आल-इमरान · 6/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
هُوَ الَّذِي يُصَوِّرُكُمْ فِي الْأَرْحَامِ كَيْفَ يَشَاءُ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٦
Huwal lazee yusawwirukum fil arhaami kaifa yashaaa`; laa ilaaha illaa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
वही तो वह ख़ुदा है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُصَوِّرُكُمْ: वह तुम्हें आकार प्रदान करता है, तुम्हारी सूरत बनाता है।
  • الْأَرْحَامِ: माताओं के गर्भ (कोख)।
  • الْعَزِيزُ: वह शक्तिशाली जो कभी पराजित न हो, जिसके आगे कोई ताकत न चले।
  • الْحَكِيمُ: वह तत्वदर्शी जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और युक्ति से कार्य करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह की उस महान शक्ति और रचना-कला का वर्णन करती है जो मनुष्य के जन्म से पहले ही शुरू हो जाती है। अल्लाह ही वह है जो तुम्हें तुम्हारी माताओं के गर्भ में जिस रूप में चाहता है, आकार प्रदान करता है। वहाँ अंधेरे और तंग स्थान में वह तुम्हारी सूरत बनाता है — कभी लड़का बनाता है, कभी लड़की; किसी को सुंदर बनाता है, किसी को कम सुंदर; किसी को गोरा, किसी को साँवला; किसी को सुखी, किसी को दुखी — यह सब उसकी इच्छा और हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार होता है। कोई दूसरा शक्ति इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

इसके बाद अल्लाह अपनी एकता की घोषणा करता है: "ला इलाहा इल्ला हुवा" — उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। यहाँ यह बात उन ईसाइयों के खंडन में कही गई है जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह का बेटा या स्वयं अल्लाह मानते थे। क्योंकि जो गर्भ में बनता-संवरता है, जिसकी सूरत बदलती है, वह न तो ईश्वर हो सकता है और न ही ईश्वर की संतान। वह तो एक मख़लूक़ (प्राणी) है जो अल्लाह की कुदरत से बनता है। अल्लाह "अज़ीज़" है — उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं ठहर सकता, और वह "हकीम" है — उसका हर काम, हर फैसला, हर रचना पूर्ण ज्ञान और उद्देश्य पर आधारित है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की कुदरत पर विश्वास: जो अल्लाह तुम्हें माँ के गर्भ में बनाता है, वही तुम्हारी हर ज़रूरत को जानता है। यह सोचकर हमें उस पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।
  2. विनम्रता का पाठ: हमारी सूरत, हमारा रंग, हमारा लिंग — यह सब हमारी अपनी पसंद से नहीं बना, बल्कि अल्लाह की मर्ज़ी से बना है। इससे हमें घमंड नहीं करना चाहिए और न ही किसी को उसकी सूरत या रंग के कारण नीचा देखना चाहिए।
  3. एकता का संदेश: जब सबको एक ही अल्लाह ने बनाया है, तो सब इंसान बराबर हैं। ऊँच-नीच का पैमाना सूरत नहीं, बल्कि तक़वा (अल्लाह का डर) है।
  4. अल्लाह की हिकमत पर भरोसा: अल्लाह जो कुछ करता है, उसमें गहरी समझ और भलाई होती है। हमारी समझ में न आए तो भी उसके फैसले पर संतुष्ट रहना चाहिए।
  5. शिर्क से बचाव: यह आयत हमें सिखाती है कि जो इंसान है, वह पूजा का हक़दार नहीं। पूजा केवल उसी की है जो सबका रचयिता है — अल्लाह।
🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — आल-इमरान

4مِن قَبْلُ هُدًى لِّلنَّاسِ وَأَنزَلَ الْفُرْقَانَ ۗ إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ ذُو انتِقَامٍ
और हक़ व बातिल में तमीज़ देने वाली किताब (कुरान) नाज़िल की बेशक जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को न माना उनके लिए सख्त अज़ाब है और ख़ुदा हर चीज़ पर ग़ालिब बदला लेने वाला है
5إِنَّ اللَّهَ لَا يَخْفَىٰ عَلَيْهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ
बेशक ख़ुदा पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है (न) ज़मीन में न आसमान में
6هُوَ الَّذِي يُصَوِّرُكُمْ فِي الْأَرْحَامِ كَيْفَ يَشَاءُ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
वही तो वह ख़ुदा है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं
7هُوَ الَّذِي أَنزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ آيَاتٌ مُّحْكَمَاتٌ هُنَّ أُمُّ الْكِتَابِ وَأُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌ ۖ فَأَمَّا الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمْ زَيْغٌ فَيَتَّبِعُونَ مَا تَشَابَهَ مِنْهُ ابْتِغَاءَ الْفِتْنَةِ وَابْتِغَاءَ تَأْوِيلِهِ ۗ وَمَا يَعْلَمُ تَأْوِيلَهُ إِلَّا اللَّهُ ۗ وَالرَّاسِخُونَ فِي الْعِلْمِ يَقُولُونَ آمَنَّا بِهِ كُلٌّ مِّنْ عِندِ رَبِّنَا ۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُو الْأَلْبَابِ
वही (हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (ए रसूल) वही (वह ख़ुदा) है जिसने तुमपर किताब नाज़िल की उसमें की बाज़ आयतें तो मोहकम (बहुत सरीह) हैं वही (अमल करने के लिए) असल (व बुनियाद) किताब है और कुछ (आयतें) मुतशाबेह (मिलती जुलती) (गोल गोल जिसके मायने में से पहलू निकल सकते हैं) पस जिन लोगों के दिलों में कज़ी है वह उन्हीं आयतों के पीछे पड़े रहते हैं जो मुतशाबेह हैं ताकि फ़साद बरपा करें और इस ख्याल से कि उन्हें मतलब पर ढाले लें हालाँकि ख़ुदा और उन लोगों के सिवा जो इल्म से बड़े पाए पर फ़ायज़ हैं उनका असली मतलब कोई नहीं जानता वह लोग (ये भी) कहते हैं कि हम उस पर ईमान लाए (यह) सब (मोहकम हो या मुतशाबेह) हमारे परवरदिगार की तरफ़ से है और अक्ल वाले ही समझते हैं
8رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ
(और दुआ करते हैं) ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है
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अनुवाद — आल-इमरान 6

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Tuesday, August 18, 2026

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