अन-नमल · 80/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاءَ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ ۝٨٠
Innaka laa tusmi`ul mawtaa wa laa tusmi`us summad du`aaa izaa wallaw mudbireen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक न तो तुम मुर्दों को (अपनी बात) सुना सकते हो और न बहरों को अपनी आवाज़ सुना सकते हो (ख़ासकर) जब वह पीठ फेर कर भाग ख़डें हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْمَوْتَىٰ – मुर्दे (यहाँ आशय उन लोगों से है जिनके दिल कुफ्र की वजह से मुर्दा हो चुके हैं)
  • الصُّمّ – बहरे (वे लोग जिनके कान सच्चाई सुनने से बंद हो गए हैं)
  • الدُّعَاءَ – पुकार, बुलावा (यहाँ तौहीद और ईमान की दावत)
  • وَلَّوْا مُدْبِرِينَ – पीठ फेरकर मुड़ गए (अर्थात पूरी तरह से मुँह मोड़कर चले गए)

तफसीर:

ऐ नबी! आप यह बात अच्छी तरह समझ लें कि आप उन लोगों को सच्चाई की आवाज़ नहीं सुना सकते जिनके दिल अल्लाह ने कुफ्र की वजह से मुर्दा कर दिए हैं। जिस तरह मुर्दा इंसान किसी की आवाज़ नहीं सुन सकता, उसी तरह ये लोग भी आपकी दावत से कोई फायदा नहीं उठा सकते। और न ही आप उन बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हैं जिनके कान अल्लाह ने हक़ सुनने से बंद कर दिए हैं — खासकर जब वे आपसे मुँह मोड़कर पीठ फेर लें। एक बहरा इंसान अगर सामने हो तो भी बात नहीं सुनता, फिर अगर वह पीठ फेरकर चला जाए तो उसे सुनाना तो और भी मुश्किल है।

यहाँ अल्लाह तआला ने कुफ्फार को "मुर्दे" और "बहरे" इसलिए कहा क्योंकि उनके दिल सच्चाई को समझने से खाली हैं और उनके कान नसीहत सुनने से महरूम हैं। वे सुनते तो हैं लेकिन दिल से नहीं सुनते, इसलिए उन्हें बहरों जैसा बताया गया। यह उनकी हालत की तस्वीर है — वे हक़ की आवाज़ से इतने दूर भागते हैं जैसे कोई मुर्दा या बहरा इंसान पुकारने वाले की आवाज़ से बेखबर हो।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। नबी करीम ﷺ जैसी अज़ीमुश्शान हस्ती भी किसी को हिदायत नहीं दे सकती जब तक अल्लाह चाहे। इसलिए हमें अपना काम सिर्फ अच्छी तरह से पहुँचाना है — बाकी अल्लाह पर छोड़ देना है। और यह भी याद रखें कि जब हम सच्चाई की दावत देते हैं तो हमें निराश नहीं होना चाहिए अगर लोग न सुनें, क्योंकि हमारा इनाम अल्लाह के पास है। साथ ही, यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की क़द्र करने की तालीम देती है — कि हमने दिल और कान सलामत पाए हैं, तो हमें इन नेमतों का सही इस्तेमाल करना चाहिए और कुरआन व हिदायत को ध्यान से सुनना चाहिए, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिन्हें मुर्दा और बहरा कहा गया।



📜 आयत 78-82 — अन-नमल

78إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُم بِحُكْمِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) बेशक तुम्हारा परवरदिगार अपने हुक्म से उनके आपस (के झगड़ों) का फैसला कर देगा और वह (सब पर) ग़ालिब और वाक़िफकार है
79فَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۖ إِنَّكَ عَلَى الْحَقِّ الْمُبِينِ
तो (ऐ रसूल) तुम खुदा पर भरोसा रखो बेशक तुम यक़ीनी सरीही हक़ पर हो
80إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاءَ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ
बेशक न तो तुम मुर्दों को (अपनी बात) सुना सकते हो और न बहरों को अपनी आवाज़ सुना सकते हो (ख़ासकर) जब वह पीठ फेर कर भाग ख़डें हो
81وَمَا أَنتَ بِهَادِي الْعُمْيِ عَن ضَلَالَتِهِمْ ۖ إِن تُسْمِعُ إِلَّا مَن يُؤْمِنُ بِآيَاتِنَا فَهُم مُّسْلِمُونَ
और न तुम अंधें को उनकी गुमराही से राह पर ला सकते हो तुम तो बस उन्हीं लोगों को (अपनी बात) सुना सकते हो जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं
82۞ وَإِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَابَّةً مِّنَ الْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِآيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ
फिर वही लोग तो मानने वाले भी हैं जब उन लोगों पर (क़यामत का) वायदा पूरा होगा तो हम उनके वास्ते ज़मीन से एक चलने वाला निकाल खड़ा करेंगे जो उनसे ये बाते करेंगा कि (फलॉ फला) लोग हमारी आयतो का यक़ीन नहीं रखते थे
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीRevelation
80आयत

अनुवाद — अन-नमल 80

सूरा अन-नमल आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक न तो तुम मुर्दों को (अपनी बात) सुना सकते…

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Tuesday, August 18, 2026

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