मरियम · 40/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
إِنَّا نَحْنُ نَرِثُ الْأَرْضَ وَمَنْ عَلَيْهَا وَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ ۝٤٠
Innaa NNahnu narisul arda wa man `alaihaa wa ilainaa yurja`oon
📖 हिंदी अर्थ
और ईमान नहीं लाते इसमें शक नहीं कि (एक दिन) ज़मीन के और जो कुछ उस पर है (उसके) हम ही वारिस होंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نَرِثُ: हम वारिस हैं, यानी सब कुछ हमारे पास लौटकर आएगा और हम ही शेष रहेंगे।
  • الْأَرْضَ وَمَنْ عَلَيْهَا: धरती और उसके सभी निवासी (इंसान, जिन्न, जानवर, और हर जीवित प्राणी)।
  • يُرْجَعُونَ: वे लौटाए जाएँगे, यानी सबको हमारी ओर पलटना है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी कुदरत की याद दिलाती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम ही इस धरती और उस पर मौजूद हर चीज़ के असली मालिक हैं। यह दुनिया फ़ानी है, यहाँ का हर शख्स, हर ताकतवर, हर अमीर, हर शासक — सब कुछ एक दिन खत्म हो जाएगा। लेकिन अल्लाह हमेशा रहने वाला है, वही इस पूरी कायनात का वारिस है। जब सब कुछ बर्बाद हो जाएगा, तो सिर्फ अल्लाह की ज़ात बाकी रहेगी, और वही सब कुछ अपने कब्ज़े में ले लेगा।

यानी जो लोग दुनिया की दौलत, ताकत और सत्ता पर इतराते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह सब कुछ अस्थायी है। आज वे मालिक बने हुए हैं, लेकिन कल उन्हें भी सब कुछ छोड़कर जाना है। अल्लाह ही सब कुछ बाकी रखने वाला है, और उसी की तरफ सबको लौटना है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और हमारी ही ओर वे लौटाए जाएँगे।" यानी मौत के बाद सबको ज़िंदा होकर अल्लाह के सामने हाज़िर होना है। वहाँ हर इंसान से उसके अमल का हिसाब लिया जाएगा। जिसने नेकी की होगी, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने बुराई की होगी, उसे बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। यह अल्लाह का इंसाफ़ है, और उसका वादा सच्चा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें दुनिया की क्षणभंगुरता और आख़िरत की हक़ीक़त पर ग़ौर करने की तरफ बुलाती है। हमें चाहिए कि हम दुनिया में रहते हुए भी अपनी आख़िरत की फ़िक्र करें। जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम है। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह कभी ज़ालिमों को बेसज़ा नहीं छोड़ेगा, और नेक लोगों की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, क्योंकि आख़िरकार सबको उसी की तरफ लौटना है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है — कि हम उस दिन उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत मिले।

🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — मरियम

38أَسْمِعْ بِهِمْ وَأَبْصِرْ يَوْمَ يَأْتُونَنَا ۖ لَٰكِنِ الظَّالِمُونَ الْيَوْمَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
जिस दिन ये लोग हमारे हुज़ूर में हाज़िर होंगे क्या कुछ सुनते देखते होंगे मगर आज तो नफ़रमान लोग खुल्लम खुल्ला गुमराही में हैं
39وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْحَسْرَةِ إِذْ قُضِيَ الْأَمْرُ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ وَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और (ऐ रसूल) तुम उनको हसरत (अफ़सोस) के दिन से डराओ जब क़तई फैसला कर दिया जाएगा और (इस वक्त तो) ये लोग ग़फलत में (पड़े हैं)
40إِنَّا نَحْنُ نَرِثُ الْأَرْضَ وَمَنْ عَلَيْهَا وَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ
और ईमान नहीं लाते इसमें शक नहीं कि (एक दिन) ज़मीन के और जो कुछ उस पर है (उसके) हम ही वारिस होंगे
41وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِبْرَاهِيمَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا
(और सब नेस्त व नाबूद हो जाएँगे) और सब के सब हमारी तरफ़ लौटाए जाएँगे और (ऐ रसूल) क़ुरान में इबराहीम का (भी) तज़किरा करो
42إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ لِمَ تَعْبُدُ مَا لَا يَسْمَعُ وَلَا يُبْصِرُ وَلَا يُغْنِي عَنكَ شَيْئًا
इसमें शक नहीं कि वह बड़े सच्चे नबी थे जब उन्होंने अपने चचा और मुँह बोले बाप से कहा कि ऐ अब्बा आप क्यों, ऐसी चीज़ (बुत) की परसतिश करते हैं जो ने सुन सकता है और न देख सकता है
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अनुवाद — मरियम 40

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Tuesday, August 18, 2026

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