अश-शुआरा · 66/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ ۝٦٦
Summa aghraqnal aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
फिर दूसरे फरीक़ (फिरऔन और उसके साथियों) को डुबोकर हलाक़ कर दिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَغْرَقْنَا: हमने डुबो दिया।
  • الْآخَرِينَ: दूसरों को, यानी फ़िरऔन और उसकी क़ौम को।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़िरऔन और उसकी क़ौम के अंजाम का ज़िक्र कर रहे हैं। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी बनी इसराईल ने समुद्र पार कर लिया, और फ़िरऔन अपनी फ़ौजों के साथ उनका पीछा करते हुए समुद्र के रास्ते में दाख़िल हो गया, तो अल्लाह ने समुद्र का पानी उन पर बंद कर दिया और उन्हें पूरी तरह डुबो दिया। यानी जिन लोगों ने हक़ को झुठलाया और अल्लाह के नबी का मुक़ाबला किया, उन्हें अल्लाह ने ग़रक़ करके हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना था कि जिस रास्ते से मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी महफ़ूज़ गुज़र गए, उसी रास्ते में फ़िरऔन और उसके लोग हलाक हो गए।

यह वाक़िया हमें सिखाता है कि अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे ईमान वालों के साथ होती है, चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो। फ़िरऔन के पास बड़ी फ़ौजें, हथियार और सल्तनत थी, लेकिन अल्लाह की इच्छा के आगे वह कुछ भी न कर सका। दूसरी तरफ़ मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा किए हुए थे, और अल्लाह ने उन्हें निहायत ही खूबसूरत तरीक़े से नजात दी।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि ज़ुल्म और सरकशी का अंजाम हमेशा बुरा होता है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख़्त है, और वह ज़ालिमों को कभी बख़्शता नहीं जब वे हद से गुज़र जाते हैं। साथ ही, यह भी याद रखें कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें हर मुसीबत से निकालने की तदबीर करता है। इसलिए हमें हमेशा हक़ पर साबित क़दम रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है। यह वाक़िया हमारे लिए एक नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करें और उसकी रहमत के तलबगार रहें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह ने दुनिया और आख़िरत में कामयाबी अता की है।

🎧 सुनें

📜 आयत 64-68 — अश-शुआरा

64وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ
और हमने उसी जगह दूसरे फरीक (फिरऔन के साथी) को क़रीब कर दिया
65وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ أَجْمَعِينَ
और मूसा और उसके साथियों को हमने (डूबने से) बचा लिया
66ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर दूसरे फरीक़ (फिरऔन और उसके साथियों) को डुबोकर हलाक़ कर दिया
67إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और उनमें अक्सर ईमान लाने वाले ही न थे
68وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें तो शक ही न था कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है
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अनुवाद — अश-शुआरा 66

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Tuesday, August 18, 2026

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