आल-इमरान · 63/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِالْمُفْسِدِينَ ۝٦٣
Fa in tawallaw fa innal laaha`aleemun bil mufsideen
📖 हिंदी अर्थ
और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَلَّوْا – मुँह मोड़ लें, पीठ फेर लें, अर्थात ईमान लाने और आपका अनुसरण करने से इनकार कर दें।
  • عَلِيمٌ – भली-भाँति जानने वाला, सब कुछ जानने वाला।
  • بِالْمُفْسِدِينَ – उपद्रव फैलाने वालों, बिगाड़ पैदा करने वालों से।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि यदि ये लोग आपके पास आए हुए सत्य को सुनने और मानने के बाद भी उससे मुँह मोड़ लें, और आपके द्वारा लाई गई शिक्षाओं को स्वीकार न करें, तो आपको इसका कोई मलाल नहीं होना चाहिए। उनका यह मुँह मोड़ना उनके स्वयं के भ्रष्टाचार और बिगाड़ का प्रमाण है। वे धरती में उपद्रव और फसाद फैलाने वाले लोग हैं, जो अल्लाह की इबादत छोड़कर दूसरों की इबादत करते हैं और सत्य के मार्ग में रुकावटें डालते हैं। अल्लाह तआला उनके सारे कर्मों, उनके छिपे और खुले उपद्रवों से पूर्ण रूप से अवगत है। उनकी कोई भी चाल, कोई भी साज़िश उससे छिपी नहीं है। वह उन्हें उनके किए का पूरा-पूरा बदला देगा और उनकी शरारतों का हिसाब लेगा। यह आयत नबी ﷺ और उनके अनुयायियों के लिए एक तसल्ली और ढाढ़स है कि सत्य का प्रचार करना आपका कर्तव्य है, उसे मानना या न मानना लोगों की अपनी ज़िम्मेदारी है, और अल्लाह हर एक के कर्मों का न्याय करने वाला है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य का संदेश पहुँचाना हमारा काम है, लोगों को हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। इसलिए जब कोई सत्य को न माने तो हमें निराश नहीं होना चाहिए।
  2. अल्लाह तआला हर उस व्यक्ति से अच्छी तरह वाकिफ है जो धरती में फसाद फैलाता है, चाहे वह कितना ही छिपकर अपने काम करे। यह हमें सिखाता है कि हमें कभी भी बुराई और उपद्रव का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है।
  3. यह आयत मुसलमानों को धैर्य और स्थिरता का पाठ पढ़ाती है कि जब लोग सत्य से मुँह मोड़ें तो घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्य पर डटे रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
  4. हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि ईमान लाने के बाद उस पर स्थिर रहना बहुत ज़रूरी है। मुँह मोड़ना और पीठ फेरना इंसान को मुفسिदीन (उपद्रव फैलाने वालों) की श्रेणी में डाल सकता है, जिनके बारे में अल्लाह को पूरा ज्ञान है और वह उन्हें बदला देने वाला है।


📜 आयत 61-65 — आल-इमरान

61فَمَنْ حَاجَّكَ فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ وَنِسَاءَنَا وَنِسَاءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ اللَّهِ عَلَى الْكَاذِبِينَ
फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाएं) और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को
62إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْقَصَصُ الْحَقُّ ۚ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है
63فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِالْمُفْسِدِينَ
और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला है
64قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَىٰ كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَلَّا نَعْبُدَ إِلَّا اللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِّن دُونِ اللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوْا فَقُولُوا اشْهَدُوا بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
फिर अगर इससे भी मुंह फेरें तो (कुछ) परवाह (नहीं) ख़ुदा फ़सादी लोगों को खूब जानता है (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कहो कि ऐ अहले किताब तुम ऐसी (ठिकाने की) बात पर तो आओ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यकसॉ है कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करें और किसी चीज़ को उसका शरीक न बनाएं और ख़ुदा के सिवा हममें से कोई किसी को अपना परवरदिगार न बनाए अगर इससे भी मुंह मोडें तो तुम गवाह रहना हम (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार हैं
65يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تُحَاجُّونَ فِي إِبْرَاهِيمَ وَمَا أُنزِلَتِ التَّوْرَاةُ وَالْإِنجِيلُ إِلَّا مِن بَعْدِهِ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
ऐ अहले किताब तुम इबराहीम के बारे में (ख्वाह मा ख्वाह) क्यों झगड़ते हो कि कोई उनको नसरानी कहता है कोई यहूदी हालॉकि तौरेत व इन्जील (जिनसे यहूद व नसारा की इब्तेदा है वह) तो उनके बाद ही नाज़िल हुई
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
63आयत

अनुवाद — आल-इमरान 63

सूरा आल-इमरान आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला…

सूरा आयत 63/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए