अल-इसरा · 103/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
فَأَرَادَ أَن يَسْتَفِزَّهُم مِّنَ الْأَرْضِ فَأَغْرَقْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ جَمِيعًا ۝١٠٣
Fa araada any yastafizzahum minal ardi fa aghraqnaahu wa mam ma`ahoo jamee`aa
📖 हिंदी अर्थ
फिर फिरऔन ने ये ठान लिया कि बनी इसराईल को (सर ज़मीने) मिò से निकाल बाहर करे तो हमने फिरऔन और जो लोग उसके साथ थे सब को डुबो मारा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَفِزَّهُم: उन्हें उखाड़ फेंके, यानी उन्हें ज़ुल्म और सताहट के ज़रिए वहाँ से निकाल दे।
  • مِنَ الْأَرْضِ: उस धरती से, यानी मिस्र की धरती से।
  • فَأَغْرَقْنَاهُ: तो हमने उसे (फ़िरऔन को) डुबो दिया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) के हाथों वे महान चमत्कार देखे, और जब जादूगर ईमान ले आए और सच्चाई साफ़ हो गई, तो उसके दिल में ज़ुल्म और सरकशी और बढ़ गई। उसने सोचा कि मूसा और उनकी क़ौम (बनी इसराईल) की बढ़ती ताक़त उसके राज्य के लिए ख़तरा है। चुनाँचे उसने इरादा किया कि उन्हें मिस्र की धरती से जड़ से उखाड़ फेंके — यानी उन्हें सताकर, धमकाकर या जंग छेड़कर वहाँ से निकाल दे। लेकिन अल्लाह तआला ने उसकी इस साज़िश का जवाब ऐसे दिया कि उसे और उसके साथियों को समुद्र में डुबो दिया — सबको एक साथ, कोई बच न सका।

ये अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब कोई ज़ालिम हद से गुज़र जाता है और अल्लाह के नबियों और नेक लोगों को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश करता है, तो अल्लाह उसे ऐसी जगह से पकड़ता है जहाँ से उसे बचने की उम्मीद नहीं होती। फ़िरऔन ने सोचा था कि वह मूसा को निकाल देगा, लेकिन अल्लाह ने उसे ख़ुद समुद्र में डुबो दिया — यानी उसकी साज़िश उसी पर उलट गई।

इस क़िस्से में हमारे लिए बड़ी सीख है: अल्लाह पर भरोसा रखो, चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों। अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और ज़ालिमों को उनकी साज़िशों का बदला देता है। जब तुम देखो कि ज़ुल्म बढ़ गया है, तो यक़ीन रखो कि अल्लाह की मदद क़रीब है। फ़िरऔन की तरह ताक़तवर और सरकश लोग भी अल्लाह के सामने बेबस हैं — उसकी पकड़ से कोई नहीं बच सकता। ये क़िस्सा हमें सिखाता है कि हक़ (सच्चाई) की तरफ़ चलने वालों का अंजाम कामयाबी है, और बातिल (झूठ) का अंजाम तबाही है।

🎧 सुनें

📜 आयत 101-105 — अल-इसरा

101وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَىٰ تِسْعَ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۖ فَاسْأَلْ بَنِي إِسْرَائِيلَ إِذْ جَاءَهُمْ فَقَالَ لَهُ فِرْعَوْنُ إِنِّي لَأَظُنُّكَ يَا مُوسَىٰ مَسْحُورًا
और हमने यक़ीनन मूसा को खुले हुए नौ मौजिज़े अता किए तो (ऐ रसूल) बनी इसराईल से (यही) पूछ देखो कि जब मूसा उनके पास आए तो फिरऔन ने उनसे कहा कि ऐ मूसा मै तो समझता हूँ कि किसी ने तुम पर जादू करके दीवाना बना दिया है
102قَالَ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا أَنزَلَ هَٰؤُلَاءِ إِلَّا رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ بَصَائِرَ وَإِنِّي لَأَظُنُّكَ يَا فِرْعَوْنُ مَثْبُورًا
मूसा ने कहा तुम ये ज़रुर जानते हो कि ये मौजिज़े सारे आसमान व ज़मीन के परवरदिगार ने नाज़िल किए (और वह भी लोगों की) सूझ बूझ की बातें हैं और ऐ फिरऔन मै तो ख्याल करता हूँ कि तुम पर यामत आई है
103فَأَرَادَ أَن يَسْتَفِزَّهُم مِّنَ الْأَرْضِ فَأَغْرَقْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ جَمِيعًا
फिर फिरऔन ने ये ठान लिया कि बनी इसराईल को (सर ज़मीने) मिò से निकाल बाहर करे तो हमने फिरऔन और जो लोग उसके साथ थे सब को डुबो मारा
104وَقُلْنَا مِن بَعْدِهِ لِبَنِي إِسْرَائِيلَ اسْكُنُوا الْأَرْضَ فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ الْآخِرَةِ جِئْنَا بِكُمْ لَفِيفًا
और उसके बाद हमने बनी इसराईल से कहा कि (अब तुम ही) इस मुल्क में (खूब आराम से) रहो सहो फिर जब आख़िरत का वायदा आ पहुँचेगा तो हम तुम सबको समेट कर ले आएँगें
105وَبِالْحَقِّ أَنزَلْنَاهُ وَبِالْحَقِّ نَزَلَ ۗ وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
और (ऐ रसूल) हमने इस क़ुरान को बिल्कुल ठीक नाज़िल किया और बिल्कुल ठीक नाज़िल हुआ और तुमको तो हमने (जन्नत की) खुशखबरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला (रसूल) बनाकर भेजा है
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अनुवाद — अल-इसरा 103

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Tuesday, August 18, 2026

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