अस-साफ्फात · 31/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَا ۖ إِنَّا لَذَائِقُونَ ۝٣١
Fahaqqa `alainaa qawlu Rabbinaaa innaa lazaaa`iqoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَحَقَّ – वाजिब ठहरा, सिद्ध हो गया
  • قَوْلُ رَبِّنَا – हमारे रब का वचन (वादा)
  • لَذَائِقُونَ – अवश्य चखने वाले हैं

तफ़सीर:

यह आयत उस हालत का वर्णन कर रही है जब अहले जहन्नम (जहन्नम वालों) के सरदार अपने अनुयायियों से बात करेंगे। वे कहेंगे: "हमारे रब का वचन हम पर सिद्ध हो चुका है, और वह वचन यह था कि हम सब अवश्य ही अज़ाब का मज़ा चखेंगे।"

यह वही वचन है जो अल्लाह तआला ने इब्लीस और उसके अनुयायियों के बारे में फ़रमाया था: "मैं जहन्नम को तुमसे और उन सब लोगों से भर दूँगा जो तुम्हारी पैरवी करेंगे।" (सूरत साद: 85)

यानी जब दुनिया में ये लोग अल्लाह के हुक्म को झुठलाते थे और नबियों की दावत को नकारते थे, तो अल्लाह का फ़ैसला पहले से लिखा जा चुका था कि इनकार करने वालों को जहन्नम में डाला जाएगा। अब उस फ़ैसले पर अमल हो रहा है और ये लोग अपनी गलती को समझ रहे हैं, लेकिन पछतावे का वक़्त गुज़र चुका है।

यह आयत हमें बहुत बड़ी नसीहत देती है कि अल्लाह का वादा और उसका डर सच्चा है। जिस तरह अल्लाह ने अच्छे लोगों के लिए जन्नत का वादा किया है, उसी तरह बुरे लोगों के लिए जहन्नम की धमकी भी दी है। अल्लाह का हर वादा पूरा होकर रहेगा।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी कैसे बिता रहे हैं। क्या हम अल्लाह के हुक्मों पर चल रहे हैं? क्या हम उन चीज़ों से बच रहे हैं जिनसे अल्लाह ने रोका है? अगर हम दुनिया में अल्लाह की इबादत करेंगे और उसके रास्ते पर चलेंगे, तो आख़िरत में हमें जन्नत की नेमतें मिलेंगी। लेकिन अगर हम अल्लाह से ग़ाफ़िल रहे और गुनाह करते रहे, तो वह दिन बहुत बुरा होगा जब हमें अपनी गलतियों का अफ़सोस होगा।

अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचाकर जन्नत अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 29-33 — सूरा अस-साफ्फात

29قَالُوا بَل لَّمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे
30وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًا طَاغِينَ
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे
31فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَا ۖ إِنَّا لَذَائِقُونَ
फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे
32فَأَغْوَيْنَاكُمْ إِنَّا كُنَّا غَاوِينَ
हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया
33فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ
ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 31

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Saturday, October 3, 2026

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