अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَاللَّهِ: अल्लाह की क़सम!
- لَفِي ضَلَالِكَ الْقَدِيمِ: तू अपनी पुरानी भूल/धुन में ही है।
व्याख्या:
जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने परिवार वालों से कहा कि मुझे यूसुफ़ की ख़ुशबू आ रही है, और यह कि वह ज़िंदा हैं और मिलेंगे, तो उनके पास मौजूद लोगों (उनकी संतानों) ने यह सुनकर आश्चर्य और तअज्जुब के साथ कहा: "अल्लाह की क़सम! तुम तो आज भी अपनी उसी पुरानी धुन में हो, जिसमें तुम यूसुफ़ के प्रति अत्यधिक प्रेम और उनके मिलने की आशा के कारण हमेशा रहे हो।" उनका ख़याल था कि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) तो बहुत पहले मर चुके हैं, और याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह बात उन्हें उनकी पुरानी भूल और उसी पुराने ग़म की याद दिला रही थी। वे समझते थे कि यह उनका वही पुराना वहम है जो यूसुफ़ के प्रति अत्यधिक प्रेम की वजह से उन पर सवार है। उन्होंने इसे "गुमराही" और "भूल" कहा, हालाँकि वास्तव में यह याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की सच्ची सूझ-बूझ और अल्लाह की ओर से दी गई बशारत थी, जिसे वे समझ नहीं पा रहे थे।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें सब्र का सबक मिलता है। हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने दशकों तक अपने बेटे की जुदाई में सब्र किया और अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं हुए। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों।
- जब लोग किसी सच्ची बात को समझ नहीं पाते, तो उसे भूल या वहम कहकर टाल देते हैं। हमें चाहिए कि दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें और जल्दबाज़ी में उन्हें ग़लत न ठहराएँ।
- अल्लाह के नबियों की बातें हमेशा सच्ची होती हैं, भले ही लोग उन्हें न मानें। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई पर क़ायम रहें, चाहे लोग हँसें या मज़ाक़ उड़ाएँ।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और क़ुदरत किसी भी वक़्त आ सकती है। याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की आशा अंततः पूरी हुई और उन्हें अपने बेटे से मिलाया गया। इसलिए हमें अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए।
📜 आयत 93-97 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 95
सूरा यूसुफ आयत 95 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कुनबे वाले (पोते वग़ैराह) कहने लगे आप यक़ीनन…सूरा आयत 95/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 93–97. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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