अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- इन (إِنْ): नहीं है, केवल
- हाज़ा (هَذَا): यह
- ख़ुलुक़ (خُلُق): आदत, रीति, धर्म, स्वभाव
- अव्वलीन (الأَوَّلِينَ): पिछले लोग, पूर्वज
तफ़सीर:
जब नबी ह़ुज़ूर ह़ूद अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम 'आद को अल्लाह की तौह़ीद की दावत दी और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उन्होंने जवाब में कहा: "यह जो कुछ भी है, यह केवल पिछले लोगों की रीति और आदत है।" उनका मतलब यह था कि हम जिस चीज़ पर हैं, वह हमारे बुज़ुर्गों का तरीक़ा और उनका धर्म है। हम उसी पर चलते रहेंगे, चाहे तुम कुछ भी कहो। उन्होंने यह भी कहा कि हमें कोई अज़ाब नहीं पहुँचेगा, क्योंकि यह तो बस दुनिया का चक्कर है—कभी किसी पर मुसीबत आती है, कभी किसी पर ख़ुशहाली। यह अल्लाह की तरफ़ से कोई परीक्षा या सज़ा नहीं है।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि कुछ लोग हक़ की दावत को सुनकर भी अपने पुरखों की अंधी पैरवी करते हैं और सच्चाई को क़बूल नहीं करते। वे दीन को महज़ एक पुरानी परंपरा समझते हैं, जबकि दीन अल्लाह की तरफ़ से आया हुआ सच्चा रास्ता है। अल्लाह तआला ने हर ज़माने में नबी भेजे ताकि लोगों को अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ़ लाएँ।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने बुज़ुर्गों की अच्छी बातों का सम्मान करें, लेकिन अगर कहीं ग़लती दिखे तो उसे छोड़कर क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में चलें। अल्लाह का डर हमें उस रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे जो उसे पसंद है। यह मत सोचें कि हमारे कर्मों का कोई हिसाब नहीं होगा—हर इंसान अपने किए का ज़िम्मेदार है और अल्लाह न्याय के दिन हर चीज़ का फ़ैसला करेगा।
📜 आयत 135-139 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 137
सूरा अश-शुआरा आयत 137 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये (डरावा) तो बस अगले लोगों की आदत हैसूरा आयत 137/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 135–139. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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