अश-शुआरा · 73/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
أَوْ يَنفَعُونَكُمْ أَوْ يَضُرُّونَ ۝٧٣
Aw yanfa`oonakum aw yadurroon
📖 हिंदी अर्थ
या तम्हें कुछ नफा या नुक़सान पहुँचा सकते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَوْ يَنفَعُونَكُمْ – या वे तुम्हें लाभ पहुँचाते हैं
  • أَوْ يَضُرُّونَ – या वे तुम्हें हानि पहुँचाते हैं

व्याख्या:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को समझा रहे थे कि तुम जिन चीज़ों की पूजा करते हो, उनसे पहले यह सवाल करो — क्या वे तुम्हारी सुन सकते हैं? क्या वे तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकते हैं या कोई हानि दे सकते हैं? यानी जब तुम उन्हें पुकारते हो, क्या वे तुम्हारी आवाज़ सुनते हैं? जब तुम उनकी इबादत करते हो, क्या वे तुम्हें कोई फ़ायदा देते हैं? और अगर तुम उनकी इबादत छोड़ दो, तो क्या वे तुम्हें कोई नुक़सान पहुँचा सकते हैं?

यह एक बहुत ही सीधा और स्पष्ट तर्क है। जो चीज़ें न सुन सकें, न देख सकें, न लाभ पहुँचा सकें और न हानि — वे पूजा के योग्य कैसे हो सकती हैं? इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को तर्क और बुद्धि से समझा रहे थे कि तुम्हारी ये मूर्तियाँ और देवता न तो तुम्हारी सुनती हैं, न तुम्हें कुछ दे सकती हैं, और न ही तुमसे कुछ छीन सकती हैं। फिर इनकी पूजा क्यों?

यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत और बंदगी केवल उसी की होनी चाहिए जो सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ करने की शक्ति रखने वाला, और हर चीज़ पर क़ादिर हो — वही अल्लाह है। वही है जो सुनता है, देखता है, लाभ पहुँचाता है और हानि से बचाता है। इसलिए हमें अपनी हर दुआ, हर इबादत और हर भरोसे को सिर्फ़ अल्लाह पर ही रखना चाहिए। वही सच्चा मालिक है, वही सच्चा मददगार है। जब हम सीधे अल्लाह से जुड़ते हैं, तो हमें किसी और की ज़रूरत नहीं रहती — न किसी मूर्ति की, न किसी इंसान की, न किसी और चीज़ की। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) की शिक्षा है, और यही इस्लाम की रूह है।



📜 आयत 71-75 — अश-शुआरा

71قَالُوا نَعْبُدُ أَصْنَامًا فَنَظَلُّ لَهَا عَاكِفِينَ
कि तुम लोग किसकी इबादत करते हो तो वह बोले हम बुतों की इबादत करते हैं और उन्हीं के मुजाविर बन जाते हैं
72قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ إِذْ تَدْعُونَ
इबराहीम ने कहा भला जब तुम लोग उन्हें पुकारते हो तो वह तुम्हारी कुछ सुनते हैं
73أَوْ يَنفَعُونَكُمْ أَوْ يَضُرُّونَ
या तम्हें कुछ नफा या नुक़सान पहुँचा सकते हैं
74قَالُوا بَلْ وَجَدْنَا آبَاءَنَا كَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ
कहने लगे (कि ये सब तो कुछ नहीं) बल्कि हमने अपने बाप दादाओं को ऐसा ही करते पाया है
75قَالَ أَفَرَأَيْتُم مَّا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ
इबराहीम ने कहा क्या तुमने देखा भी कि जिन चीज़ों कीे तुम परसतिश करते हो
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अनुवाद — अश-शुआरा 73

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Tuesday, August 18, 2026

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