अल-मोमिनुन · 83/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
لَقَدْ وُعِدْنَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا هَٰذَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ ۝٨٣
Laqad wu`idnaa nahnu wa aabaaa`unaa haazaa min qablu in haazaaa illaaa asaateerul awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
इसका वायदा तो हमसे और हमसे पहले हमारे बाप दादाओं से भी (बार हा) किया जा चुका है ये तो बस सिर्फ अगले लोगों के ढकोसले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسَاطِيرُ: असातीर, यह 'उस्तूरा' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है झूठी कहानियाँ, मनघड़ंत बातें, और कल्पित किस्से जिनकी कोई वास्तविकता नहीं होती।
  • الْأَوَّلِينَ: पहले लोग, अर्थात पूर्ववर्ती पीढ़ियाँ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों और मुनकिरों की बात बयान कर रही है, जिन्होंने क़ियामत और आख़िरत के आने को झुठलाया और नबी (ﷺ) की दावत का मज़ाक उड़ाते हुए कहा: "हमें और हमारे बाप-दादाओं को यह वादा पहले भी किया जाता रहा है। हमने तो यह बात सुनी थी कि मौत के बाद दोबारा जी उठना होगा, लेकिन हमने इसे कभी सच होते नहीं देखा। यह तो बस पुराने लोगों की झूठी कहानियाँ हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं।"

यानी उन्होंने आख़िरत की ख़बर को महज़ एक किस्सा-कहानी समझा और इसे सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि हमारे बुज़ुर्गों को भी यही बात बताई गई थी, मगर वह कभी पूरी नहीं हुई, इसलिए यह सिर्फ अफ़साने हैं।

दृष्टिकोण और सबक:

इस आयत से हमें यह समझना चाहिए कि जब सच्चाई पेश की जाती है, तो मुनकिर लोग उसे टालने और झुठलाने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। वे कहते हैं कि यह तो पुरानी बातें हैं, हमारे बाप-दादाओं ने भी यही सुना था। लेकिन अफ़सोस! वे यह नहीं सोचते कि अगर यह बात सिर्फ झूठ होती, तो इतने सारे नबी और रसूल अपनी जानें क्यों देते? क्या कोई इंसान सिर्फ एक झूठी कहानी के लिए इतनी मुश्किलें सह सकता है?

हमें यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह का वादा सच्चा है। क़ियामत ज़रूर आएगी, मौत के बाद ज़िंदगी ज़रूर मिलेगी। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से सच्ची ख़बर है। जो लोग इसे झुठलाते हैं, वे अपने नुक़्सान का सामान करते हैं। हमें चाहिए कि हम इस दुनिया में अच्छे काम करें और आख़िरत की तैयारी करें, क्योंकि वह दिन ज़रूर आने वाला है। अल्लाह ने क़ुरआन में बार-बार इसका वादा किया है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता।



📜 आयत 81-85 — अल-मोमिनुन

81بَلْ قَالُوا مِثْلَ مَا قَالَ الْأَوَّلُونَ
(इन बातों को समझें ख़ाक नहीं) बल्कि जो अगले लोग कहते आए वैसी ही बात ये भी कहने लगे
82قَالُوا أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
कि जब हम मर जाएँगें और (मरकर) मिट्टी (का ढ़ेर) और हड्डियाँ हो जाएँगें तो क्या हम फिर दोबारा (क्रबों से ज़िन्दा करके) निकाले जाएँगे
83لَقَدْ وُعِدْنَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا هَٰذَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
इसका वायदा तो हमसे और हमसे पहले हमारे बाप दादाओं से भी (बार हा) किया जा चुका है ये तो बस सिर्फ अगले लोगों के ढकोसले हैं
84قُل لِّمَنِ الْأَرْضُ وَمَن فِيهَا إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला अगर तुम लोग कुछ जानते हो (तो बताओ) ये ज़मीन और जो लोग इसमें हैं किस के हैं वह फौरन जवाब देगें ख़ुदा के
85سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर न करोगे
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 83

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Tuesday, August 18, 2026

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