अश-शुआरा · 65/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ أَجْمَعِينَ ۝٦٥
Wa anjainaa Moosaa wa mam ma`ahooo ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
और मूसा और उसके साथियों को हमने (डूबने से) बचा लिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَنجَيْنَا: हमने बचा लिया / नजात दी।
  • مُوسَىٰ: अल्लाह के नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम)।
  • مَن مَّعَهُ: जो उनके साथ थे (बनी इसराईल के ईमानवाले)।
  • أَجْمَعِينَ: सबको एक साथ, बिना किसी की कमी के।

तफसीर:

जब अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को हुक्म दिया कि रातों-रात अपनी क़ौम को लेकर मिस्र से निकल जाएँ, तो उन्होंने ऐसा ही किया। फ़िरऔन और उसकी फ़ौज ने उनका पीछा किया और उन्हें समुद्र के किनारे जा घेरा। सामने समुद्र की लहरें थीं और पीछे दुश्मन की फ़ौज — हर तरफ़ से मुसीबत नज़र आ रही थी। लेकिन अल्लाह तआला ने अपने नबी की दुआ पर समुद्र को चीरकर रास्ता बना दिया, और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपने साथियों समेत उस रास्ते से सही-सलामत गुज़र गए।

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि हमने मूसा और उनके साथियों को — जो ईमान लाए थे — पूरी तरह नजात दी। उनमें से कोई भी न तो डूबा और न ही दुश्मन के हाथों पहुँचा। यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि जब बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है और उसके हुक्म की ताबेदारी करता है, तो अल्लाह उसके लिए ऐसे रास्ते खोल देता है जिनका उसने सोचा भी नहीं होता।

यह घटना हमारे लिए सबक़ है कि मुश्किल से मुश्किल हालात में भी अल्लाह की मदद निराश नहीं करती। जो लोग अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुसीबत से निकालने का रास्ता दिखाता है। यही वजह है कि हमें हर हाल में अल्लाह से उम्मीद रखनी चाहिए और उसकी राह पर चलते रहना चाहिए — क्योंकि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।

🎧 सुनें

📜 आयत 63-67 — अश-शुआरा

63فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ
वह फौरन मुझे कोई (मुखलिसी का) रास्ता बता देगा तो हमने मूसा के पास वही भेजी कि अपनी छड़ी दरिया पर मारो (मारना था कि) फौरन दरिया फुट के टुकड़े टुकड़े हो गया तो गोया हर टुकड़ा एक बड़ा ऊँचा पहाड़ था
64وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ
और हमने उसी जगह दूसरे फरीक (फिरऔन के साथी) को क़रीब कर दिया
65وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ أَجْمَعِينَ
और मूसा और उसके साथियों को हमने (डूबने से) बचा लिया
66ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर दूसरे फरीक़ (फिरऔन और उसके साथियों) को डुबोकर हलाक़ कर दिया
67إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और उनमें अक्सर ईमान लाने वाले ही न थे
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अनुवाद — अश-शुआरा 65

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Tuesday, August 18, 2026

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