अल-हिज्र · 67/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
وَجَاءَ أَهْلُ الْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ ۝٦٧
Wa jaaa`a ahlul madeenati yastabshiroon
📖 हिंदी अर्थ
और (ये बात हो रही थीं कि) शहर के लोग (मेहमानों की ख़बर सुन कर बुरी नीयत से) खुशियाँ मनाते हुए आ पहुँचे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَهْلُ الْمَدِينَةِ: नगर (सदूम) के निवासी।
  • يَسْتَبْشِرُونَ: खुश हो रहे थे, एक-दूसरे को शुभ सूचना दे रहे थे।

व्याख्या:

जब नगर के लोगों को पता चला कि लूत (अलैहिस्सलाम) के पास कुछ मेहमान आए हैं जो अत्यंत सुंदर हैं, तो वे खुशी और उल्लास के साथ उनकी ओर दौड़ पड़े। उनकी खुशी का कारण कोई भलाई नहीं थी, बल्कि वे अपनी घृणित इच्छा (समलैंगिक कुकर्म) को पूरा करने के लिए लालायित थे। वे एक-दूसरे को यह शुभ सूचना दे रहे थे कि लूत के पास नए मेहमान आए हैं, और वे उन्हें अपने बुरे कर्मों का शिकार बनाना चाहते थे। यह उनकी हद से गुज़री हुई बुराई और नैतिक पतन का प्रमाण था कि वे पाप को खुशी और उत्सव का अवसर मानते थे।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि पाप और अश्लीलता समाज को किस हद तक बर्बाद कर सकती है, जब लोग बुराई को खुलेआम और खुशी-खुशी करने लगते हैं।
  2. इससे हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के नबियों की दावत को झुठलाने वाली क़ौमें अंततः विनाश का शिकार होती हैं, चाहे वे कितनी भी ताकतवर क्यों न हों।
  3. यह आयत हमें अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखने और अल्लाह की नाराज़गी से बचने की ताकीद करती है, क्योंकि बुराई की शुरुआत छोटे कदमों से होती है और अंजाम बहुत बुरा होता है।
  4. हमें इससे यह भी सबक मिलता है कि अच्छे लोगों का साथ और नेक संगति हमें बुराई से बचाती है, जैसे लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के सामने सच्चाई पेश की, लेकिन उन्होंने उसे नकार दिया।


📜 आयत 65-69 — अल-हिज्र

65فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ اللَّيْلِ وَاتَّبِعْ أَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ
बस तो आप कुछ रात रहे अपने लड़के बालों को लेकर निकल जाइए और आप सब के सब पीछे रहिएगा और उन लोगों में से कोई मुड़कर पीछे न देखे और जिधर (जाने) का हुक्म दिया गया है (शाम) उधर (सीधे) चले जाओ और हमने लूत के पास इस अम्र का क़तई फैसला कहला भेजा
66وَقَضَيْنَا إِلَيْهِ ذَٰلِكَ الْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَٰؤُلَاءِ مَقْطُوعٌ مُّصْبِحِينَ
कि बस सुबह होते होते उन लोगों की जड़ काट डाली जाएगी
67وَجَاءَ أَهْلُ الْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ
और (ये बात हो रही थीं कि) शहर के लोग (मेहमानों की ख़बर सुन कर बुरी नीयत से) खुशियाँ मनाते हुए आ पहुँचे
68قَالَ إِنَّ هَٰؤُلَاءِ ضَيْفِي فَلَا تَفْضَحُونِ
लूत ने (उनसे कहा) कि ये लोग मेरे मेहमान है तो तुम (इन्हें सताकर) मुझे रुसवा बदनाम न करो
69وَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ
और ख़ुदा से डरो और मुझे ज़लील न करो
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अनुवाद — अल-हिज्र 67

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Wednesday, August 19, 2026

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