अल-बकरा · 29/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ لَكُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعًا ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰٓ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَسَوَّىٰهُنَّ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٍۚ وَهُوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ  ۝٢٩
Huwal lazee khalaqa lakum maa fil ardi jamee`an summas tawaaa ilas samaaa`i fasaw waahunna sab`a samaa waat; wa Huwa bikulli shai`in Aleem
📖 हिंदी अर्थ
वही तो वह (खुदा) है जिसने तुम्हारे (नफ़े) के ज़मीन की कुल चीज़ों को पैदा किया फिर आसमान (के बनाने) की तरफ़ मुतावज्जेह हुआ तो सात आसमान हमवार (व मुसतहकम) बना दिए और वह (खुदा) हर चीज़ से (खूब) वाक़िफ है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَلَقَ لَكُم – तुम्हारे लिए पैदा किया
  • اسْتَوَى إِلَى السَّمَاء – आकाश की ओर ध्यान दिया / उसकी ओर रुख किया
  • فَسَوَّاهُنَّ – उन्हें दुरुस्त किया, बराबर बनाया
  • سَبْعَ سَمَاوَاتٍ – सात आकाश

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की असीम शक्ति और उसकी रहमत का अद्भुत नज़ारा दिखाती है। अल्लाह ही वह है जिसने यह सारी ज़मीन और उसमें मौजूद हर चीज़ – नदियाँ, पहाड़, पेड़-पौधे, खनिज पदार्थ, जानवर और वे सारी नेअमतें जिन्हें हम गिन भी नहीं सकते – सिर्फ़ तुम्हारे लिए पैदा कीं। वह चाहता था कि तुम इनसे फ़ायदा उठाओ, इन पर ग़ौर करो और उसके एहसानों को पहचानो। यह सब कुछ तुम्हारी ख़िदमत में लगा दिया गया है – यह अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ा तोहफ़ा है।

फिर अल्लाह ने आकाश की ओर ध्यान दिया और उसे सात आकाशों की शक्ल दी, उन्हें इस तरह बनाया कि उनमें कोई दरार नहीं, कोई कमी नहीं – हर चीज़ मुकम्मल और बेहतरीन है। यह बताता है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं। उसने ज़मीन को तुम्हारे लिए बिछाया और आसमान को तुम्हारे ऊपर छत बनाया – यह सब उसकी मुहब्बत और हिकमत का नतीजा है।

और सबसे ख़ूबसूरत बात यह है कि अल्लाह हर चीज़ का पूरा इल्म रखता है। वह जानता है कि ज़मीन में क्या है, आसमान में क्या है, तुम्हारे दिलों में क्या है और तुम्हारे हालात क्या हैं। उसका इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है – छोटी हो या बड़ी, ज़ाहिर हो या पोशीदा।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि जिस अल्लाह ने यह सब कुछ हमारे लिए बनाया है, वह हमारी परवाह करता है और हमें भूलता नहीं। जब उसने हमें इतनी नेअमतें दीं, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत में जुट जाना चाहिए। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के सामने हमें अपने अहम को छोड़कर उसके आगे झुक जाना चाहिए – क्योंकि वही सब कुछ पैदा करने वाला और सब कुछ जानने वाला है। जिस रब ने हमारे लिए ज़मीन को आरामगाह बनाया और आसमान को सजाया, उस पर भरोसा रखना ही हमारी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-बकरा

27ٱلَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهۡدَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مِيثَٰقِهِۦ وَيَقۡطَعُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ 
जो लोग खुदा के एहदो पैमान को मज़बूत हो जाने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (ताल्लुक़ात) का खुदा ने हुक्म दिया है उनको क़ताआ कर देते हैं और मुल्क में फसाद करते फिरते हैं, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
28كَيۡفَ تَكۡفُرُونَ بِٱللَّهِ وَكُنتُمۡ أَمۡوَٰتًا فَأَحۡيَٰكُمۡۖ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يُحۡيِيكُمۡ ثُمَّ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ 
(हाँए) क्यों कर तुम खुदा का इन्कार कर सकते हो हालाँकि तुम (माओं के पेट में) बेजान थे तो उसी ने तुमको ज़िन्दा किया फिर वही तुमको मार डालेगा, फिर वही तुमको (दोबारा क़यामत में) ज़िन्दा करेगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाओगे
29هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ لَكُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعًا ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰٓ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَسَوَّىٰهُنَّ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٍۚ وَهُوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ 
वही तो वह (खुदा) है जिसने तुम्हारे (नफ़े) के ज़मीन की कुल चीज़ों को पैदा किया फिर आसमान (के बनाने) की तरफ़ मुतावज्जेह हुआ तो सात आसमान हमवार (व मुसतहकम) बना दिए और वह (खुदा) हर चीज़ से (खूब) वाक़िफ है
30وَإِذۡ قَالَ رَبُّكَ لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّي جَاعِلٌ فِي ٱلۡأَرۡضِ خَلِيفَةًۖ قَالُوٓاْ أَتَجۡعَلُ فِيهَا مَن يُفۡسِدُ فِيهَا وَيَسۡفِكُ ٱلدِّمَآءَ وَنَحۡنُ نُسَبِّحُ بِحَمۡدِكَ وَنُقَدِّسُ لَكَۖ قَالَ إِنِّيٓ أَعۡلَمُ مَا لَا تَعۡلَمُونَ 
और (ऐ रसूल) उस वक्त क़ो याद करो जब तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं (अपना) एक नाएब ज़मीन में बनानेवाला हूँ (फरिश्ते ताज्जुब से) कहने लगे क्या तू ज़मीन ऐसे शख्स को पैदा करेगा जो ज़मीन में फ़साद और खूँरेज़ियाँ करता फिरे हालाँकि (अगर) ख़लीफा बनाना है (तो हमारा ज्यादा हक़ है) क्योंकि हम तेरी तारीफ व तसबीह करते हैं और तेरी पाकीज़गी साबित करते हैं तब खुदा ने फरमाया इसमें तो शक ही नहीं कि जो मैं जानता हूँ तुम नहीं जानते
31وَعَلَّمَ ءَادَمَ ٱلۡأَسۡمَآءَ كُلَّهَا ثُمَّ عَرَضَهُمۡ عَلَى ٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ فَقَالَ أَنۢبِـُٔونِي بِأَسۡمَآءِ هَٰٓؤُلَآءِ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ 
और (आदम की हक़ीक़म ज़ाहिर करने की ग़रज़ से) आदम को सब चीज़ों के नाम सिखा दिए फिर उनको फरिश्तों के सामने पेश किया और फ़रमाया कि अगर तुम अपने दावे में कि हम मुस्तहके ख़िलाफ़त हैं। सच्चे हो तो मुझे इन चीज़ों के नाम बताओ
अल-बकराकुरान सूची
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अनुवाद — अल-बकरा 29

सूरा आयत 29/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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