, लेकिन उन्होंने पहले पूरे इरादे से वादा किया था।
- यह हमें सिखाता है कि किसी कठिन काम को करने के लिए हमें पूरी कोशिश और मेहनत करनी चाहिए, और अगर कोई बाधा आए तो उसे दूर करने के लिए हर संभव उपाय अपनाने चाहिए।
- इस आयत में पिता (हज़रत याक़ूब) के प्रति सम्मान और उनसे बात करने का अच्छा तरीका भी दिखाया गया है। भाइयों ने कहा कि हम "अपने पिता से" माँगेंगे, जो उनके सम्मान को दर्शाता है।
- यह हमें सिखाता है कि जब किसी ज़िम्मेदारी को लिया जाए, तो उसे पूरी गंभीरता से लेना चाहिए और कहा गया काम करके ही दम लेना चाहिए।
📜 आयत 59-63 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 61
सूरा यूसुफ आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : न तुम लोग मेरे क़रीब ही चढ़ने पाओगे वह लोग…सूरा आयत 61/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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