अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَهُمْ: ये (पूजित देवता) उनकी (पूजा करने वालों की) सहायता नहीं कर सकते।
- وَهُمْ لَهُمْ جُندٌ مُّحْضَرُونَ: और वे (पूजा करने वाले) उन्हीं (देवताओं) के लिए तैयार रहने वाले सैनिक (सहायक) हैं।
तफसीर:
यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो अल्लाह को छोड़कर दूसरे देवी-देवताओं, मूर्तियों या वस्तुओं को अपना सहारा और मददगार बनाते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि ये तथाकथित देवता न तो अपनी पूजा करने वालों की कोई मदद कर सकते हैं और न ही अपनी रक्षा कर सकते हैं। वे बिल्कुल बेबस और लाचार हैं।
इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि जो लोग इन्हें पूजते हैं, वे स्वयं इनकी सेवा में लगे रहते हैं, इनकी हिफाज़त करते हैं, इन्हें सजाते-संवारते हैं, और इनके नाम पर अपना धन और समय खर्च करते हैं — गोया वे इन देवताओं के लिए तैयार रहने वाले सैनिक हैं। लेकिन जब उन्हें स्वयं किसी मुसीबत या संकट में मदद की ज़रूरत होती है, तो ये देवता उनके किसी काम नहीं आते।
क़यामत के दिन ये सारे लोग और उनके देवता एक साथ हाज़िर किए जाएँगे, और वहाँ न तो ये देवता उनकी सिफ़ारिश कर सकेंगे और न ही उन्हें अज़ाब से बचा सकेंगे। बल्कि वे एक-दूसरे से बराअत (अलगाव) का इज़हार करेंगे। यह उन लोगों के लिए बड़ी रुसवाई और नादानी का सबूत है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें गहरी सोच की दावत देती है — कि क्या हम अपनी ज़िंदगी में किसी ऐसी चीज़ पर भरोसा कर रहे हैं जो हमारी मदद नहीं कर सकती? क्या हम किसी इंसान, धन, रुतबे या मक़ाम को अपना आसरा बना रहे हैं, जबकि वे सब कमज़ोर और फ़ना होने वाले हैं? सिर्फ़ अल्लाह ही है जो सच्चा मददगार है, जो सुनता है, देखता है और हर मुसीबत में काम आता है। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है, उसे कभी निराशा नहीं होती। अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है: "जो कोई अल्लाह पर भरोसा करेगा, वह उसके लिए काफ़ी है।" (सूरह तलाक़: 3)
तो आओ, हम अपने दिलों को सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ें, उसी से मदद माँगें, और उसी की इबादत करें। यही सच्ची कामयाबी और सुकून का रास्ता है।
📜 आयत 73-77 — यासीन
अनुवाद — यासीन 75
सूरा यासीन आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कुफ्फ़ार उन माबूदों के लशकर हैं (और क़यामत…सूरा आयत 75/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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