अल-अंबिया · 37/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
خُلِقَ الْإِنسَانُ مِنْ عَجَلٍ ۚ سَأُرِيكُمْ آيَاتِي فَلَا تَسْتَعْجِلُونِ ۝٣٧
Khuliqal insaanu min `ajal; sa ureekum Aayaatee falaa tasta`jiloon
📖 हिंदी अर्थ
आदमी तो बड़ा जल्दबाज़ पैदा किया गया है मैं अनक़रीब ही तुम्हें अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाऊँगा तो तुम मुझसे जल्दी की (द्दूम) न मचाओ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خُلِقَ الْإِنسَانُ مِنْ عَجَلٍ: इंसान जल्दबाज़ी पर पैदा किया गया है, यानी उसकी फ़ितरत में जल्दी और बेसब्री है।
  • سَأُرِيكُمْ آيَاتِي: मैं तुम्हें अपनी निशानियाँ (अज़ाब या क़ुदरत के नमूने) दिखाऊँगा।
  • فَلَا تَسْتَعْجِلُونِ: तो तुम मुझसे जल्दी का तक़ाज़ा न करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इंसान की फ़ितरत ही जल्दबाज़ी पर बनी है—वह हर चीज़ को वक़्त से पहले पाना चाहता है और हर मामले में बेसब्री दिखाता है। यही हाल मक्का के मुशरिकीन का था कि उन्होंने नबी ﷺ से मज़ाक़िया अंदाज़ में अज़ाब की माँग की और कहा कि अगर तुम सच्चे हो तो वह अज़ाब ले आओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो। वे समझते थे कि यह अज़ाब आएगा ही नहीं, इसलिए वे उसे जल्दी माँग रहे थे।

अल्लाह तआला ने इसका जवाब दिया कि ऐ लोगो! इंसान अपनी ख़िलक़त के लिहाज़ से जल्दबाज़ है, लेकिन अल्लाह का काम अपने वक़्त पर होता है। उसने फ़रमाया: "मैं तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाऊँगा"—यानी वह अज़ाब या वह क़ुदरत के नमूने जो तुम माँग रहे हो, वे ज़रूर आएँगे, लेकिन उनके लिए अल्लाह ने एक वक़्त मुक़र्रर किया है। इसलिए तुम जल्दी न करो, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका फ़ैसला अटल है।

यह बात सिर्फ़ मुशरिकीन के लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए नसीहत है जो अपनी जल्दबाज़ी में अल्लाह के हिकमत भरे फ़ैसलों पर एतराज़ करता है। अल्लाह ने जो वक़्त मुक़र्रर किया है, वही बेहतरीन है। इंसान की जल्दबाज़ी अक्सर उसे नुक़सान पहुँचाती है, जबकि अल्लाह की मुहलत उसके हक़ में बेहतर होती है।

फिर अल्लाह तआला ने अपना वादा पूरा किया—जंग-ए-बद्र के दिन उन मुशरिकीन को वह अज़ाब दिखाया गया जिसकी वे जल्दी माँग रहे थे, और वे अपनी आँखों से अल्लाह की क़ुदरत के नमूने देखकर रह गए। यह उन लोगों के लिए सबक़ है जो अल्लाह की आयातों पर हँसते हैं और उन्हें जल्दी माँगते हैं।


दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िंदगी के मामलों में भी जल्दबाज़ी न करें। अल्लाह से दुआ करते समय भी हमें सब्र और भरोसे के साथ माँगना चाहिए, क्योंकि अल्लाह बेहतर जानता है कि हमारे लिए कब और क्या फ़ायदेमंद है। जल्दबाज़ी इंसान की कमज़ोरी है, जबकि सब्र और भरोसा अल्लाह की मुहब्बत की निशानी है। अल्लाह हमें सब्र और शुक्र की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 35-39 — अल-अंबिया

35كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ ۗ وَنَبْلُوكُم بِالشَّرِّ وَالْخَيْرِ فِتْنَةً ۖ وَإِلَيْنَا تُرْجَعُونَ
(हर शख्स एक न एक दिन) मौत का मज़ा चखने वाला है और हम तुम्हें मुसीबत व राहत में इम्तिहान की ग़रज़ से आज़माते हैं और (आख़िकार) हमारी ही तरफ लौटाए जाओगे
36وَإِذَا رَآكَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا الَّذِي يَذْكُرُ آلِهَتَكُمْ وَهُم بِذِكْرِ الرَّحْمَٰنِ هُمْ كَافِرُونَ
और (ऐ रसूल) जब तुम्हें कुफ्फ़ार देखते हैं तो बस तुमसे मसखरापन करते हैं कि क्या यही हज़रत हैं जो तुम्हारे माबूदों को (बुरी तरह) याद करते हैं हालाँकि ये लोग खुद खुदा की याद से इन्कार करते हैं (तो इनकी बेवकूफ़ी पर हँसना चाहिए)
37خُلِقَ الْإِنسَانُ مِنْ عَجَلٍ ۚ سَأُرِيكُمْ آيَاتِي فَلَا تَسْتَعْجِلُونِ
आदमी तो बड़ा जल्दबाज़ पैदा किया गया है मैं अनक़रीब ही तुम्हें अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाऊँगा तो तुम मुझसे जल्दी की (द्दूम) न मचाओ
38وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और लुत्फ़ तो ये है कि कहते हैं कि अगर सच्चे हो तो ये क़यामत का वायदा कब (पूरा) होगा
39لَوْ يَعْلَمُ الَّذِينَ كَفَرُوا حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ النَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
और जो लोग काफ़िर हो बैठे काश उस वक्त क़ी हालत से आगाह होते (कि जहन्नुम की आग में खडे होंगे) और न अपने चेहरों से आग को हटा सकेंगे और न अपनी पीठ से और न उनकी मदद की जाएगी
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अनुवाद — अल-अंबिया 37

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सूरा आयत 37/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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