अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَوْ يَنفَعُونَكُمْ – या वे तुम्हें लाभ पहुँचाते हैं
- أَوْ يَضُرُّونَ – या वे तुम्हें हानि पहुँचाते हैं
व्याख्या:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को समझा रहे थे कि तुम जिन चीज़ों की पूजा करते हो, उनसे पहले यह सवाल करो — क्या वे तुम्हारी सुन सकते हैं? क्या वे तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकते हैं या कोई हानि दे सकते हैं? यानी जब तुम उन्हें पुकारते हो, क्या वे तुम्हारी आवाज़ सुनते हैं? जब तुम उनकी इबादत करते हो, क्या वे तुम्हें कोई फ़ायदा देते हैं? और अगर तुम उनकी इबादत छोड़ दो, तो क्या वे तुम्हें कोई नुक़सान पहुँचा सकते हैं?
यह एक बहुत ही सीधा और स्पष्ट तर्क है। जो चीज़ें न सुन सकें, न देख सकें, न लाभ पहुँचा सकें और न हानि — वे पूजा के योग्य कैसे हो सकती हैं? इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को तर्क और बुद्धि से समझा रहे थे कि तुम्हारी ये मूर्तियाँ और देवता न तो तुम्हारी सुनती हैं, न तुम्हें कुछ दे सकती हैं, और न ही तुमसे कुछ छीन सकती हैं। फिर इनकी पूजा क्यों?
यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत और बंदगी केवल उसी की होनी चाहिए जो सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ करने की शक्ति रखने वाला, और हर चीज़ पर क़ादिर हो — वही अल्लाह है। वही है जो सुनता है, देखता है, लाभ पहुँचाता है और हानि से बचाता है। इसलिए हमें अपनी हर दुआ, हर इबादत और हर भरोसे को सिर्फ़ अल्लाह पर ही रखना चाहिए। वही सच्चा मालिक है, वही सच्चा मददगार है। जब हम सीधे अल्लाह से जुड़ते हैं, तो हमें किसी और की ज़रूरत नहीं रहती — न किसी मूर्ति की, न किसी इंसान की, न किसी और चीज़ की। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) की शिक्षा है, और यही इस्लाम की रूह है।
📜 आयत 71-75 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 73
सूरा अश-शुआरा आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या तम्हें कुछ नफा या नुक़सान पहुँचा सकते हैंसूरा आयत 73/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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