अल-हिज्र · 37/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ الْمُنظَرِينَ ۝٣٧
Qaala fa innaka minal munzareen
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने फरमाया वक्त मुक़र्रर

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِنَ الْمُنظَرِينَ: उन लोगों में से जिन्हें मोहलत दी गई है, यानी जिनकी मौत को टाल दिया गया है।

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला का फरमान है कि जब इब्लीस ने आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करने से इनकार कर दिया और अल्लाह ने उसे अपनी रहमत से दूर कर दिया, तो इब्लीस ने अल्लाह से क़यामत के दिन तक मोहलत मांगी। अल्लाह तआला ने उसकी यह दरख़्वास्त क़ुबूल करते हुए फरमाया: "बेशक तू उन लोगों में से है जिन्हें मोहलत दी गई है।" यानी तेरी मौत को उस वक़्त तक टाल दिया गया है जब तक कि सूर (नरसिंगा) में पहली बार फूंक मारी न जाए और सारे जीव-जंतु मर न जाएं। यह मोहलत उसे क़यामत के दिन तक नहीं दी गई, बल्कि पहली सूर के दिन तक दी गई, जब सब कुछ फ़ना हो जाएगा। अल्लाह तआला ने उसे यह मोहलत इसलिए दी ताकि वह अपनी पूरी कोशिश करके बनी आदम को गुमराह करे, और यह अल्लाह की तरफ से एक इम्तिहान और आज़माइश है जो इंसानों और जिन्नों के लिए है। यह मोहलत इब्लीस के लिए रहमत नहीं, बल्कि उसके अज़ाब को बढ़ाने का ज़रिया है, क्योंकि जितना ज़्यादा वह गुमराही फैलाएगा, उतनी ही उसकी सज़ा बढ़ती जाएगी।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह तआला की सुन्नत (रीति) यह है कि वह अपने बंदों को उनकी आज़माइश के लिए मोहलत देता है, और यह उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) का हिस्सा है।
  2. इब्लीस की मोहलत हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम उसके धोखे से बचें और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहें, क्योंकि उसने क़सम खाई है कि वह हमें गुमराह करेगा।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसकी हिकमत के मुताबिक़ हैं; इब्लीस को मोहलत देना उसकी रहमत नहीं, बल्कि उसकी सज़ा को बढ़ाने का बाइस है।
  4. इससे हमें यह सबक मिलता है कि हमें अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए और उसकी तरफ रुजू करना चाहिए, क्योंकि इब्लीस की तरह हमारा अंजाम भी बुरा हो सकता है अगर हम उसकी पैरवी करें।
  5. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ इंसाफ़ करता है और किसी पर ज़ुल्म नहीं करता; इब्लीस को मोहलत देना उसकी अपनी मांग थी, और अल्लाह ने उसे उसकी मांग के मुताबिक़ जवाब दिया।


📜 आयत 35-39 — अल-हिज्र

35وَإِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ الدِّينِ
और यक़ीनन तुझ पर रोज़े में जज़ा तक फिटकार बरसा करेगी
36قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِي إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
शैतान ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार ख़ैर तू मुझे उस दिन तक की मोहलत दे जबकि (लोग दोबारा ज़िन्दा करके) उठाए जाएँगें
37قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ الْمُنظَرِينَ
ख़ुदा ने फरमाया वक्त मुक़र्रर
38إِلَىٰ يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ
के दिन तक तुझे मोहलत दी गई
39قَالَ رَبِّ بِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِي الْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
उन शैतान ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार चूंकि तूने मुझे रास्ते से अलग किया मैं भी उनके लिए दुनिया में (साज़ व सामान को) उम्दा कर दिखाऊँगा और सबको ज़रुर बहकाऊगा
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अनुवाद — अल-हिज्र 37

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Tuesday, August 18, 2026

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