Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نَرِثُ: हम वारिस हैं, यानी सब कुछ हमारे पास लौटकर आएगा और हम ही शेष रहेंगे।
- الْأَرْضَ وَمَنْ عَلَيْهَا: धरती और उसके सभी निवासी (इंसान, जिन्न, जानवर, और हर जीवित प्राणी)।
- يُرْجَعُونَ: वे लौटाए जाएँगे, यानी सबको हमारी ओर पलटना है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी कुदरत की याद दिलाती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम ही इस धरती और उस पर मौजूद हर चीज़ के असली मालिक हैं। यह दुनिया फ़ानी है, यहाँ का हर शख्स, हर ताकतवर, हर अमीर, हर शासक — सब कुछ एक दिन खत्म हो जाएगा। लेकिन अल्लाह हमेशा रहने वाला है, वही इस पूरी कायनात का वारिस है। जब सब कुछ बर्बाद हो जाएगा, तो सिर्फ अल्लाह की ज़ात बाकी रहेगी, और वही सब कुछ अपने कब्ज़े में ले लेगा।
यानी जो लोग दुनिया की दौलत, ताकत और सत्ता पर इतराते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह सब कुछ अस्थायी है। आज वे मालिक बने हुए हैं, लेकिन कल उन्हें भी सब कुछ छोड़कर जाना है। अल्लाह ही सब कुछ बाकी रखने वाला है, और उसी की तरफ सबको लौटना है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और हमारी ही ओर वे लौटाए जाएँगे।" यानी मौत के बाद सबको ज़िंदा होकर अल्लाह के सामने हाज़िर होना है। वहाँ हर इंसान से उसके अमल का हिसाब लिया जाएगा। जिसने नेकी की होगी, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने बुराई की होगी, उसे बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। यह अल्लाह का इंसाफ़ है, और उसका वादा सच्चा है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें दुनिया की क्षणभंगुरता और आख़िरत की हक़ीक़त पर ग़ौर करने की तरफ बुलाती है। हमें चाहिए कि हम दुनिया में रहते हुए भी अपनी आख़िरत की फ़िक्र करें। जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम है। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह कभी ज़ालिमों को बेसज़ा नहीं छोड़ेगा, और नेक लोगों की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, क्योंकि आख़िरकार सबको उसी की तरफ लौटना है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है — कि हम उस दिन उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत मिले।
📜 आयत 38-42 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 40
सूरा मरियम आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ईमान नहीं लाते इसमें शक नहीं कि (एक दिन)…सूरा आयत 40/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


