अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَنجَيْنَا: हमने बचा लिया / नजात दी।
- مُوسَىٰ: अल्लाह के नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम)।
- مَن مَّعَهُ: जो उनके साथ थे (बनी इसराईल के ईमानवाले)।
- أَجْمَعِينَ: सबको एक साथ, बिना किसी की कमी के।
तफसीर:
जब अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को हुक्म दिया कि रातों-रात अपनी क़ौम को लेकर मिस्र से निकल जाएँ, तो उन्होंने ऐसा ही किया। फ़िरऔन और उसकी फ़ौज ने उनका पीछा किया और उन्हें समुद्र के किनारे जा घेरा। सामने समुद्र की लहरें थीं और पीछे दुश्मन की फ़ौज — हर तरफ़ से मुसीबत नज़र आ रही थी। लेकिन अल्लाह तआला ने अपने नबी की दुआ पर समुद्र को चीरकर रास्ता बना दिया, और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपने साथियों समेत उस रास्ते से सही-सलामत गुज़र गए।
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि हमने मूसा और उनके साथियों को — जो ईमान लाए थे — पूरी तरह नजात दी। उनमें से कोई भी न तो डूबा और न ही दुश्मन के हाथों पहुँचा। यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि जब बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है और उसके हुक्म की ताबेदारी करता है, तो अल्लाह उसके लिए ऐसे रास्ते खोल देता है जिनका उसने सोचा भी नहीं होता।
यह घटना हमारे लिए सबक़ है कि मुश्किल से मुश्किल हालात में भी अल्लाह की मदद निराश नहीं करती। जो लोग अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुसीबत से निकालने का रास्ता दिखाता है। यही वजह है कि हमें हर हाल में अल्लाह से उम्मीद रखनी चाहिए और उसकी राह पर चलते रहना चाहिए — क्योंकि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
📜 आयत 63-67 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 65
सूरा अश-शुआरा आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मूसा और उसके साथियों को हमने (डूबने से) बचा…सूरा आयत 65/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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