अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَوَلَّوْا – मुँह मोड़ लें, पीठ फेर लें, अर्थात ईमान लाने और आपका अनुसरण करने से इनकार कर दें।
- عَلِيمٌ – भली-भाँति जानने वाला, सब कुछ जानने वाला।
- بِالْمُفْسِدِينَ – उपद्रव फैलाने वालों, बिगाड़ पैदा करने वालों से।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि यदि ये लोग आपके पास आए हुए सत्य को सुनने और मानने के बाद भी उससे मुँह मोड़ लें, और आपके द्वारा लाई गई शिक्षाओं को स्वीकार न करें, तो आपको इसका कोई मलाल नहीं होना चाहिए। उनका यह मुँह मोड़ना उनके स्वयं के भ्रष्टाचार और बिगाड़ का प्रमाण है। वे धरती में उपद्रव और फसाद फैलाने वाले लोग हैं, जो अल्लाह की इबादत छोड़कर दूसरों की इबादत करते हैं और सत्य के मार्ग में रुकावटें डालते हैं। अल्लाह तआला उनके सारे कर्मों, उनके छिपे और खुले उपद्रवों से पूर्ण रूप से अवगत है। उनकी कोई भी चाल, कोई भी साज़िश उससे छिपी नहीं है। वह उन्हें उनके किए का पूरा-पूरा बदला देगा और उनकी शरारतों का हिसाब लेगा। यह आयत नबी ﷺ और उनके अनुयायियों के लिए एक तसल्ली और ढाढ़स है कि सत्य का प्रचार करना आपका कर्तव्य है, उसे मानना या न मानना लोगों की अपनी ज़िम्मेदारी है, और अल्लाह हर एक के कर्मों का न्याय करने वाला है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य का संदेश पहुँचाना हमारा काम है, लोगों को हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। इसलिए जब कोई सत्य को न माने तो हमें निराश नहीं होना चाहिए।
- अल्लाह तआला हर उस व्यक्ति से अच्छी तरह वाकिफ है जो धरती में फसाद फैलाता है, चाहे वह कितना ही छिपकर अपने काम करे। यह हमें सिखाता है कि हमें कभी भी बुराई और उपद्रव का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है।
- यह आयत मुसलमानों को धैर्य और स्थिरता का पाठ पढ़ाती है कि जब लोग सत्य से मुँह मोड़ें तो घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्य पर डटे रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
- हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि ईमान लाने के बाद उस पर स्थिर रहना बहुत ज़रूरी है। मुँह मोड़ना और पीठ फेरना इंसान को मुفسिदीन (उपद्रव फैलाने वालों) की श्रेणी में डाल सकता है, जिनके बारे में अल्लाह को पूरा ज्ञान है और वह उन्हें बदला देने वाला है।
📜 आयत 61-65 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 63
सूरा आल-इमरान आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला…सूरा आयत 63/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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