यासीन · 75/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَهُمْ وَهُمْ لَهُمْ جُندٌ مُّحْضَرُونَ ۝٧٥
Laa yastatee`oona nasrahum wa hum lahum jundum muhdaroon
📖 हिंदी अर्थ
और ये कुफ्फ़ार उन माबूदों के लशकर हैं (और क़यामत में) उन सबकी हाज़िरी ली जाएगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَهُمْ: ये (पूजित देवता) उनकी (पूजा करने वालों की) सहायता नहीं कर सकते।
  • وَهُمْ لَهُمْ جُندٌ مُّحْضَرُونَ: और वे (पूजा करने वाले) उन्हीं (देवताओं) के लिए तैयार रहने वाले सैनिक (सहायक) हैं।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो अल्लाह को छोड़कर दूसरे देवी-देवताओं, मूर्तियों या वस्तुओं को अपना सहारा और मददगार बनाते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि ये तथाकथित देवता न तो अपनी पूजा करने वालों की कोई मदद कर सकते हैं और न ही अपनी रक्षा कर सकते हैं। वे बिल्कुल बेबस और लाचार हैं।

इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि जो लोग इन्हें पूजते हैं, वे स्वयं इनकी सेवा में लगे रहते हैं, इनकी हिफाज़त करते हैं, इन्हें सजाते-संवारते हैं, और इनके नाम पर अपना धन और समय खर्च करते हैं — गोया वे इन देवताओं के लिए तैयार रहने वाले सैनिक हैं। लेकिन जब उन्हें स्वयं किसी मुसीबत या संकट में मदद की ज़रूरत होती है, तो ये देवता उनके किसी काम नहीं आते।

क़यामत के दिन ये सारे लोग और उनके देवता एक साथ हाज़िर किए जाएँगे, और वहाँ न तो ये देवता उनकी सिफ़ारिश कर सकेंगे और न ही उन्हें अज़ाब से बचा सकेंगे। बल्कि वे एक-दूसरे से बराअत (अलगाव) का इज़हार करेंगे। यह उन लोगों के लिए बड़ी रुसवाई और नादानी का सबूत है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें गहरी सोच की दावत देती है — कि क्या हम अपनी ज़िंदगी में किसी ऐसी चीज़ पर भरोसा कर रहे हैं जो हमारी मदद नहीं कर सकती? क्या हम किसी इंसान, धन, रुतबे या मक़ाम को अपना आसरा बना रहे हैं, जबकि वे सब कमज़ोर और फ़ना होने वाले हैं? सिर्फ़ अल्लाह ही है जो सच्चा मददगार है, जो सुनता है, देखता है और हर मुसीबत में काम आता है। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है, उसे कभी निराशा नहीं होती। अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है: "जो कोई अल्लाह पर भरोसा करेगा, वह उसके लिए काफ़ी है।" (सूरह तलाक़: 3)

तो आओ, हम अपने दिलों को सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ें, उसी से मदद माँगें, और उसी की इबादत करें। यही सच्ची कामयाबी और सुकून का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 73-77 — यासीन

73وَلَهُمْ فِيهَا مَنَافِعُ وَمَشَارِبُ ۖ أَفَلَا يَشْكُرُونَ
और चार पायों में उनके (और) बहुत से फायदे हैं और पीने की चीज़ (दूध) तो क्या ये लोग (इस पर भी) शुक्र नहीं करते
74وَاتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ آلِهَةً لَّعَلَّهُمْ يُنصَرُونَ
और लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर (फर्ज़ी माबूद बनाए हैं ताकि उन्हें उनसे कुछ मद्द मिले हालाँकि वह लोग उनकी किसी तरह मद्द कर ही नहीं सकते
75لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَهُمْ وَهُمْ لَهُمْ جُندٌ مُّحْضَرُونَ
और ये कुफ्फ़ार उन माबूदों के लशकर हैं (और क़यामत में) उन सबकी हाज़िरी ली जाएगी
76فَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّا نَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनकी बातों से आज़ुरदा ख़ातिर (पेरशान) न हो जो कुछ ये लोग छिपा कर करते हैं और जो कुछ खुल्लम खुल्ला करते हैं-हम सबको यक़ीनी जानते हैं
77أَوَلَمْ يَرَ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ
क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीRevelation
75आयत

अनुवाद — यासीन 75

सूरा यासीन आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कुफ्फ़ार उन माबूदों के लशकर हैं (और क़यामत…

सूरा आयत 75/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए