यूसुफ · 95/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالُوا تَاللَّهِ إِنَّكَ لَفِي ضَلَالِكَ الْقَدِيمِ ۝٩٥
Qaaloo tallaahi innaka lafee dalaalikal qadeem
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कुनबे वाले (पोते वग़ैराह) कहने लगे आप यक़ीनन अपने पुराने ख़याल (मोहब्बत) में (पड़े हुए) हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَاللَّهِ: अल्लाह की क़सम!
  • لَفِي ضَلَالِكَ الْقَدِيمِ: तू अपनी पुरानी भूल/धुन में ही है।

व्याख्या:

जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने परिवार वालों से कहा कि मुझे यूसुफ़ की ख़ुशबू आ रही है, और यह कि वह ज़िंदा हैं और मिलेंगे, तो उनके पास मौजूद लोगों (उनकी संतानों) ने यह सुनकर आश्चर्य और तअज्जुब के साथ कहा: "अल्लाह की क़सम! तुम तो आज भी अपनी उसी पुरानी धुन में हो, जिसमें तुम यूसुफ़ के प्रति अत्यधिक प्रेम और उनके मिलने की आशा के कारण हमेशा रहे हो।" उनका ख़याल था कि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) तो बहुत पहले मर चुके हैं, और याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह बात उन्हें उनकी पुरानी भूल और उसी पुराने ग़म की याद दिला रही थी। वे समझते थे कि यह उनका वही पुराना वहम है जो यूसुफ़ के प्रति अत्यधिक प्रेम की वजह से उन पर सवार है। उन्होंने इसे "गुमराही" और "भूल" कहा, हालाँकि वास्तव में यह याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की सच्ची सूझ-बूझ और अल्लाह की ओर से दी गई बशारत थी, जिसे वे समझ नहीं पा रहे थे।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें सब्र का सबक मिलता है। हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने दशकों तक अपने बेटे की जुदाई में सब्र किया और अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं हुए। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों।
  2. जब लोग किसी सच्ची बात को समझ नहीं पाते, तो उसे भूल या वहम कहकर टाल देते हैं। हमें चाहिए कि दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें और जल्दबाज़ी में उन्हें ग़लत न ठहराएँ।
  3. अल्लाह के नबियों की बातें हमेशा सच्ची होती हैं, भले ही लोग उन्हें न मानें। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई पर क़ायम रहें, चाहे लोग हँसें या मज़ाक़ उड़ाएँ।
  4. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और क़ुदरत किसी भी वक़्त आ सकती है। याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की आशा अंततः पूरी हुई और उन्हें अपने बेटे से मिलाया गया। इसलिए हमें अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए।


📜 आयत 93-97 — यूसुफ

93اذْهَبُوا بِقَمِيصِي هَٰذَا فَأَلْقُوهُ عَلَىٰ وَجْهِ أَبِي يَأْتِ بَصِيرًا وَأْتُونِي بِأَهْلِكُمْ أَجْمَعِينَ
और उसको अब्बा जान के चेहरे पर डाल देना कि वह फिर बीना हो जाएंगें (देखने लगेंगे) और तुम लोग अपने सब लड़के बालों को लेकर मेरे पास चले आओ
94وَلَمَّا فَصَلَتِ الْعِيرُ قَالَ أَبُوهُمْ إِنِّي لَأَجِدُ رِيحَ يُوسُفَ ۖ لَوْلَا أَن تُفَنِّدُونِ
और जो ही ये काफ़िला मिस्र से चला था कि उन लोगों के वालिद (याक़ूब) ने कहा दिया था कि अगर मुझे सठिया या हुआ न कहो तो बात कहूँ कि मुझे यूसुफ की बू मालूम हो रही है
95قَالُوا تَاللَّهِ إِنَّكَ لَفِي ضَلَالِكَ الْقَدِيمِ
वह लोग कुनबे वाले (पोते वग़ैराह) कहने लगे आप यक़ीनन अपने पुराने ख़याल (मोहब्बत) में (पड़े हुए) हैं
96فَلَمَّا أَن جَاءَ الْبَشِيرُ أَلْقَاهُ عَلَىٰ وَجْهِهِ فَارْتَدَّ بَصِيرًا ۖ قَالَ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ إِنِّي أَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
फिर (यूसुफ की) खुशखबरी देने वाला आया और उनके कुर्ते को उनके चेहरे पर डाल दिया तो याक़ूब फौरन फिर दोबारा ऑंख वाले हो गए (तब याक़ूब ने बेटों से) कहा क्यों मै तुमसे न कहता था जो बातें खुदा की तरफ से मै जानता हूँ तुम नहीं जानते
97قَالُوا يَا أَبَانَا اسْتَغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا إِنَّا كُنَّا خَاطِئِينَ
उन लोगों ने अर्ज़ की ऐ अब्बा हमारे गुनाहों की मग़फिरत की (ख़ुदा की बारगाह में) हमारे वास्ते दुआ मॉगिए हम बेशक अज़सरतापा गुनेहगार हैं
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
95आयत

अनुवाद — यूसुफ 95

सूरा यूसुफ आयत 95 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कुनबे वाले (पोते वग़ैराह) कहने लगे आप यक़ीनन…

सूरा आयत 95/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 93–97. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए